‘भरोसेमंद सप्लाई चेन के बिना नहीं चलेगा काम’, कॉमनवेल्थ देशों के सामने विदेश मंत्री जयशंकर ने रखे 9 मंत्र


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‘सप्लाई चेन भरोसेमंद होना जरूरी’, कॉमनवेल्थ देशों के सामने जयशंकर के 9 मंत्र

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ देशों को साफ संदेश दिया है कि भरोसेमंद सप्लाई चेन के बिना आने वाले वक्त में कारोबार आगे नहीं बढ़ पाएगा. एंटीगुआ और बारबुडा में CHOGM 2026 के दौरान उन्होंने कॉमनवेल्थ प्रमुखों और कारोबारी नेताओं की बैठक को संबोधित किया. जयशंकर ने जोखिम कम करने और व्यापार के नए रास्ते खोलने के साथ सहयोग बढ़ाने के नौ मंत्र दिए. इनमें कनेक्टिविटी कॉरिडोर, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक और जलवायु कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं. उन्होंने दुनिया में फैले भारतीय कारोबारी समुदाय को कॉमनवेल्थ की बड़ी ताकत बताया. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी उनकी मुलाकात हुई.

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CHOGM 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ देशों से भरोसेमंद सप्लाई चेन और कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने की अपील की. (फोटो X/@DrSJaishankar)

दुनिया में कारोबार का तरीका तेजी से बदल रहा है. कभी जिन देशों के बीच व्यापार आसानी से चलता था वहां अब सप्लाई चेन को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. ऐसे में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ देशों को साफ संदेश दिया है कि आने वाले वक्त में कारोबार को मजबूत बनाने के लिए भरोसेमंद सप्लाई चेन जरूरी होगी. इसके लिए देशों को अपने आर्थिक रिश्तों में जोखिम कम करना होगा और व्यापार के नए रास्ते तलाशने होंगे. जयशंकर ने कॉमनवेल्थ प्रमुखों और कारोबारी नेताओं की बैठक में भारत का नजरिया रखा. उन्होंने कहा कि छोटे और भरोसेमंद सप्लाई रूट कारोबार को ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं. साथ ही कनेक्टिविटी कॉरिडोर बढ़ाने से व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी. उन्होंने इस बैठक में सहयोग बढ़ाने के लिए नौ अहम मंत्र भी सामने रखे.

जयशंकर ने केवल व्यापार और सप्लाई चेन की बात नहीं की. उन्होंने कौशल विकास से लेकर डिजिटल तकनीक और जलवायु कार्रवाई तक कई ऐसे मुद्दे उठाए जिन पर कॉमनवेल्थ देश मिलकर काम कर सकते हैं. उनका जोर इस बात पर रहा कि साझेदारी सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसका फायदा जमीन पर कारोबार करने वाले लोगों और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले भारतीय कारोबारी समुदाय को कॉमनवेल्थ की बड़ी ताकत बताया. जयशंकर ने आपदा के समय भारत के राहत और बचाव अभियानों का अनुभव साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर मदद के केंद्र बनाने की जरूरत भी बताई. इससे साफ है कि भारत आर्थिक सहयोग के साथ तकनीक और मानवीय सहायता को भी साझेदारी का अहम हिस्सा बनाना चाहता है.



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