Bihar: ‘रॉकी सिंह-रविलाल’, बिहार में क्या-क्या हैं तस्करों के सीक्रेट कोडवर्ड, चखना की बोरी में छिपा था माल

Bihar: ‘रॉकी सिंह-रविलाल’, बिहार में क्या-क्या हैं तस्करों के सीक्रेट कोडवर्ड, चखना की बोरी में छिपा था माल


पटनाः बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्कर अवैध शराब की सप्लाई के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं. अब सिर्फ रास्ते और गाड़ियां ही नहीं बदली जा रही हैं, बल्कि बातचीत की भाषा भी बदल दी गई है. शराब की बोतल को बोतल नहीं कहा जाता. कहीं खेप को पार्सल बताया जाता है तो कहीं शराब के ब्रांड के लिए आम लोगों के नाम इस्तेमाल किए जाते हैं. तस्करों ने व्हिस्की, रम से लेकर बीयर तक के लिए सीक्रेड कोडवर्ड बना रखे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सहरसा के एसपी विक्रम सिहाग के मुताबिक कुछ गिरोह फोन पर शराब के ब्रांड के लिए आम नामों का इस्तेमाल करते हैं. उदाहरण के तौर पर ‘Royal Stag’ को कथित तौर पर ‘रॉकी सिंह’ और ‘Red Label’ को ‘रविलाल’ कहा जाता है. इसी तरह खेप या उसके मूवमेंट के लिए ‘फूड’, ‘किराना’, ‘दूध’, ‘तेल’, ‘सिल्क-साड़ी’ और ‘पार्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है. जांच अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद बातचीत को सामान्य कारोबारी लेन-देन जैसा दिखाना होता है. फोन पर डिलीवरी, गाड़ी, भुगतान और सामान पहुंचाने की बात होती है, लेकिन असल में इशारा शराब की खेप की तरफ हो सकता है.

एक रुपये के नोट और तेजपत्ता से मिला सुराग
हालांकि ये कोड हर गिरोह में एक जैसे नहीं होते. एक गिरोह के लिए किसी शब्द का जो मतलब है, दूसरे गिरोह में उसका अर्थ अलग हो सकता है. इसलिए जांच एजेंसियां फोन बातचीत के साथ गाड़ियों, ठिकानों, आरोपियों और बरामद खेप को जोड़कर पूरी कड़ी तलाशती हैं. मुजफ्फरपुर में एक मामले में तस्करों ने कथित तौर पर एक रुपये के नोट और तेजपत्ते को पहचान के संकेत के तौर पर इस्तेमाल किया. मई में उत्पाद विभाग ने होम्योपैथिक दवा की बोतलों के नाम पर ले जाए जा रहे स्पिरिट की खेप पकड़ी थी. जांच में ‘Whizz Dilution Sepia-6’ और ‘Whizz Dilution Justicia Adhatoda 30C’ लिखे 20 कार्टन मिले. टीम को सूचना मिली थी कि बैरिया बस स्टैंड इलाके से होम्योपैथिक दवा की आड़ में स्पिरिट ले जाई जा रही है.

उत्पाद विभाग की टीम ने अहियापुर थाना क्षेत्र में पटाही एयरपोर्ट मैदान के पास एक संदिग्ध ऑटो को रोका. करीब 180 लीटर स्पिरिट बरामद हुई. इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो करजा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर खाजे गांव में एक पोल्ट्री फार्म तक टीम पहुंची. वहां कथित तौर पर अवैध शराब बनाने का काम चल रहा था. अधिकारियों के मुताबिक आरोपी के पास मिला एक कोड नंबर जांच में अहम कड़ी बना. इसी के आधार पर डिलीवरी नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिली.

‘RC’, ‘BP’, ‘Pipe’ और ‘मास्टरजी’ जैसे नाम
पटना में शराब की डिलीवरी से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक तस्करी के नेटवर्क में ब्रांड के पूरे नाम लेने से बचा जाता है. Royal Challenge को ‘आरसी’ और Blenders Pride को ‘बीपी’ कहा जाता है. 100 Pipers के लिए ‘पाइप’ और Teachers के लिए ‘मास्टरजी’ जैसे नाम इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. 180 एमएल के टेट्रा पैक के लिए ‘फ्रूटी’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की भी जानकारी दी गई. ऐसे कोड का मकसद बातचीत में शराब का सीधा जिक्र नहीं करना होता है.

चखने की बोरी में छिपी 13 लाख की शराब
बाढ़ के पंचमहला इलाके में तस्करों ने शराब छिपाने के लिए कुरकुरे की बोरियों का सहारा लिया. उत्पाद विभाग ने एक पिकअप वाहन को रोका. ऊपर कुरकुरे के बोरे रखे थे. तलाशी लेने पर इनके नीचे करीब 1,200 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई. बरामद शराब की कीमत करीब 13 लाख रुपये आंकी गई. मामले में दो संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया. जांच में खेप के धनबाद से बेगूसराय की ओर ले जाए जाने का शक जताया गया.

खाली दिख रही SUV में बना था गुप्त ठिकाना
गोपालगंज के फुलवरिया इलाके में भी तस्करों का अलग तरीका सामने आया. सड़क पर लगभग खाली नजर आ रही SUV ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा. गाड़ी की बारीकी से तलाशी ली गई तो इंजन, बॉडी, चेसिस और स्टेपनी के आसपास छिपे हिस्से मिले. आरोप है कि इन्हीं गुप्त जगहों में शराब छिपाकर ले जाई जा रही थी. बिहार में शराबबंदी के बीच सामने आए ये मामले बताते हैं कि तस्कर खेप छिपाने के साथ उसकी पहचान छिपाने के लिए भी नए तरीके अपना रहे हैं. जांच एजेंसियां अब इन कोड वर्ड, वाहनों, डिलीवरी पॉइंट और आरोपियों के बीच संबंध जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.



Source link