नैनीताल: कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल में इस बार का छात्रसंघ चुनाव महिला आरक्षण के कारण खास चर्चा में है. आरक्षित पदों पर छात्राओं की सीधी दावेदारी ने कैंपस की छात्र राजनीति का चेहरा बदल दिया है. छात्राएं अब केवल प्रचार या समर्थन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनावी मैदान में उतरकर नेतृत्व की भूमिका के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं.
विश्वविद्यालय की ओर से जारी चुनाव संबंधी जानकारी के अनुसार, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए गए हैं. संयुक्त सचिव पद पर अनुष्का पुरी और गौरी आमने-सामने हैं, जबकि कोषाध्यक्ष पद के लिए सृष्टि रावत और विदुषी वर्मा के बीच मुकाबला है. दोनों पदों पर प्रत्याशी परिसर में छात्र-छात्राओं से संपर्क कर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगी हैं.
महिला आरक्षण से बढ़ा छात्राओं का उत्साह
महिला आरक्षण के बाद डीएसबी परिसर की छात्राओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. छात्राओं का कहना है कि छात्र राजनीति में नेतृत्व के अवसर मिलने से वे अपनी समस्याओं और मुद्दों को विश्वविद्यालय स्तर पर मजबूती से उठा सकेंगी. वहीं चुनावी मैदान में उतरी प्रत्याशियों का कहना है कि यह मौका छात्राओं को अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाने के साथ ही राजनीति में आगे बढ़ने का मंच भी दे रहा है. संयुक्त सचिव पद की प्रत्याशी अनुष्का पुरी ने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि राजनीति में लंबे समय से पुरुषों की भागीदारी अधिक रही है. ऐसे में महिला आरक्षण से उनके जैसी छात्राओं को चुनाव लड़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ सकती हैं. उनके अनुसार, आरक्षण से छात्राओं का मनोबल बढ़ा है और छात्र राजनीति में आगे आने की उम्मीद भी मजबूत हुई है.
‘लड़कियां भी चला सकती हैं कैंपस’
कोषाध्यक्ष पद की प्रत्याशी सृष्टि रावत ने भी महिला आरक्षण का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्राओं को छात्र राजनीति में अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर मिलेगा. उनका कहना है कि कैंपस की जिम्मेदारी केवल छात्र नेताओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्राएं भी नेतृत्व की भूमिका निभाकर परिसर को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती हैं. सृष्टि ने कहा कि छात्राओं को मौका मिलने से वे अपने मुद्दों और समस्याओं को अधिक प्रभावी तरीके से सामने रख सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि छात्राओं को नेतृत्व का अवसर मिलने से कैंपस की राजनीति में उनकी भागीदारी और बढ़ेगी.
गौरी बोलीं- समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा सकेंगी
संयुक्त सचिव पद की प्रत्याशी गौरी का कहना है कि छात्र राजनीति में छात्राओं के लिए आरक्षण मिलना स्वागत योग्य पहल है. उन्होंने कहा कि कई बार छात्राओं को कैंपस में ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनके लिए वे चाहती हैं कि कोई छात्र नेत्री उनकी बात को बेहतर तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाए. गौरी के मुताबिक, महिला आरक्षण ने छात्राओं को राजनीति में आने के लिए एक खुला मंच दिया है. इससे राजनीति में रुचि रखने वाली छात्राएं कॉलेज स्तर से ही अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कर सकती हैं और आगे चलकर समाज के हित में काम कर सकती हैं.
चुनावी मैदान में बढ़ी हलचल
डीएसबी परिसर में चुनाव प्रचार के साथ अब छात्र राजनीति का माहौल भी लगातार गर्म हो रहा है. आरक्षित पदों पर आमने-सामने खड़ी छात्राएं छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचकर अपने मुद्दे और प्राथमिकताएं बता रही हैं. वहीं कैंपस की छात्राएं भी इस चुनाव को महिला नेतृत्व के नए अवसर के तौर पर देख रही हैं. डीएसबी परिसर का यह छात्रसंघ चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि महिला आरक्षण के बाद छात्राओं की प्रत्यक्ष राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है. अब चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि आरक्षित पदों पर मैदान में उतरी प्रत्याशियों में से किसे छात्रों का समर्थन मिलता है और कौन डीएसबी की छात्र राजनीति में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालती है.