भारत अपने पहले अंतरिक्ष मानव मिशन गगनयान के बाद स्पेस में धुआंधार स्पीड से आगे बढ़ने वाला है. ISRO चेयरमैन डॉ. वी नारायणन ने खुद इसकी जानकारी दी है. IIT दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पेस सेक्टर में हो रहे बदलावों, इसरो के बड़े मिशन और संगठन के रोडमैप के बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि देश में स्पेस सेक्टर रिफॉर्म्स के बाद 440 स्पेस स्टार्टअप चल रहे हैं जो सिर्फ सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल पर काम नहीं कर रहे, बल्कि कई दूसरे क्षेत्रों में भी इतिहास रचने को तैयार हैं. जो भारत के स्पेस ईकोसिस्टम को मजबूत बना रहे हैं.
ISRO ने चंद्रयान-3 के साथ इतिहास रच दिया था. इस सफलता के साथ भारत ने दुनिया को दिखा दिया था कि वह सिर्फ सैटेलाइट और रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है. अब ISRO अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर जोर शोर से काम कर रहा है. इसके ठीक बाद चंद्रयान-4 कतार में है जो सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचने तक सीमित नहीं, बल्कि वहां से मिट्टी और पत्थरों के सैंपल वापस लाने वाला मिशन है. इसके बाद भारत का अपना स्पेस स्टेशन और 2040 तक चांद पर भारतीय एस्ट्रॉनॉट की उपस्थिति भी ISRO का सपना है.
गगनयान मिशन पहली प्राथमिकता
गगनयान मिशन ISRO की प्राथमिकता में शामिल है. यह भारत का पहला अंतरिक्ष मानव मिशन है. इसके ट्रायल पूरे हो चुके हैं. इसरो चेयरमैन के मुताबिक इस साल की शुरुआत में इसका G2 मिशन लॉन्च किया जा सकता है जो असल में एक परीक्षण उड़ान है. इसमें रोबोट व्योममित्र को भेजा जाएगा. उड़ान से ये देखा जाएगा कि गगनयान की मुख्य उड़ान कितनी सुरक्षित है.
हालांकि मुख्य मिशन लॉन्चिंग से पहले G3 मिशन भी लॉन्च होगा तो परीक्षण की अगली कड़ी होगी. इसके बाद 2027 की पहली तिमाही में ही भारत मुख्य H1 मिशन लॉन्च करेगा, जिसमें एस्ट्रॉनॉट को लॉ अर्थ ऑर्बिट तक भेजा जाएगा. यहां तीन दिन रहकर ये अंतरिक्ष यात्री वापस धरती पर लौटेंगे. ऐसा करके भारत अपनी दम पर ह्यूमन मिशन लॉन्च करने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा.
फिर चंद्रयान-4 की बारी
भारत चंद्रयान-3 को साउथ पोल पर उतारकर ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है. दरअसल मून पर तो अब तक कई देश पहुंचे हैं, लेकिन चांद के साउथ पोल पर उपस्थिति दर्ज कराने वाला भारत पहला देश था. अब इस मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है. चंद्रयान-4 मिशन 2027 के अंत तक लॉन्च किए जाने की योजना है. खास बात ये है कि ये सिर्फ एक लैंडिंग मिशन नहीं होगा. इस बार चांद की मिट्टी और पत्थरों के सैंपल वापस धरती पर लाए जाएंगे. इसके लिए डॉकिंग टेक्नोलॉजी का भारत पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण कर चुका है.
अपना स्पेस स्टेशन भी होगा
गगनयान और चंद्रयान-4 के बाद भारत का लक्ष्य अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन बनाना है. गगनयान की परीक्षण उड़ाने भी इस मिशन का ही हिस्सा हैं. फिलहाल स्पेस स्टेशन डेवलप किया जा रहा है. इसरो चीफ डॉ. वी नारायणन के मुताबिक इसका पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च कर दिया जाएगा. आने वाले सालों में दूसरे मॉड्यूल भी इससे जोड़े जाएंगे. इसरो ने जो टारगेट सेट किया है, उस लिहाज से 2035 तक इसे डेवलप कर लिया जाएगा. यह साइंटिफिक मिशन नहीं होगा बल्कि अंतरिक्ष में भारत की नियमित उपस्थिति सुरिश्चित करेगा जहां रिसच और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च किए जा सकेंगे.
फिर चांद पर उतारेगा एस्ट्रॉनॉट
भारत सिर्फ स्पेस स्टेशन बनाने पर नहीं रुकने वाला. इसरो का रोडमैप 2040 तक भारतीय एस्ट्रॉनॉट को अपने दम पर चांद तक पहुंचाना है. इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. उससे पहले वीनस मिशन भी कतार में हैं, जिसके लिए नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल पर काम चल रहा है. यह ऐसा लॉन्च व्हीकल होगा जो अपने साथ 30 हजार किलोग्राम तक वजन ले जा सकेगा.
90 के दशक में नहीं मिली थी जो टेक्नोलॉजी, वह अब खुद बना रहा भारत
इसरो चीफ डॉ. वी नारायणन ने भारत की आत्मनिर्भरता का उदाहरण देते हुए बताया कि 1990 के दशक में भारत को यह तकनीक नहीं दी गई थी. इसरो ने इसे देश में ही डेवलप किया. अब तक तीन क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम बनाए जा चुके हैं. यानी अब भारत ऐसी क्षमता विकसित कर चुका है, जिसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा.