एमपी में बस सफर पड़ोसी राज्यों से महंगा! किराया 2 से 3.50 रुपए प्रति किमी, यूपी-राजस्थान-गुजरात से ज्यादा

एमपी में बस सफर पड़ोसी राज्यों से महंगा! किराया 2 से 3.50 रुपए प्रति किमी, यूपी-राजस्थान-गुजरात से ज्यादा


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MP Sugam Parivahan Seva Bus Fare Hike: मध्य प्रदेश में यात्री बसों का किराया 60% तक बढ़ने के बाद अब बस सफर पड़ोसी राज्यों से महंगा हो गया है. प्रदेश में न्यूनतम किराया करीब 2 रुपए और अधिकतम 3.50 रुपए प्रति किलोमीटर है, जबकि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसों में भी लगभग इतना ही किराया लगेगा.

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MP Sugam Parivahan Seva Bus Fare Hike: मध्य प्रदेश में यात्री बसों का किराया बढ़ने के बाद अब प्रदेश में बस से सफर करना पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगा हो गया है. बस ऑपरेटर्स की मांग और चेतावनी के बाद सरकार ने करीब डेढ़ माह पहले यात्री बसों के किराए में 60% तक की बढ़ोतरी की थी. अब प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसें भी शुरू हो गई हैं. इन बसों में भी यात्रियों से लगभग उतना ही किराया लिया जाएगा, जितना प्राइवेट बसों में देना पड़ता है.

मध्य प्रदेश के बस किराए की तुलना उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात से करने पर प्रदेश में किराए की दर अधिक दिखाई देती है. मध्य प्रदेश में बसों का न्यूनतम किराया करीब 2 रुपए प्रति किलोमीटर और अधिकतम 3.50 रुपए प्रति किलोमीटर है.

वहीं, यूपी में यह दर 1.35 से 2.86 रुपए प्रति किलोमीटर, राजस्थान में 0.95 से 2.10 रुपए, छत्तीसगढ़ में 1.25 से 2.81 रुपए और गुजरात में 0.95 से 2.70 रुपए प्रति किलोमीटर है. इस तुलना के मुताबिक मध्य प्रदेश में सामान्य से लेकर महंगी कैटेगरी की बसों का किराया ज्यादा है.

पांच साल में ही बढ़ाया किराया
मध्य प्रदेश में जुलाई 2026 तक यात्री बसों का संचालन 20 अप्रैल 2021 को तय किए गए किराए के आधार पर हो रहा था. यानी पिछली किराया दर तय होने के करीब पांच साल बाद इसमें बड़ा बदलाव किया गया. इसके उलट राजस्थान में किराया बढ़ाने का अंतर काफी लंबा रहा. वहां सरकार ने करीब 10 साल बाद अगस्त 2025 में बस किराए में बढ़ोतरी की थी. साधारण बसों का किराया 85 पैसे से बढ़ाकर 95 पैसे प्रति किलोमीटर किया गया. वहीं, सुपर लग्जरी एसी बसों का अधिकतम किराया 2.10 रुपए प्रति किलोमीटर तय किया गया.

यात्रियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
मध्य प्रदेश में किराए में 60 प्रतिशत तक के बढ़ने के बाद रेगुलर बस यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है. खासकर रोजाना नौकरी, कारोबार, पढ़ाई या अन्य कामों के लिए बस से यात्रा करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर इसका असर पड़ सकता है.

अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को सरकारी बसों में भी लगभग समान किराया देना होगा. ऐसे में बस किराए की तुलना और यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है.



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