घर में हुई है किसी की अकाल मृत्यु, तो पितृ पक्ष में जरूर करें ये 3 उपाय
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Pitru Paksha 2026 Moksha Upay: परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हुई है यानि रोग, दुर्घटना, आत्महत्या आदि के कारण परिवार का कोई सदस्य चल बसा है, तो पितृ पक्ष में ऐसे लोगों के मोक्ष और आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय करते हैं. वहीं अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को होता है. ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना से जानते हैं अकाल मृत्यु वाले पितरों के मोक्ष के उपाय.
पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु वाले पितरों के मोक्ष के उपाय. (Photo: AI)
Pitru Paksha 2026 Moksha Upay: पितरों की पूजा, तर्पण और उनको तृप्त करने का पर्व पितृ पक्ष चल रहा है. हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के समय में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और पूरे एक पक्ष तक निवास करते हैं. उनकी तृप्ति के लिए जल दान या तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, अन्न और वस्त का दान आदि करते हैं. इससे वे संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं. जो लोग अपनी आयु को पूर्ण करके देह त्याग करते हैं, उनके लिए उनके निधन की तिथि पर तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं. लेकिन जिनकी आयु पूरी नहीं हुई और उनकी अल्प आयु में ही मृत्यु हो गई. उनके लिए पितृ पक्ष में एक विशेष तिथि निर्धारित है और उस दिन ही श्राद्ध करते है. लेकिन उनके लिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष उपाय भी करते हैं, जिससे उनकी भटकती हुई आत्मा को तृप्ति मिल सके और ईश्वर की कृपा से मोक्ष प्राप्त कर सकें.
अकाल मृत्यु का अर्थ?
जो लोग अपनी आयु पूरी नहीं कर पाते हैं और अल्प आयु में ही उनका निधन हो जाता है, वहीं अकाल मृत्यु कहलाती है. उदाहरण के लिए जब कोई दुर्घटना, आग, किसी असाध्य रोग, जहर या आत्महत्या से अपना जीवन खत्म कर लेता है या हो जाता है और वह ईश्वर की दी हुई आयु को पूरा नहीं कर पाता है, वह अकाल मृत्यु की श्रेणी में आता है.
अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए पितृ पक्ष में उपाय
- कानपुर की ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना के अनुसार, यदि किसी के घर में उसके परिवार के सदस्य की अकाल मृत्यु हुई है तो उसे पितृ पक्ष के 15 दिनों में श्रीमद्भागवत पुराण के महात्म का पाठ जरूर करना चाहिए या फिर सुनना चाहिए. ऐसा करने से उस जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.
- अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध के लिए चतुर्दशी तिथि निर्धारित है, जिसे चतुर्दशी श्राद्ध के नाम से जानते हैं. चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है, जिनकी कृपा से अकाल मृत्यु का योग लेकर पैदा होने वाला भी व्यक्ति दीर्घायु हो जाता है. इस साल चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर को है.
- पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर को रात में 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 अक्टूबर को रात 09 बजकर 35 मिनट तक है. चतुर्दशी श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त 11:45 ए एम से लेकर दोपहर 12:31 पी एम तक है, जो 47 मिनट का होगा. वहीं उस दिन का रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 पी एम से लेकर 01:18 पी एम तक है. यह भी 47 मिनट तक है. अपराह्न काल दोपहर 01:18 पी एम से लेकर 03:38 पी एम तक रहेगा, जो 2 घंटे 20 मिनट तक है.
- चतुर्दशी श्राद्ध के दिन आप सुबह में स्नान करके एक लोटे में गंगाजल डालकर उसमें पवित्र जल मिला लें. फिर उसमें काले तिल डाल लें. जिस व्यक्ति की अकाल मृत्यु हुई है, उस व्यक्ति के नाम से भगवान शिव का उस जल से अभिषेक करें. भगवान शिव से प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार के उस सदस्य को मोक्ष प्रदान करें और पूजा का पुण्य फल उसे प्राप्त हो.
पितरों के तर्पण का मंत्र
जब आप अपने पितर को तर्पण दें तो ओम पितृ देवतायै नमः या फिर ओम पितृभ्यः स्वधा नमः या ओम सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः मंत्र का उच्चारण करें. यह तर्पण देने का मंत्र है. इससे आपके पितर संतुष्ट और तृप्त होंगे.