खाली जमीन से होगी लाखों की कमाई, 3 साल में मिलेगी ₹2.5 लाख तक मदद, जानें योजना
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Mnrega Horticulture Scheme: मनरेगा बागवानी योजना के तहत किसान अपनी निजी जमीन पर फलदार पौधे लगाकर 3 साल में 2 से 2.5 लाख रुपये तक की सरकारी मदद पा सकते हैं. इसमें मुफ्त पौधे, घेराबंदी, सिंचाई और 3 साल तक पौधों की देखभाल के लिए दैनिक मजदूरी की व्यवस्था है.
सीतामढ़ी. खेती-किसानी को आसान और अधिक मुनाफेदार बनाने के लिए सरकार की ओर से किसानों को कई तरह की सब्सिडी और आर्थिक सहायता दी जा रही है. इन्हीं योजनाओं में से एक है, मनरेगा बागवानी योजना. इस योजना के तहत किसान अपनी निजी जमीन पर आम, नींबू, अमरूद या अन्य फलदार पौधे लगाकर 3 सालों में करीब 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक की सरकारी मदद पा सकते हैं. यह योजना उन किसानों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो अपनी खाली या कम उपयोग वाली जमीन से बेहतर कमाई करना चाहते हैं.
पौधों से लेकर घेराबंदी और सिंचाई तक की पूरी व्यवस्था
मनरेगा पदाधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ पौधे लगाने के लिए ही मदद नहीं मिलती, बल्कि पूरी बागवानी को सुरक्षित और तैयार करने का खर्च भी सरकार उठाती है. योजना के अंतर्गत किसानों को मुफ्त पौधे, खाद और पौधों की सुरक्षा के लिए जमीन की घेराबंदी के साथ-साथ सिंचाई के लिए चापाकल आदि की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. इससे किसानों पर शुरुआत में लगने वाली लागत का बोझ बहुत कम हो जाता है.
पौधों की देखरेख के लिए मिलेगी रोज मजदूरी
लाभुक किसान रामनाथ सिंह ने बताया कि बागवानी लगाने के साथ-साथ पौधों की 3 साल तक देखभाल करने के लिए किसान को मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी भी दी जाती है. योजना में हर दिन ₹245 के हिसाब से 497 दिनों की मजदूरी का प्रावधान है. इसका मतलब है कि किसान अगर सुबह-शाम 2-2 घंटे भी अपने बाग की निगरानी और देखरेख करता है, तो उसे हर महीने करीब ₹1860 से ₹1900 तक का भुगतान सीधे उसके बैंक खाते में किया जाता है.
यूनिट के हिसाब से तय होती है आर्थिक सहायता
योजना के नियम के अनुसार, 150 से 200 पौधों का एक यूनिट बनता है. जैसे अगर कोई किसान 8 से 8.5 कट्ठा जमीन में 160 से 200 पौधे लगाता है, तो वह एक यूनिट के तहत सब्सिडी और मजदूरी पाने का हकदार हो जाता है. नर्सरी से पौधे खरीदने पर लगने वाली लागत पर भी सरकार सब्सिडी देकर पैसे वापस लौटा देती है, जिससे किसान को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है.
परंपरागत खेती और बटाई से कहीं ज्यादा मुनाफा
जो किसान अपनी जमीन को बटाई या पट्टे, जिसे स्थानीय भाषा में मनखप भी कहा जाता है, पर देते हैं, उन्हें सालभर में नाममात्र की कमाई होती है. लेकिन मनरेगा बागवानी से जुड़कर अगर फल की पैदावार शुरू हो जाए, तो कुछ ही सालों में लाखों रुपये की कमाई आसानी से हो सकती है. 2 से 3 साल में जैसे ही पौधे फल देने लगते हैं, बाजार में फसल बेचकर किसान अपनी जमीन का कई गुना अधिक दाम वसूल सकते हैं.