अगर आप अमेजॉन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), Meesho मीशो जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइटों या ऐप से खरीदारी करते हैं, तो आपका ऑनलाइन शॉपिंग एक्सपीरियंस बदलने वाला है. सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 में बदलाव किए हैं. इनका मकसद ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों को ज्यादा जानकारी देना और उन्हें गलत ऑफर या विज्ञापन, गलत सर्च रिजल्ट और अन्य भ्रामक तरीकों से बचाना है. यानी कोई सामान खरीदने से पहले ग्राहक के पास यह जानने के लिए ज्यादा जानकारी होगी कि वह वास्तव में क्या खरीद रहा है और कितने में खरीद रहा है.
1 जनवरी 2027 से ये नियम लागू होंगे. नए नियमों में डिस्काउंट दिखाने से लेकर सर्च रिजल्ट, स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट, शिकायत, प्रोडक्ट की जानकारी और ग्राहक के डेटा तक कई चीजों को लेकर नियम बदले गए हैं. सरकार के मुताबिक इससे ई-कॉमर्स कारोबार में ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी और ग्राहकों को खरीदारी का फैसला लेने में आसानी होगी. नए नियमों से आपकी ऑनलाइन खरीदारी में क्या-क्या बदल सकता है, ये जान लीजिए.
1. डिस्काउंट देखकर नहीं होंगे कन्फ्यूजन
कई बार ऑनलाइन शॉपिंग में कोई सामान 40 या 50 फीसदी डिस्काउंट पर दिखता है, लेकिन कंज्यूमर को यह पता नहीं होता कि उसकी बताई गई पुरानी कीमत वास्तव में कितनी थी. नए नियम इसे क्लियर कर देंगे.
अब जब किसी प्रोडक्ट पर कीमत कम करके दिखाई जाएगी, तो प्लेटफॉर्म को नई कीमत के साथ उसकी ‘पहले की कीमत’ भी बतानी होगी. यह पहले की कीमत उस सामान की पिछले 30 दिनों में रही सबसे कम कीमत होगी. इससे कंज्यूमर समझ सकेगा कि डिस्काउंट वास्तव में कितना है और सिर्फ बड़ी छूट दिखाकर खरीदारी के लिए आकर्षित तो नहीं किया जा रहा.
2. सर्च रिजल्ट में मनमानी करना पड़ेगा भारी
आपने किसी सामान को सर्च किया और सबसे ऊपर वही प्रोडक्ट आ गया जो महंगा है या किसी खास कंपनी का है. नए नियम ऐसे सर्च रिजल्ट की मनमानी पर रोक लगाने की कोशिश करते हैं. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐसे तरीके से सर्च रिजल्ट को नहीं बदल सकेंगे जिससे ग्राहक को गलत जानकारी मिले या उसके सर्च से कम संबंधित सामान सबसे पहले दिखाया जाए. यानी सर्च करते समय रिजल्ट की रिलेवेंसी ज्यादा मायने रखेगी.
3. स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट की पहचान
कई बार एड और सामान्य सर्च रिजल्ट में अंतर करना मुश्किल होता है. नए नियमों के तहत पेड या स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट की पहचान साफ तौर पर करनी होगी. इसका मतलब है कि अगर कोई ब्रांड या विक्रेता पैसे देकर अपने प्रोडक्ट को ऊपर दिखवा रहा है, तो ग्राहक को यह जानकारी सही तरह से दी जाएगी. इससे ग्राहक समझ सकेगा कि सामने दिख रहा प्रोडक्ट सर्च के कारण ऊपर है या पैसे देकर प्रमोट किया गया है.
4. वेबसाइट की ‘चालाकी’ पर भी नजर
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई ऐसी डिजाइन या तकनीक इस्तेमाल होती हैं जो ग्राहक को उसकी इच्छा के खिलाफ खरीदारी या कोई दूसरा फैसला लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं. इन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है. नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को हर साल खुद जांच करनी होगी कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसे तरीके तो इस्तेमाल नहीं हो रहे. उन्हें नियमों के पालन का सर्टिफिकेट भी इसमें दिखाना होगा.
5. शिकायत से लेकर प्रोडक्ट की जानकारी
अगर कंज्यूमर शिकायत करता है, तो उसे दर्ज की गई शिकायत की कॉपी भी देनी होगी. साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों को National Consumer Helpline से जुड़ना होगा, जिससे शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत हो सके. इसके अलावा ग्राहकों को प्रोडक्ट की जरूरी जानकारी जैसे एक्सपायरी या बेस्ट-बिफोर डेट, रिटर्न और रिफंड नियम, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी. इंपोर्टेड सामान के मामले में इंपोर्टर का नाम और सामान किस देश से आया है, यह भी बताना होगा.
6. नहीं वसूल पाएंगे एक्स्ट्रा चार्ज
नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्राहकों से ऐसे अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूल सकेंगे, जिनका खरीदी गई वस्तु या ऑनलाइन लेनदेन से कोई सीधा संबंध नहीं है. हालांकि, नियमों में तय शर्तों के तहत आने वाले लॉयल्टी या मेंबरशिप प्रोग्राम इससे अलग होंगे. साथ ही, कंज्यूमर की जानकारी का इस्तेमाल उसकी साफ अनुमति के बिना कारोबारी कामों के लिए नहीं किया जा सकेगा.