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Diamond State Summit Rajasthan 2026: न्यूज18 की ओर से आयोजित डायमंड स्टेट समिट राजस्थान 2026 में बीजेपी की पार्षद नेहा जोशी और कांग्रेस की पार्षद सुमन भाटी ने राजस्थान की राजनीति में GenZ की एंट्री पर विचार रखे. 21 और 22 साल की इन युवा महिला पार्षदों ने कम उम्र में मिली जिम्मेदारियों, स्थानीय विकास, सड़कों की बदहाली और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के विजन को साझा किया. साथ ही राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से जूझ रहे युवाओं के दर्द, रोजगार के नए अवसरों और राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर बेबाक राय व्यक्त की.
Rajasthan GenZ राजनीति पर BJP नेहा जोशी और Congress सुमन भाटी की चर्चा
Diamond State Summit Rajasthan 2026: राजस्थान की राजनीति में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. राजनीति में अनुभव और उम्र के पुराने पैमानों को पीछे छोड़ते हुए अब 21-22 साल के युवा सीधे नगर निगम और नगर पालिकाओं में पार्षद बनकर जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
न्यूज18 की ओर से आयोजित Diamond State Summit 2026 के मंच पर बीजेपी की अलवर से 21 वर्षीय पार्षद नेहा जोशी और कांग्रेस की जयपुर से 22 वर्षीय पार्षद सुमन भाटी ने शिरकत की. दोनों युवा नेताओं ने इस खास चर्चा में GenZ युवाओं की सोच, राजनीति में उनकी बढ़ती सक्रियता, जमीनी समस्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और स्थानीय स्तर पर विकास के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी.
कम उम्र में राजनीति में कदम और जनसेवा की बड़ी जिम्मेदारी
जब मंच पर दोनों पार्षदों से उनकी उम्र पूछी गई तो 21 साल की नेहा जोशी और 22 साल की सुमन भाटी ने अपनी मौजूदगी से सभी को प्रभावित किया. इतनी कम उम्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी पर बात करते हुए बीजेपी की पार्षद नेहा जोशी ने बताया कि वे पहले जयपुर में पत्रकारिता कर रही थीं. जब वे अपने गांव गईं तो उन्होंने देखा कि वहां सड़कों की लाइटें सालों से बंद पड़ी थीं, साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी और पुराने प्रतिनिधियों के प्रति जनता में भारी निराशा थी. इसी जमीनी हकीकत को देखकर उन्होंने पत्रकारिता छोड़ खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि जब वे सक्रिय हुईं तो क्षेत्र की जनता ने भी उन पर भरोसा जताया और उन्हें भारी बहुमत से जिताया.
दूसरी तरफ कांग्रेस की पार्षद सुमन भाटी ने बहुत ही सरलता से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि विकास के कामों में पार्टीबाजी या एक-दूसरे पर आरोप लगाना ठीक नहीं होता है. सुमन ने स्पष्ट कहा कि पार्षद बनने का असली मकसद अपने क्षेत्र की समस्याओं को हल करना और विकास कार्य करवाना होता है, चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो. उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधि पूरी निष्ठा और तन-मन से काम करे तो पूरा क्षेत्र बेहतर बन सकता है. सुमन ने अपने क्षेत्र की लड़कियों के लिए लाइब्रेरी बनवाने और महिलाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने को अपनी पहली प्राथमिकता बताया.
पेपर लीक का मुद्दा, युवाओं का दर्द और सुधार के रास्ते
संवाद के दौरान राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं के आंदोलनों पर भी तीखी चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि जब सालों की मेहनत के बाद पेपर लीक हो जाता है या परीक्षा रद्द होती है, तो तैयारी करने वाले GenZ युवाओं और उनके परिवारों पर इसका बहुत गहरा मानसिक और आर्थिक असर पड़ता है.
कांग्रेस पार्षद सुमन भाटी ने सिस्टम और अधिकारियों की साठगांठ पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जो ऊपर बैठे लोग पैसे लेकर पेपर बेचते हैं, उनकी वजह से मेहनती बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता है. ऐसे मामलों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि बच्चों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन न करना पड़े. वहीं बीजेपी पार्षद नेहा जोशी ने कहा कि पहले की व्यवस्था में बार-बार पेपर लीक होने से युवाओं का भरोसा टूटा था, लेकिन अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बना रही है. नेहा ने कहा कि सरकारी नौकरियों के अलावा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए राइजिंग राजस्थान और स्किल डेवलपमेंट जैसी योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं.
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और भविष्य का विजन
चर्चा के अंतिम चरण में राजनीति में महिलाओं के नेतृत्व पर बात हुई. सुमन भाटी ने कहा कि जैसे एक महिला अपना घर बहुत बारीकी से संभालती है, वैसे ही वह बाहर निकलकर राजनीति और समाज का काम भी उतनी ही हिम्मत से संभाल सकती है. जब उनसे रोल मॉडल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने परिवार और पति के सहयोग को सराहा. वहीं नेहा जोशी ने कहा कि उनके लिए राजनीति करियर का विकल्प नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है. उन्होंने अपने परिवार के खुले विचारों और स्वतंत्रता देने के फैसले को अपनी सफलता की रीढ़ बताया. दोनों नेताओं की इस बातचीत ने यह साफ कर दिया कि राजस्थान में GenZ की राजनीति केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीनी बदलाव की एक नई शुरुआत है.