धनतेरस पर इस बार बन रहा शुक्र प्रदोष का संयोग, शिव पूजा के लिए भी खास रहेगा ये दिन, इस विधि से करें पूजा

धनतेरस पर इस बार बन रहा शुक्र प्रदोष का संयोग, शिव पूजा के लिए भी खास रहेगा ये दिन, इस विधि से करें पूजा


Dhanteras Shukra Pradosh Vrat 2026: धनतेरस का त्योहार आमतौर पर सोने-चांदी, नए बर्तन और घर के लिए शुभ चीजें खरीदने से जुड़ा होता है. लेकिन साल 2026 में इस दिन एक खास धार्मिक संयोग भी बन रहा है. दरअसल, 6 नवंबर को धनतेरस के साथ शुक्रवार का प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा, जिसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा.

एक ही दिन भगवान शिव, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा का अवसर मिलने से यह तिथि धार्मिक नजरिए से खास बन गई है. आइए जानते हैं कि शुक्र प्रदोष और धनतेरस का यह संयोग क्यों खास है और इस दिन पूजा कैसे करें.

आज है धनतेरस और शुक्र प्रदोष व्रत?
साल 2026 में आज ही धनतेरस यानी 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जा रही. इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी रखा जा रहा है. पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह तक रहेगी. प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद आने वाले प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है. शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को शुक्र प्रदोष कहा जाता है.

क्यों खास है धनतेरस और शुक्र प्रदोष का मेल?
धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. कई परिवार इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी करते हैं.

वहीं, प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. मान्यता है कि प्रदोष काल में महादेव की पूजा और व्रत करने से उनकी कृपा मिलती है. शुक्रवार होने के कारण इस बार इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सुख-सुविधाओं से भी जोड़ा जाता है.

इस तरह एक ही दिन धनतेरस और शुक्र प्रदोष का होना भक्तों के लिए खास अवसर है. हालांकि, दोनों व्रतों और पूजाओं का अपना अलग महत्व है.

शुक्र प्रदोष पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
शुक्र प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है. व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और सेहत के अनुसार फलाहार या पूरे दिन उपवास कर सकते हैं. शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है. इसके लिए ये बातें ध्यान रख सकते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं.
शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें.
भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और धतूरा चढ़ाएं.
पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.
शिव चालीसा या प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें.
अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें.

धनतेरस पर किसकी पूजा करें?
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है. शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है. कई घरों में धन और समृद्धि की कामना के साथ कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा भी होती है.

इस दिन लोग अपनी श्रद्धा और बजट के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन या दूसरी नई चीजें खरीदते हैं. शाम को यम दीपदान करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज के नाम से दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र की कामना की जाती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



Source link