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Hemant Soren News: बड़गाई अंचल के 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. उन्होंने PMLA कोर्ट के 21 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है. इसको लेकर हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की गई है. मेंटेनेबिलिटी को लेकर कल हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. पूरी खबर विस्तार से आगे पढिये.
हेमंत सोरेन की याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई
रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़गाई अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में PMLA कोर्ट के एक और आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने 21 सितंबर को निचली अदालत की ओर से दिए गए उस आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है, जिसमें ईडी की जांच पूरी होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया टालने की मांग खारिज कर दी गई थी. अब इस याचिका की मेंटेनेबिलिटी यानी सुनवाई योग्य होने के सवाल पर झारखंड हाईकोर्ट में 29 सितंबर को सुनवाई होगी.
बड़गाई जमीन मामले में आरोप तय करने के आदेश को चुनौती
यह मामला रांची के बड़गाई अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित घोटाले का है. ED ने इस मामले में हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. PMLA कोर्ट पहले ही 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुका है. इस मामले में हेमंत सोरेन ने निचली अदालत में मांग की थी कि ईडी की जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए जाएं. हालांकि, PMLA कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद उन्होंने 21 सितंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल कर उठाया कानूनी सवाल
हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की गई है. याचिका में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके बाद मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. अब हाईकोर्ट में सबसे पहले याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई होनी है. यानी अदालत यह देखेगी कि इस मामले में दाखिल याचिका सुनवाई के योग्य है या नहीं.
हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
इस मामले में हाईकोर्ट का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई के बाद ही याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी. फिलहाल हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट का रुख यह तय करेगा कि इस चुनौती पर आगे सुनवाई की जाएगी या नहीं.