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Purnea News: किसी खंडहर में भी सपनों की नई इमारत खड़ी हो सकती है. पूर्णिया के जिला स्कूल में इसकी एक मिसाल सामने आई है. यहां लंबे समय से जर्जर पड़े मकान का कायाकल्प कर आधुनिक लाइब्रेरी बनाई गई है. एक सकारात्मक सोच और जिलाधिकारी की पहल आज गरीब छात्रों के सपनों को नई उड़ान दे रहा है. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.
पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार की पहल पर जिला स्कूल में खंडहर का कायाकल्प, बनी अत्याधुनिक लाइब्रेरी
पूर्णिया. कभी खंडहर में तब्दील पड़ा जिला स्कूल का एक जर्जर मकान का कायाकल्प कर जिला प्रशासन ने इसे एक अत्याधुनिक लाइब्रेरी में बदल दिया है. यहां कंपटीशन की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं बहुत कम पैसे में या बिल्कुल मुफ्त में पढ़ाई कर सकते हैं. यह पहल गरीब छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले गरीब छात्र-छात्राओं को महंगी प्राइवेट लाइब्रेरी की फीस की चिंता किए बिना पढ़ाई का मौका मिल रहा है. इस लाइब्रेरी में एक साथ 150 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है.
खंडहर से बनी डेढ़ सौ छात्रों की आधुनिक लाइब्रेरी
जिला स्कूल परिसर में बने जर्जर मकान को जिला प्रशासन ने सेवा संकल्प कायाकल्प अभियान के तहत नया रूप दिया है. जिलाधिकारी अंशुल कुमार के ने कहा, इस भवन का जीर्णोद्धार कर इसे आधुनिक लाइब्रेरी में बदला गया है. यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी किताबें, वाई-फाई और लाइब्रेरियन की व्यवस्था की गई है. लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय भी बनाए गए हैं. इस पहल का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के लिए बेहतर और सुविधाजनक माहौल देना है.
महंगी फीस की मजबूरी से मिलेगी राहत
डीएम अंशुल कुमार ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को पहले प्राइवेट लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए काफी फीस देनी पड़ती थी. कई छात्रों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल होता था. अब जिला प्रशासन की इस पहल से उन्हें मुफ्त पढ़ाई का अवसर मिलेगा. लाइब्रेरियन भी मौजूद रहेंगे, जो किताबों और पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों में विद्यार्थियों की मदद करेंगे.
नाइट गार्ड की नौकरी के साथ पढ़ाई कर रहे सावन को मिली उम्मीद
इस लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे सावन सोरेन की कहानी इस पहल का महत्व बताती है. सावन नाइट गार्ड का काम करते हैं और साथ में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि गरीबी के कारण एक समय उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रख पाने को लेकर चिंता होती थी. लेकिन सरकारी लाइब्रेरी में मुफ्त पढ़ाई का मौका मिलने से उन्हें राहत मिली है. उनके मुताबिक, यहां पढ़ाई के लिए अच्छी सुविधाएं और शांत माहौल उपलब्ध है.
पूजा पाल को भी तैयारी के लिए मिला बेहतर माहौल
लाइब्रेरी में पढ़ने वाली छात्रा पूजा पाल का कहना है कि यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कई अच्छी किताबें उपलब्ध हैं. वाई-फाई समेत आधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ाई के लिए शांत वातावरण भी मिलता है. ऐसे में विद्यार्थियों को तैयारी के लिए जरूरी संसाधन एक ही जगह उपलब्ध हो रहे हैं. पूर्णिया की यह लाइब्रेरी दिखाती है कि पुराने सरकारी संसाधनों को उपयोगी बनाकर शिक्षा के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं. जिन विद्यार्थियों के लिए महंगी सुविधाएं पहुंच से बाहर थीं, उनके लिए अब उसी शहर में पढ़ाई का एक नया रास्ता खुला है.
यह तो शुरुआत, 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों का भी होगा कायाकल्प
डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि यह तो सिर्फ शुरुआत है. अगले कुछ दिनों में जिले के करीब 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य जर्जर सरकारी भवनों का भी इसी तरह कायाकल्प किया जा रहा है. प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी सरकारी भवन खंडहर न रहे, बल्कि वह जनता के काम आए. पूर्णिया की यह पहल पूरे बिहार के लिए एक सकारात्मक संदेश और मिसाल है कि अगर नीयत सही हो तो खंडहर भी ज्ञान का मंदिर बन सकता है.