रूस-उत्तर कोरिया के बीच शुरू हुए नए सड़क पुल को लेकर यूक्रेन चिंतित क्यों है?
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रूस और उत्तर कोरिया बीच नया सड़क पुल शुरू हो गया है. यूक्रेन इसे अपने लिए खतरा मान रहा है. यूक्रेन का दावा है कि उसे रणनीतिक तौर पर नुकसान पहुंचाने के लिए ही आनन-फानन में पुल का निर्माण कराया गया है. वहीं रूस के प्रधानमंत्री इसे उत्तर कोरिया के साथ मजबूत संबंधों का उदाहरण बता रहे हैं.
उत्तर कोरिया और रूस के बीच नया सड़क पुल शुरू हो गया है. (फोटो-रॉयटर्स)
रूस और उत्तर कोरिया को जोड़ने वाला नया पुल शुरू होने पर यूक्रेन ने चिंता जताई है. इस पुल का निर्माण तकरीबन 16 महीनों में पूरा हुआ है. यूक्रेन का मानना है कि युद्ध की वजह से दोनों देशों ने इसे पूरा किया है, ताकि उत्तर कोरिया से रूस को मिलने वाली मदद में आसानी हो. दरअसल इस पुल को बनाए जाने को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक बातचीत चल रही थी, लेकिन कभी काम नहीं शुरू किया गया था. यूक्रेन युद्ध के बाद न सिर्फ पुल को मंजूरी मिली, बल्कि काम भी जल्द से जल्द पूरा कर लिया गया.
रूस और उत्तर कोरिया में पिछले कुछ सालों में संबंध जितने मजबूत हुए हैं, ये पुल उसकी बानगी माना जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई. इसके उद्घाटन समारोह में रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे दोनों देशों के बीच दोस्ती का नया अध्याय बताया. उन्होंने कहा कि पुल के बन जाने से दोनों देशों के बीच तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि यूक्रेन की आपत्ति के बाद ये बड़ा सवाल है कि क्या सच में पुल को बनाने का मकसद यूक्रेन युद्ध है.
कहां बना है यह पुल?
रूस और उत्तर कोरिया के बीच ये पुल तुमेन नदी पर बनाया गया है. यह नदी ही दोनों देशों की सीमा को बांटती है. सबसे खास बात ये है कि दोनों देशों के बीच साझा सीमा सिर्फ 17 किलोमीटर लंबी है. उत्तर कोरिया की सबसे ज्यादा सीमा चीन के साथ लगती है जो 1400 किलोमीटर से ज्यादा है. इससे पहले दोनों देशों के बीच सिर्फ रेल मार्ग और हवाई मार्ग की ही सुविधा थी. अब सड़क मार्ग ने दोनों देशों के बीच आवागमन को बहुत आसान बना दिया है. इसीलिए इसे दोनों देशों के संबंधों की मजबूत कड़ी माना जा रहा है.
यूक्रेन को किस बात का डर?
यूक्रेन इस पुल को दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध की तरह नहीं मान रहा. यूक्रेन का कहना है कि यह नया रास्ता हथियार ट्रांसफर करने का आसान रास्ता बन जाएगा. द गार्जियन ने ट्रुथ हाउंड्स के ओपन सोर्स रिसर्च को लीड करने वाले नाजार मिखुन के हवाले से लिखा है कि यह रास्ता सैन्य लॉजिस्टिक के लिए अहम होगा. इससे उत्तर कोरियाई सैनिकों, निर्माण ब्रिगेड को रूस पहुंचाने का सीधा रास्ता बन जाएगा. यूक्रेन ये आशंका इसलिए जता रहा है, क्योंकि इस पुल को लेकर पिछले कई सालों से बात चल रही थी, मगर बातचीत कभी आगे नहीं बढ़ पाई थी. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के महज 16 माह के अंदर ही इसका निर्माण पूरा कर लिया गया.
व्यापार बढ़ेगा या सैन्य सहयोग?
उत्तर कोरिया मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट NK न्यूज के डेटा संवाददाता एंटन सोकोलिन के मुताबिक पुल से आर्थिक फायदा तो बहुत ज्यादा नहीं होने वाला. यह एक साधारण दो लेन वाला पुल है. इसके आगे उत्तर कोरिया की तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्यादा खराब है. ऐसे में यह कोई विशाल कॉरिडोर की तरह काम नहीं कर सकता, जिससे अरबों का व्यापार शुरू हो. यूक्रेन का दावा है कि रूस ने उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों KN-23 और KN-24 का उसके ऊपर इस्तेमाल किया है. पुल शुरू होने से ये हथियार आसानी से रूस तक पहुंचाए जा सकेंगे.
चीन के लिए भी संदेश है ये पुल
वर्तमान में उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार चीन है, लेकिन उत्तर कोरिया लंबे समय से चीन और रूस के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है. दिलचस्प बात यह है कि चीन के साथ यालू नदी पर बना एक नया पुल 11 साल पहले तैयार हो गया था, लेकिन उसे पूरी तरह चालू नहीं किया गया. वहीं रूस के साथ बना यह पुल बहुत तेजी से तैयार कर दिया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग इस कदम के जरिए बीजिंग को यह संदेश देना चाहता है कि उसके पास सिर्फ चीन ही नहीं, रूस भी एक मजबूत विकल्प है.