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Bangladesh News: बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में नदियों से 541 और जनवरी-अगस्त 2026 के बीच 379 शव बरामद हुए, यानी 20 महीनों में कुल 920 शव. मानवाधिकार संगठन MSF के मुताबिक सितंबर के पहले 20 दिनों में भी 42 अज्ञात शव मिले. विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव नदियों में फेंके जाने की आशंका है.
बांग्लादेश की नदियां उगल रहीं लाशें.
ढाका: बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच पुलिस ने इस साल अगस्त तक पिछले 20 महीनों में देशभर की नदियों से 920 शव बरामद किए हैं, जबकि हत्या, बलात्कार, अपहरण और डकैती की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. अपराध विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस खतरनाक प्रवृत्ति ने यह आशंका बढ़ा दी है कि पेशेवर अपराधी हत्याओं के बाद सबूतों को ठिकाने लगाने के लिए बांग्लादेश की नदियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि पुलिस मामलों की प्रभावी जांच और समाधान करने में असमर्थ दिख रही है.
बांग्लादेशी दैनिक ‘न्यू एज’ ने बताया कि विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि शव पर वजन बांधकर नदी में फेंकने से हत्यारों को पकड़े जाने से बचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है, जबकि नदी की धारा अवशेषों को बहाकर काफी दूर ले जा सकती है, जिससे जांचकर्ताओं के लिए अपराध की जगह का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. बांग्लादेश रिवर पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए न्यू एज ने बताया कि 2025 में देशभर की नदियों से 541 शव बरामद किए गए, जबकि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच 379 शव और मिले. हालांकि, रिवर पुलिस के आंकड़े इस भयावह तस्वीर का केवल एक हिस्सा हैं, क्योंकि सड़कों के किनारे और रेलवे ट्रैक के पास भी अक्सर शव मिलते हैं.
बांग्लादेश में कहां कितने शव मिले
अपनी ताजा रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठन ‘मानबाधिकार शोंस्कृति फाउंडेशन’ (एमएसएफ) ने कहा है कि सितंबर 2026 के पहले 20 दिनों के दौरान ढाका समेत बांग्लादेश के विभिन्न इलाकों में नदी किनारों, सड़कों, रेलवे लाइनों, खेतों और अन्य स्थानों से कम से कम 42 अज्ञात शव बरामद किए गए. न्यू एज की रिपोर्ट के अनुसार, MSF के आंकड़ों से पता चला है कि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच 465 अज्ञात शव बरामद किए गए. 14 सितंबर को, स्थानीय लोगों की ओर से सांभोग यूनियन के देपाशाई नोआपारा में एक खेल के मैदान के पास तैरता हुआ शव देखे जाने और अधिकारियों को सूचित करने के बाद, पुलिस ने बंशी नदी से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया.
शव की पहचान न होने पर क्या करते हैं?
धामराई थाने के निरीक्षक (जांच) शहीदुल इस्लाम ने शनिवार को बताया कि मृतक की पहचान अब तक अज्ञात है. इस घटना के संबंध में अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है. न्यू एज ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा, ‘पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की एक टीम थाने में आई और उसकी पहचान तय करने के लिए शव के फिंगरप्रिंट लेने की कोशिश की, लेकिन असफल रही. बाद में उसका डीएनए सैंपल लेने के बाद शव को एक अज्ञात व्यक्ति के रूप में दफना दिया गया.’
एमएसएफ के मुख्य कार्यकारी सैदुर रहमान के अनुसार, संगठन के विश्लेषण से पता चला है कि बरामद किए गए अधिकांश शव पीड़ितों की अन्य स्थानों पर हत्या किए जाने के बाद नदियों में फेंके गए प्रतीत होते हैं. नदियों और अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में शवों की बरामदगी को चिंताजनक बताते हुए सैदुर ने कहा, ‘हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि कई पीड़ितों को जमीन, पारिवारिक, वित्तीय और राजनीतिक मामलों से संबंधित विभिन्न विवादों पर हत्या के बाद फेंका जा रहा है. अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज करने से राज्य को अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही से मुक्ति नहीं मिल जाती.’