जंतर-मंतर रोड पर अब नारे नहीं हॉर्न सुनाई देंगे, 20 साल बाद खुला ट्रैफिक, बैरिकेडिंग भी हटे


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जंतर-मंतर रोड पर अब नारे नहीं, हॉर्न सुनाई देंगे; 20 साल बाद खुला ट्रैफिक

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दिल्ली के जंतर-मंतर रोड पर अब नारे नहीं बल्कि गाड़ियों के हॉर्न सुनाई देंगे. करीब 20 साल बाद इस सड़क पर आम ट्रैफिक बहाल कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस ने यहां लगी भारी बैरिकेडिंग हटा दी है. अब अशोक रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग तक वाहन आसानी से आ-जा सकेंगे. कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया प्रदर्शन के बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया था. अब सुरक्षा समीक्षा के बाद रास्ता खोलने का फैसला लिया गया है. जानिए क्यों बंद थी यह सड़क और अन्ना आंदोलन से निर्भया प्रदर्शन तक इसका क्या इतिहास रहा है.

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जंतर-मंतर रोड पर अब नारे नहीं, हॉर्न सुनाई देंगे; 20 साल बाद खुला ट्रैफिकZoom

दिल्ली के जंतर-मंतर रोड पर करीब 20 साल बाद ट्रैफिक बहाल. (फोटो PTI)

जंतर-मंतर और आसपास की सड़कों पर अक्सर प्रदर्शनकारियों के नारे सुनाई देते हैं. लेकिन अब जंतर-मंतर रोड पर एक बार फिर गाड़ियों के हॉर्न सुनाई देंगे. करीब 20 साल बाद इस सड़क पर आम ट्रैफिक की आवाजाही बहाल कर दी गई है. दिल्ली पुलिस ने यहां सालों से लगी भारी बैरिकेडिंग हटा दी है. अब अशोक रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को लंबा और घुमावदार रास्ता नहीं लेना पड़ेगा. जिस जगह पर कभी सरकार के खिलाफ नारे गूंजते थे और लोग अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठते थे वहां अब गाड़ियां सामान्य रूप से गुजर सकेंगी. जंतर-मंतर की पहचान देश के बड़े विरोध प्रदर्शन स्थलों में रही है. ऐसे में सड़क का खुलना सिर्फ ट्रैफिक से जुड़ा फैसला नहीं है. यह उस जगह की बदलती भूमिका की ओर भी इशारा करता है.

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार दरअसल जंतर-मंतर पर लंबे समय से सुरक्षा के कारण आवाजाही सीमित थी. यहां प्रदर्शन के दौरान भीड़ जुटने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने सड़क पर स्थायी और अस्थायी बैरिकेड्स लगा रखे थे. हाल में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से डी-नोटिफाई कर दिया था. इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन बैरिकेडिंग जारी रखी. अब राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा से जुड़े हालात की समीक्षा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने रास्ता खोलने का फैसला लिया है. इसके साथ ही करीब दो दशक से चली आ रही पाबंदी खत्म हो गई है.

जंतर-मंतर की सड़क खुलने के बाद अब यहां से गुजरने वाले लोगों को रोजमर्रा के ट्रैफिक में राहत मिलेगी. (फोटो PTI)

अशोक रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग तक जाना हुआ आसान

बैरिकेडिंग हटने के बाद अशोक रोड को टॉल्स्टॉय मार्ग से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर सामान्य ट्रैफिक शुरू हो गया है. इससे रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को राहत मिलेगी. अब वाहन चालकों को जंतर-मंतर के आसपास लगे बैरिकेड्स के कारण रास्ता बदलने की जरूरत नहीं होगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है. अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात में सड़क पर सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है. हालांकि राजधानी में किसी भी बड़े प्रदर्शन या सुरक्षा इनपुट के आधार पर व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है.

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद बदली व्यवस्था

जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद यह फैसला चर्चा में आया. इसके बाद भी इलाके में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती जा रही थी. भारी बैरिकेडिंग के कारण आम लोगों को परेशानी होती थी. अब सुरक्षा समीक्षा के बाद इन्हें हटाने का निर्णय लिया गया है.

अन्ना आंदोलन से निर्भया प्रदर्शन तक का गवाह रहा है जंतर-मंतर

  • जंतर-मंतर सिर्फ दिल्ली की एक सड़क या प्रदर्शन स्थल नहीं रहा है. करीब तीन दशक से यह देश के कई बड़े आंदोलनों की आवाज बना हुआ है. 1993 के बाद प्रदर्शनकारियों को संसद और सत्ता के गलियारों के करीब अपनी बात रखने के लिए जंतर-मंतर रोड पर जगह मिलने लगी. धीरे-धीरे यह धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बन गया.
  • 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन भी यहीं से शुरू हुआ था. बाद में यह आंदोलन रामलीला मैदान तक पहुंचा. इसके अगले साल यानी 2012 में दिल्ली के निर्भया कांड के बाद भी यहां बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. महिला सुरक्षा और दोषियों को सजा देने की मांग लेकर हजारों लोग और छात्र जंतर-मंतर पर जुटे थे.

अब प्रदर्शन स्थल से ज्यादा आम सड़क होगी पहचान?

जंतर-मंतर की सड़क खुलने के बाद अब यहां से गुजरने वाले लोगों को रोजमर्रा के ट्रैफिक में राहत मिलेगी. हालांकि इस फैसले के साथ एक सवाल भी जुड़ा है कि क्या जंतर-मंतर पर अब पहले की तरह विरोध प्रदर्शन हो सकेंगे? पुलिस ने इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से पहले ही हटा दिया है. ऐसे में सड़क पर ट्रैफिक बहाल होने के साथ इस जगह की भूमिका भी बदलती दिख रही है. फिलहाल करीब 20 साल बाद यहां बैरिकेडिंग हटने से वाहन चालकों को राहत जरूर मिली है.



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