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Emu Farming: छत्तीसगढ़ के बालोद में किसान अब ऑस्ट्रेलिया मूल के इमू पक्षी का पालन कर रहे हैं. पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मिश्रा के मुताबिक, इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है. एक इमू से 20-30 हजार रुपये तक की बिक्री संभव है. इसका मांस 800 रुपये किलो तक बिकता है. सालभर में करीब 20 अंडे मिलते हैं, जिनका वजन 500 ग्राम तक होता है.
Emu Farming: खेती-किसानी के साथ अब किसान वैकल्पिक पशुपालन की ओर भी रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया मूल का विशालकाय पक्षी इमू छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कमाई का एक नया विकल्प बनकर उभर रहा है. कम जगह, अपेक्षाकृत बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और मांस से लेकर अंडे व तेल तक के व्यावसायिक उपयोग के कारण इमू पालन में अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं. बालोद जिले में भी किसान इसका पालन कर रहे हैं.
पशु चिकित्सा विभाग बालोद के वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. अभिषेक मिश्रा के मुताबिक, इमू पालन वैकल्पिक पशुपालन के तौर पर फायदे का सौदा साबित हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता है, जो सामान्य मुर्गियों की तुलना में अधिक मानी जाती है. इमू खेतों में घूमते हुए कीड़े-मकोड़े खा लेता है. इसके अलावा जरूरत के अनुसार अतिरिक्त दाना देकर इसके भोजन की पूर्ति की जा सकती है. इसके पालन के लिए बहुत बड़े क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि घूमने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह होना जरूरी है.
इमू पालन दूसरे पक्षियों से अलग
इमू पालन का सबसे बड़ा व्यावसायिक माध्यम इसका मांस है. एक इमू से वजन के हिसाब से करीब 20 से 30 हजार रुपये तक की बिक्री हो सकती है. छत्तीसगढ़ में इमू के मांस की कीमत करीब 800 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है. इसका मांस रेड मीट की श्रेणी में आता है और दूसरे पक्षियों के मांस से अलग होता है. प्रदेश में इसका उत्पादन अभी कम होने के कारण बाजार में इसके लिए संभावनाएं बनी हुई हैं.
इमू की खासियत क्या है
इमू का एक अंडा करीब 500 ग्राम वजन का होता है. एक इमू सालभर में लगभग 20 अंडे देता है. इन अंडों की भी बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है. इसके अलावा इमू के शरीर से निकलने वाले तेल का उपयोग विभिन्न उत्पादों और औषधीय उपयोगों में किया जाता है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द से संबंधित उत्पादों में भी किया जाता है. इस तरह इमू पालन केवल मांस तक सीमित नहीं है, बल्कि अंडे और तेल के जरिए भी कमाई के अवसर उपलब्ध कराता है.
ऑस्ट्रेलिया मूल का यह पक्षी अब छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भी पाला जा रहा है. जिले के किसान सन्नी जायसवाल इमू पालन कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जलवायु इसके पालन के लिए अनुकूल हो सकती है. हालांकि मांस के अलावा अंडे और तेल जैसे उत्पादों से कमाई करने के लिए प्रोसेसिंग और बाजार की व्यवस्था जरूरी है. ऐसे में सही प्रबंधन, बाजार की उपलब्धता और खरीदारों की मांग को ध्यान में रखकर इमू पालन किसानों के लिए वैकल्पिक आय का एक नया रास्ता बन सकता है.