चुनावों में हार से दुश्मन खुश, ईरान युद्ध पर ट्रंप और नेतन्याहू क्या करेंगे?

चुनावों में हार से दुश्मन खुश, ईरान युद्ध पर ट्रंप और नेतन्याहू क्या करेंगे?


होमदुनियाअमेरिका

चुनावों में हार से दुश्मन खुश, ईरान युद्ध पर ट्रंप और नेतन्याहू क्या करेंगे?

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अमेरिका और इजरायल के मध्यावधि चुनावों में ट्रंप और नेतन्याहू को झटका लगा है. महंगाई और ईरान युद्ध के बीच इन राजनीतिक परिणामों का असर दोनों देशों की रणनीतियों पर पड़ सकता है. इसके साथ ही ईरान के ख‍िलाफ युद्ध में भी इन नतीजों का असर पड़ेगा.

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डोनाल्ड ट्रंप- बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावों में हार के बाद ईरान युद्ध पर क्‍या होगा अगला कदम. (रॉयटर्स) पुरानी तस्वीर

अमेरिका और इजरायल में हुए हालिया मध्यावधि चुनावी नतीजों ने दोनों देशों की सत्ता पर काबिज नेताओं के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है. जहां अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को मिडटर्म चुनाव में करारी हार मिली है, वहीं इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत खो बैठा है. ऐसे में ईरान पर बम बरसाने वाले इन दोनों देशों की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर चर्चा शुरू हो गई है.

इस घटनाक्रम से दोनों देशों के नेताओं के भरोसे ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी-इजरायली युद्ध के भविष्य पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं. जैसा कि चुनाव नतीजों में हुआ है कि अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर कब्जा कर लिया है. ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिकी मतदाताओं ने यह ईरान युद्ध को लेकर नाराजगी का नमूना पेश किया है.

गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का यह संघर्ष लगभग आठ महीने से चल रहा है और इससे दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी जैसे ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं. खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए हैं. लोग महंगाई और जीवन-यापन के संकट से परेशान हैं. लोगों का मानना है कि शायद इसी वजह से रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है. ट्रंप अब भी कमांडर-इन-चीफ हैं और सैन्य अभियानों तथा विदेश नीति पर उनका अधिकार बना हुआ है लेकिन डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस उनकी नीतियों पर कड़ी नजर रखेगी.

ईरान युद्ध पर क्या पड़ेगा असर
हालांकि अब इन चुनाव नतीजों के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका में कांग्रेस सुनवाई, जांच, बजट और कानून बनाकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा सकती है. फिर भी कांग्रेस सीधे युद्ध बंद करने का आदेश नहीं दे सकती. वहीं इजरायल की बात करें तो यहां 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के नतीजे नेतन्याहू के लिए उलझे हुए हैं. उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को 120 सदस्यीय नेसेट में 61 सीटों का बहुमत नहीं मिला. विपक्षी गठबंधन, जिसका नेतृत्व गादी आइजनकोट कर रहे हैं, भी बहुमत हासिल नहीं कर सका. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने नतीजों को स्वीकार कर लिया है और अब पार्टियों से बातचीत शुरू की है कि नई सरकार कौन बना सकता है. फिलहाल नेतन्याहू फिलहाल कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं.

गठबंधन वार्ता का नतीजा ईरान नीति को प्रभावित कर सकता है.ईरान कूटनीति का रास्ता खुला रखे हुए है. दोहा में चल रही चर्चाओं में ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि वह दो दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य खोल सकता है और अमेरिका से शांति वार्ता फिर शुरू कर सकता है, बशर्ते अमेरिका उसकी शर्तें माने.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि कई स्तरों पर बातचीत जारी है और अमेरिका कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी कूटनीति की इच्छा जताई है.लेकिन ईरान ने चेतावनी भी दी है. सुप्रीम लीडर मोजेतबा खामेनेई ने कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल फिर हमला करते हैं तो ईरान बिना भौगोलिक सीमा के जवाब देगा. यानी अब फिर युद्ध बढ़ने की आशंका बनी हुई है. दोनों देशों में राजनीतिक बदलाव से वाशिंगटन और जेरूसलम में गणनाएं बदल गई हैं. इससे तेहरान के साथ समझौते का दबाव भी बढ़ सकता है. फिलहाल युद्ध जारी है और आगे क्या होता है, यह दोनों नेताओं की नई राजनीतिक मजबूरी और ईरान की रणनीति पर निर्भर करेगा.



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