पहले फिल्म के लिए लिखी, फिर थिएटर में रचा कमाल, सौरभ शुक्ला ने खोले ‘बर्फ’ से जुड़े राज

पहले फिल्म के लिए लिखी, फिर थिएटर में रचा कमाल, सौरभ शुक्ला ने खोले ‘बर्फ’ से जुड़े राज


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फिल्मों में अपनी शानदार अदाकारी से पहचान बनाने वाले सौरभ शुक्ला इन दिनों अपने चर्चित नाटक ‘बर्फ’ को लेकर सुर्खियों में हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस कहानी को करीब 10 साल पहले फिल्म के लिए लिखा था, लेकिन बाद में इसे थिएटर के मंच पर उतारने का फैसला किया. हालांकि, फिल्म जैसी विजुअल अपील को थिएटर में दिखाना उनके लिए आसान नहीं था. अब सौरभ ने बताया है कि कैसे यही चुनौती उनके नाटक की सबसे बड़ी खासियत बन गई.

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एक्टर ने बयां किए राज

नई दिल्ली. बॉलीवुड और थिएटर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता सौरभ शुक्ला एक बार फिर अपने चर्चित नाटक ‘बर्फ’ को लेकर चर्चा में हैं. यह नाटक दर्शकों को रहस्य, रोमांच और कई अनसुलझे सवालों से भरी एक अलग दुनिया में ले जाता है. खास बात यह है कि सौरभ शुक्ला ने इस कहानी को पहले फिल्म के लिए लिखा था, लेकिन बाद में इसे थिएटर के मंच पर उतारने का फैसला किया. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती फिल्म की कहानी को बिना बड़े पर्दे वाले विजुअल्स के थिएटर में उतारना था. अब सौरभ ने बताया है कि कैसे यही चुनौती इस नाटक की सबसे बड़ी खासियत बन गई.

कश्मीर की बर्फीली वादियों में बुनी गई इस कहानी का केंद्र डॉ. कौल हैं, जिनका किरदार खुद सौरभ शुक्ला निभा रहे हैं. कहानी में वह एक रहस्यमयी गांव पहुंचते हैं, जहां एक रात के दौरान कई ऐसे राज सामने आते हैं, जो दर्शकों को हैरान कर देते हैं. नाटक के मंच को भी कश्मीर की बर्फ से ढकी घाटी जैसा रूप दिया गया है. कहानी में जैसे-जैसे सस्पेंस बढ़ता है, मंच पर बर्फबारी का ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि दर्शकों को असली घाटी में होने का एहसास होता है.

10 साल पहले लिखी थी कहानी

सौरभ शुक्ला के मुताबिक, ‘बर्फ’ सिर्फ रहस्य और रोमांच से भरी कहानी नहीं है, बल्कि इसमें जिंदगी से जुड़े कई गंभीर सवाल भी उठाए गए हैं. उन्होंने बताया कि इस कहानी का विचार लंबे समय तक उनके दिमाग में रहा. करीब सात साल तक इस कहानी के साथ रहने के बाद उन्होंने इसे लिखना शुरू किया था. लगभग 10 साल पहले लिखे गए इस नाटक का अब तक दुनियाभर में सैकड़ों बार मंचन हो चुका है. सौरभ ने कहा कि यह नाटक उनके लिए बेहद खास है. इतने सालों बाद भी उन्हें इसकी कहानी में कुछ नया नजर आता है. यही वजह है कि हर बार मंचन के दौरान वह और उनकी टीम इसमें कुछ नया तलाशने की कोशिश करते हैं. उनके लिए यह किसी लगातार चलने वाली यात्रा से कम नहीं है.

सुनील पालवाल और आंचल चौहान भी आएंगे नजर

‘बर्फ’ में सौरभ शुक्ला के अलावा सुनील पालवाल और आंचल चौहान भी अहम किरदार निभा रहे हैं. सुनील पालवाल एफटीआईआई पुणे से पढ़ाई कर चुके हैं. उन्हें संगीत नाटक अकादमी की ओर से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. वह टीवी सीरीज ’24’, फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ और थिएटर प्रोडक्शन ‘मुगल-ए-आजम’ में प्रिंस सलीम की भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं. वहीं, आंचल चौहान ‘कबीर सिंह’, नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘बृज मोहन अमर रहे’ और अमेजन प्राइम की सीरीज ‘द पिक-अप आर्टिस्ट’ में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा वह ‘देवदास- द म्यूजिकल’ में पारो का किरदार भी निभा चुकी हैं.

फिल्म की कहानी को थिएटर में बदलना आसान नहीं था

सौरभ शुक्ला ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में ‘बर्फ’ की कहानी को फिल्म बनाने के इरादे से लिखा था. आज भी उनके पास इस कहानी की फिल्म वाली स्क्रिप्ट मौजूद है और वह भविष्य में इस पर फिल्म बनाना चाहते हैं. हालांकि, जब इसे थिएटर में पेश करने की बात आई तो सबसे बड़ी परेशानी इसके विजुअल्स को लेकर थी.उन्होंने बताया कि फिल्मों में कहानी को दिखाने के लिए कैमरे और विजुअल्स की मदद ली जाती है, लेकिन थिएटर में सीमित मंच पर उसी तरह का अनुभव तैयार करना आसान नहीं होता. टीम के सामने चुनौती थी कि फिल्म जैसी विजुअल अपील को स्टेज पर कैसे दिखाया जाए. सौरभ के मुताबिक, इसी कोशिश ने ‘बर्फ’ को दूसरे नाटकों से अलग बना दिया.

बता दें कि उन्होंने यह भी कहा कि नाटक की मूल कहानी आज भी वैसी ही है, लेकिन हर बार मंचन के दौरान कुछ नया सीखने और खोजने का मौका मिलता है. यही वजह है कि इतने साल बीतने के बाद भी इसकी कहानी पुरानी नहीं लगती. बता दें कि एजीपी वर्ल्ड के साथ सौरभ शुक्ला का यह दूसरा बड़ा थिएटर प्रोजेक्ट है. इससे पहले दोनों ने कॉमेडी नाटक ‘2 टू टैंगो 3 टू जाइव’ में साथ काम किया था. इस नाटक के भी 100 से ज्यादा शो हो चुके हैं. अब ‘बर्फ’ का मंचन 29 नवंबर 2026 को पुणे के जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल हॉल में किया जाएगा.



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