Marakata Shiva Lingam I पत्थर बताता है पूरी होगी मनोकामना या नहीं, हैदराबाद के इस मंदिर का रहस्य जानिए

Marakata Shiva Lingam I पत्थर बताता है पूरी होगी मनोकामना या नहीं, हैदराबाद के इस मंदिर का रहस्य जानिए


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मन की मुराद पूरी होगी या नहीं? हाथ रखते ही जवाब देता है ये रहस्यमयी पत्थर

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Marakata Shiva Lingam: हैदराबाद के पास चेन्नीपालेम गांव में स्थित श्री ब्रह्मसूत्र मरकत लिंगेश्वर स्वामी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां मौजूद मनोकामना पत्थर के बारे में कहा जाता है कि इच्छा पूरी होने पर यह दाईं ओर घूम जाता है. मंदिर में दुर्लभ ब्रह्मसूत्र मरकत शिवलिंग भी विराजमान है, जिसे लेकर कई प्राचीन धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं.

हैदराबाद. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद की चकाचौंध से कुछ ही दूरी पर आस्था और रहस्य का एक ऐसा अनोखा केंद्र मौजूद है जो इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा में है. गच्चीबाउली से करीब 30 किलोमीटर दूर शंकरपल्ली क्षेत्र के चेन्नीपालेम गांव में स्थित श्री ब्रह्मसूत्र मरकत लिंगेश्वर स्वामी मंदिर अपनी आध्यात्मिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर परिसर की सबसे बड़ी खासियत यहां रखा एक विशेष पत्थर है, मंदिर आने वाले भक्तों में इसे लेकर गहरी आस्था है. मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु इस पत्थर पर दोनों हाथ रखकर अपनी मनोकामना मांगता है और वह इच्छा पूरी होने वाली होती है तो यह पत्थर अपने आप दाई ओर घूम जाता है. इस रहस्यमयी अनुभव को देखने और महसूस करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं.

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग भी अपने आप में बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक है. यह पन्ना यानी मरकत पत्थर से निर्मित है जिस पर स्पष्ट ब्रह्मसूत्र रेखा अंकित है. कहा जाता है कि स्पष्ट ब्रह्मसूत्र रेखा वाले ऐसे दुर्लभ मरकत शिवलिंग पूरे देश में मुख्य रूप से दो ही स्थानों पर हैं—पहला तमिलनाडु के थिरुवरूर स्थित त्यागराज मंदिर में और दूसरा तेलंगाना के इसी चेन्नीपालेम गांव में. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिवलिंग की स्थापना त्रेतायुग में स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. धार्मिक मान्यताओं में यह भी माना जाता है कि इस दुर्लभ ब्रह्मसूत्र मरकत शिवलिंग के दर्शन मात्र से 1,000 सामान्य शिवलिंगों के दर्शन और पूजन के बराबर पुण्य प्राप्त होता है.

इसके अलावा, यहां पहुंचने वाले भक्तों को खुद अपने हाथों से शिवलिंग का जलाभिषेक करने की सुविधा भी मिलती है,l जो इसे और अधिक खास बनाती है. मंदिर परिसर में मुख्य शिवलिंग के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं. वहीं, क्षेत्रपाल के रूप में काल भैरव स्वामी का स्थान भी मौजूद है. काल भैरव के समीप ही वह मनोकामना वाला पत्थर और एक प्राचीन ऐतिहासिक शिलालेख स्थित है जो इस स्थल की प्राचीनता को प्रमाणित करता है. शांत वातावरण और प्राकृतिक हरियाली के बीच स्थित यह मंदिर आज धार्मिक पर्यटन और शोध का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है.



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