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Barabanki Health Department: बाराबंकी के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. एक तरफ जहां लगभग 62 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, तो दूसरी ओर 4 डॉक्टरों ने इस्तीफा भी दे दिया है. बताया जा रहा है 31 डॉक्टर और 30 आशा वर्कर और एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को बिन बताए छुट्टी पर रहने को लेकर नोटिस जारी की गई थी. अब विभाग ने उनको सेवा से मुक्त कर दिया है.
बाराबांकी में 31 डॉक्टर और 30 आशा वर्करों की जाएगी नौकरी. (AI से बनाई गई इमेज)
बाराबंकी: बाराबंकी में स्वास्थ्य विभाग हड़कंप मचा हुआ है. एक साथ कम से कम 61 स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी जाने वाली है. दरअसल, सरकारी नौकरी की मौज काटने वाले कर्मचारियों को विभाग ने सीधा बर्खास्त कर दिया है. बताया जा रहा है कि बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब रहने वाले 31 डॉक्टरों, 30 आशा कार्यकर्ताओं और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके अलावा चार डॉक्टरों ने इस्तीफा भी दे दिया है.
बीते अप्रैल से लेकर सितंबर महीने तक जिले के 13 ब्लॉकों में 30 आशा कार्यकर्ता ऐसी पाई गईं जो पूरी तरह से कार्य से गायब रहीं. विभाग द्वारा इन सभी चिन्हित लापरवाह कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर अपने कार्य में सुधार लाने का एक अंतिम मौका दिया गया था. लेकिन किसी ने भी न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही दोबारा काम शुरू किया. इनमें श्री कृष्णनपुरवा की ज्योति, कमियार की रामादेवी, बड़ेल की सुशीला वर्मा, मीरापुर की सीमा यादव, सनावां की आरती सिंह, बाबागंज की प्रीती, जरुवा की आशा शर्मा, लंगोहटा की मंजू मिश्रा सहित 30 आशाएं शामिल हैं. अब इनकी सेवा समाप्ति के लिए शासन को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है.
31 डॉक्टरों की नौकरी पर भी तलवार
सिर्फ आशा कार्यकर्ताओं ही नहीं, बल्कि जिले में अलग-अलग वर्षों में ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद बिना किसी सूचना के फरार चल रहे 31 डॉक्टरों पर भी गाज गिरने वाली है. विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये डॉक्टर बिना बताए ड्यूटी से गायब हैं और कोई अपनी आगे की उच्च शिक्षा (पढ़ाई) पूरी कर रहा है तो कोई चुपचाप अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त है. विभाग की ओर से बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद इनमें से किसी भी डॉक्टर ने अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया. इनमें डॉ. अमित कुमार मिश्रा, डॉ. रुपाली गुप्ता और डॉ. अनिल उपाध्याय समेत कुल 31 चिकित्सक शामिल हैं. इन सभी की सेवाएं समाप्त करने के लिए शासन को संस्तुति भेज दी गई है.
चार डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
इस बीच बाराबंकी जिले में तैनात रहे चार अन्य डॉक्टरों ने भी सरकारी सेवा से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस्तीफा देने वाले इन चिकित्सकों में डॉ. गौरी विश्वास, डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. वीपी मौर्य और डॉ. अरुण कुमार यादव के नाम शामिल हैं. हालांकि, शासन स्तर से अभी तक उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया गया है. इसके अलावा, देवा सीएचसी पर तैनात सफाई कर्मचारी राजेश कुमार द्वारा लगातार ड्यूटी से गायब रहने और देवा मेले में ड्यूटी करने से साफ इनकार करने पर उसका सात दिन का वेतन रोक दिया गया था, जिसके बाद उसकी पत्नी ने सीएचसी पहुंचकर तीखा हंगामा किया और स्टाफ के साथ गाली-गलौज की, जिस पर अधीक्षक ने सीएमओ को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
जल्द पूरी होगी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया
बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रंजन गौतम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में तैनात जो चिकित्सक और आशा कार्यकर्ता लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं और अपनी सेवाएं नहीं दे रहे हैं, उन्हें विभाग द्वारा लगातार चेताया गया था. लेकिन नोटिस का कोई भी जवाब न मिलने के कारण अब उनके खिलाफ सेवा समाप्ति की सख्त प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है.