ब्लड बैंक में अचानक खौलने लगा खून, -30 से 110 डिग्री पहुंचा तापमान, लोग सन्न
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Blood Started Boiling in Blood Banks: किसी ब्लड बैंक में खून को सुरक्षित रखने के लिए इसे माइनस से कई डिग्री नीचे तापमान पर रखा जाता है. अगर यहां अचानक तापमान बढ़ता जाए और बोतलों में रखा खून खौलने लगे, तो कल्पना कीजिए क्या स्थिति पैदा होगी? कुछ ऐसा ही हुआ फ्रांस में, जब ब्लड बैंक का खून खौलने से हड़कंप मच गया.
फ्रीजिंग टेम्परेचर में कैसे खौलने लगा खून? (सांकेतिक तस्वीर-रॉयटर्स)
Blood Started Boiling in Blood Banks: सोचिए अगर किसी ब्लड बैंक में रखे खून और प्लाज्मा का तापमान अचानक इतना बढ़ जाए कि वे इस्तेमाल के लायक ही न रहें, तो कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है. फ्रांस में कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की गई. साइबर अपराधियों ने देश के तीन ब्लड बैंक सेंटर के कूलिंग सिस्टम को निशाना बनाया और उनका तापमान बेहद ऊंचे स्तर तक बढ़ाने की कोशिश की. हालांकि समय रहते हमले का पता चल गया और हजारों लोगों की जिंदगी बचाने वाले ब्लड प्रोडक्ट्स सुरक्षित रहे.
फ्रांस के ब्लड बैंक संगठन ‘फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट’ के मुताबिक 2 नवंबर को तीन सेंटरों में लगे प्लाज्मा स्टोरेज सिस्टम की तापमान और डीफ्रॉस्टिंग सेटिंग से छेड़छाड़ की गई. पहले तो कुछ समझ ही नहीं आया क्योंकि इतने सारे सैंपल अचानक गर्म होते जा रहे थे, फिर निगरानी सिस्टम ने गड़बड़ी पकड़ ली. गनीमत रही कि कर्मचारियों ने तेजी से कार्रवाई की और प्लाज्मा को सुरक्षित कर लिया वरना मरीजों की सेहत खतरे में पड़ जाती.
-30 से 110 डिग्री तक तापमान बढ़ाने की कोशिश
फ्रांस के अखबार ‘ले कैनार एंशेने’ की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड स्टोरेज का सामान्य तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस रहता है. हैकर्स इसे बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस तक ले जाना चाहते थे. इन सेंटरों में रखा प्लाज्मा मरीजों को चढ़ाने के साथ-साथ कई जरूरी दवाइयां बनाने में भी इस्तेमाल होता है. हमले में कूलिंग उपकरण सप्लाई करने वाली कंपनी Coolworld के एक थर्ड-पार्टी सप्लायर से जुड़ी सुरक्षा खामी का इस्तेमाल किया गया. कंपनी ने कहा है कि कुछ ही उपकरण प्रभावित हुए हैं और समस्या को ठीक करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
ब्लड बैंक में अचानक बढ़ने लगा तापमान. (इमेज- फाइल फोटो)
सुपरमार्केट के बाद अब ब्लड बैंक निशाने पर
यह हमला इसलिए भी चिंता बढ़ाता है, क्योंकि इससे पहले अक्टूबर में फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड के सैकड़ों सुपरमार्केट और दुकानों के फ्रिज-फ्रीजर को भी साइबर हमले का निशाना बनाया गया था. उनके तापमान बढ़ने से बड़ी मात्रा में खाने-पीने का सामान खराब हो गया था. डच सुपरमार्केट कंपनी अहोल्ड डेल्हेज ने अनुमान लगाया कि इस हमले से उसे चौथी तिमाही में 250 मिलियन यूरो यानी करीब 281 मिलियन डॉलर तक की बिक्री का नुकसान हो सकता है. कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम भी 100 मिलियन यूरो से ज्यादा घटने की आशंका है.
जांच में जुटीं फ्रांस की एजेंसियां
फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी और स्वास्थ्य मंत्रालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है. फिलहाल हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी जानकारी नहीं मिली है. ब्लड बैंक पर हुआ यह हमला एक गंभीर चेतावनी है. अब साइबर अपराधियों का निशाना सिर्फ कंप्यूटर और वेबसाइट नहीं, बल्कि ऐसे सिस्टम भी हैं जिन पर अस्पतालों, मरीजों और आम लोगों की जिंदगी निर्भर करती है.