Agri: देसी और हाइब्रिड टमाटर में क्या है फर्क? सरगुजा के किसान महेश ने बताया स्वाद और छिलके का अंतर

Agri: देसी और हाइब्रिड टमाटर में क्या है फर्क? सरगुजा के किसान महेश ने बताया स्वाद और छिलके का अंतर


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हाइब्रिड नहीं, देसी पर भरोसा, सरगुजा के लगभग सभी किसान लगा रहे देसी टमाटर

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Agri: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कर्माहा गांव में किसान 50 से 100 एकड़ में देसी टमाटर की खेती कर रहे हैं. आकार में छोटा यह टमाटर अपनी मिठास और खास स्वाद के लिए मशहूर है. बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इसकी खेती की जा रही है. नवंबर के दूसरे सप्ताह से इसकी कटाई शुरू होने की उम्मीद है. इससे चटनी, सब्जी और टमाटर का चोखा बनाया जाता है.

Desi Tomato Farming: आमतौर पर छोटे आकर का टमाटर जिसको देसी टमाटर के नाम से लोग जानते हैं. दरअसल, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कर्माहा में लगभग सभी किसान अपने खेत मे देसी टमाटर लगाए हैं. लेकिन कुछ ही किसान हैं, जो देसी टमाटर के बारे में बारीकी से जानते हैं. वैसे देसी टमाटर दिखने में भले ही छोटा है, लेकिन स्वाद और मिठास कि खुशबू इतना तेज है कि दूर से लोग खींचे चले आते हैं. हाइब्रिड के बढ़ते चलन के बीच जिस तरह से किसान 50 से 100 एकड़ में देसी टमाटर का खेती कर रहे है. यही वजह है कि ये खास किस्म का टमाटर अब किसानों के खेत में पकने की कगार पर खड़ा है और नवंबर के दूसरे सप्ताह तक हार्वेस्टिंग भी शुरू हो जाएगा. देखिए ये रिपोर्ट कैसे करें खेती. जानिए चोखा बनाने से लेकर चटनी और सब्जी तक पूरी रिपोर्ट…

छोटा आकार, लेकिन मिठास और स्वाद में खास है देसी टमाटर
देसी टमाटर की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वाद और मिठास है. युवा किसान महेश ने लोकल 18 को बताया कि बाजार में मिलने वाले बड़े आकार के टमाटर की तुलना में देसी टमाटर आकार में छोटा होता है, लेकिन इसके स्वाद में अलग मिठास देखने को मिलती है. किसान के मुताबिक, इसकी खेती बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के होती है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के बीच इसकी अच्छी मांग रहती है और लोग इसे काफी पसंद करते हैं.

पहले तैयार की जाती है पौध, फिर मेड़ पर होती है रोपाई
देसी टमाटर की खेती की प्रक्रिया के बारे में किसान महेश ने बताया कि सबसे पहले समतल जमीन पर इसके बीजों की बुवाई की जाती है. इसके बाद लगभग 15 से 20 दिनों तक पौध तैयार होने का इंतजार किया जाता है, जब पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैंं. तब खेत में मेड़ बनाई जाती है और उन मेड़ों के ऊपर टमाटर के पौधों की रोपाई की जाती है. इस तरह किसान इसकी फसल तैयार करते हैं.

सब्जी से लेकर चोखा और चटनी तक में होता है इस्तेमाल
देसी टमाटर सिर्फ सब्जी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण रसोई में इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है. इससे स्वादिष्ट चटनी तैयार की जाती है, वहीं देसी अंदाज में टमाटर का चोखा बनाकर भी लोग बड़े चाव से खाते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसका पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है यही कारण है कि बाजार में देसी टमाटर की अपनी अलग पहचान बनी हुई है.

हाइब्रिड से अलग है देसी टमाटर का स्वाद
युवा किसान महेश के मुताबिक, देसी और हाइब्रिड टमाटर के स्वाद में काफी अंतर होता है. देसी टमाटर में खटास और मिठास का अपना अलग स्वाद मिलता है, जबकि हाइब्रिड टमाटर का छिलका अपेक्षाकृत मोटा होता है और उसमें मिठास कम महसूस होती है. वहीं, देसी टमाटर अपने खास स्वाद की वजह से लोगों की पसंद बना हुआ है.

लगभग 50 से 100 एकड़ में किसान कर रहे देसी टमाटर की खेती
देसी टमाटर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में लगभग 50 से 100 एकड़ जमीन पर इसकी खेती की जा रही है. युवा किसान महेश ने बताया कि इलाके के लगभग सभी किसान देसी टमाटर की खेती कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर इसकी मांग और पारंपरिक स्वाद को देखते हुए किसान भी इसकी खेती में रुचि ले रहे हैं. हाइब्रिड सब्जियों के बढ़ते चलन के बीच देसी टमाटर आज भी अपने पारंपरिक स्वाद, मिठास और ग्रामीण रसोई में खास जगह बनाए हुए है. यही वजह है कि किसान इसकी खेती कर रहे हैं और लोगों की थाली में देसी स्वाद एक बार फिर अपनी पहचान बना रहा है.



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