Liquor Prices can increase in Delhi: दिल्ली में रम, व्हिस्की, टकीला, ब्रांडी पीकर गला तर करने वालों को बड़ा झटका लगने वाला है. आने वाले दिनों में उन्हें रम से गम भुलाना महंगा पड़ सकता है. दिल्ली सरकार त्यौहारों से पहले नई लिकर पॉलिसी ला सकती है या पुरानी ही लिकर पॉलिसी में बड़ा बदलाव कर सकती है. इससे राजधानी में शराब के दाम बढ़ सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक दिल्ली सरकार नई एक्साइज पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट तैयार कर चुकी है. इसे लेकर अक्टूबर में अधिसूचना जारी करने की योजना है. हालांकि फिलहाल दिल्ली एक्साइज डिपार्टमेंट में कमिश्नर आने वाले हैं, इसके बाद त्योहारी सीजन में इस ड्राफ्ट का दिल्ली कैबिनेट और एलजी तरनजीत सिंह संधू के पास भेजा जाएगा.
इस बार त्यौहारों से पहले अगर ये नई पॉलिसी लागू होती है तो शराब पर एक्साइज ड्यूटी और रिटेल मार्जिन दोनों ही बढ़ सकते हैं. इससे लिकर की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी.सरकार का कहना है कि इस पॉलिसी का मकसद दिल्ली का राजस्व बढ़ाना है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई एक्साइज पॉलिसी का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है. उपराज्यपाल और दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सरकार अक्टूबर में इसे अधिसूचित करने की तैयारी कर रही है, ताकि त्योहारों के पीक सीजन से पहले यह नीति लागू हो जाए.
दिल्ली की दुकानों पर मिलेगी प्रीमियम शराब
इस बारे में अधिकारी ने बताया कि पॉलिसी में निजी खिलाड़ियों के प्रवेश की संभावना नहीं है, बल्कि मुख्य बदलाव फिक्स्ड रिटेल मार्जिन और एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर केंद्रित है. फिलहाल दिल्ली में सिर्फ सरकारी शराब की दुकानें चल रही हैं. फिक्स्ड मार्जिन के कारण रिटेल विक्रेताओं को ज्यादा आमदनी नहीं होती. नए बदलाव से दुकानों का स्तर सुधरने और ज्यादा ग्राहक आने की भी उम्मीद है.
इसके अलावा जो सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है वह प्रीमियम दुकानों को लेकर हो सकता है. दिल्ली सरकार प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है.
वर्तमान में इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) पर प्रति बोतल 50 रुपये और विदेशी शराब पर 100 रुपये का फिक्स्ड रिटेल मार्जिन तय है. इस सीमा के कारण दिल्ली की दुकानें 1,000 रुपये से महंगी प्रीमियम इंपोर्टेड शराब नहीं रखतीं. इसका नतीजा ये होता है कि प्रीमियम शराब के लिए दिल्ली के लोग गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे पड़ोसी शहरों का रुख करते हैं, जहां फिक्स्ड मार्जिन नहीं होने से दाम भी कम होते हैं और प्रीमियम शराब मिलती है.
उदाहरण के लिए, दिल्ली में ब्लैक लेबल करीब 3,500 रुपये में मिलती है, जबकि गुरुग्राम में वही ब्रांड करीब 2,400 रुपये में उपलब्ध हो जाती है. फिक्स्ड मार्जिन हटने से यह समस्या दूर होने की उम्मीद है.
एक्साइज ड्यूटी भी बढ़ाई जाएगी
दिल्ली सरकार रिटेल मार्जिन के अलावा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की भी योजना बना रही है. फिलहाल दिल्ली में एक्साइज ड्यूटी थोक मूल्य (डब्ल्यूएसपी) के अलग-अलग स्लैब के आधार पर लगाई जाती है और शराब के प्रकार के अनुसार बदलती रहती है. भारतीय स्पिरिट्स पर ड्यूटी 30 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक है. इन स्लैब में बढ़ोतरी होने पर शराब के दामों में टैक्स स्लैब बढ़ेगा और कीमतें एकदम से ऊपर जाएंगी. इसके अलावा होटलों, क्लबों और रेस्तरां में शराब परोसने के समय में भी बदलाव हो सकता है.
पिछली शराब नीति हो गई थी रद्द
बता दें कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार की शराब नीति सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद रद्द कर दी गई थी. उसके बाद दिल्ली सरकार ने पुरानी नीति बहाल की और सिर्फ सरकारी दुकानों को संचालित करने की अनुमति दी.
विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली की एक्साइज ड्यूटी देश में सबसे ऊंची नहीं है. अगर सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है तो कुछ गुंजाइश है. बीयर पर वर्तमान में 150 प्रतिशत और इंपोर्टेड लिकर पर 85 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगती है, साथ में 25 प्रतिशत वैट भी है. एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से शराब के दाम निश्चित तौर पर बढ़ेंगे. इससे त्यौहारी सीजन में पीने के शौकीनों को झटका लग सकता है.