छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर से 10 किलो कि दूरी पर स्थित गांव डिगमा जहां का एक किसान अशोक मिस्त्री पिछले चार सालों से गंदे फुल कि दो किस्मों का खेती 1 एकड़ में कर आत्मनिर्भर बन रहा है, दरअसल अशोक मिस्त्री ने 2022 में गेंदे फुल की खेती शुरू कि तब से लेकर आज तक कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल दर साल खेती से तज़ुर्बा मिलता गया.
इस बार दो किस्म नारंगी और पीला रंग का फुल लगाया है जो अभी वर्तमान समय में तोड़ई करने का समय हो गया है. चूकी दीपावली का सीजन है मार्केट में कई तरह कि चायनीज़ माला बिक रहा है लेकिन किसान ने दावा कि अगर आपको पूजा पाठ चढ़ावा में गेंदे कि फुल चढ़ाना चाहते है तो देशी गेंदे कि फुल खरीदे जिसे दिवाली के समय में शुभ माना गया है ऐसे में ड्रिप सिस्टम से खेती कर रहे हैं अशोक और खेती किसानी करके अपने बच्चे को कृषि विशेषज्ञ बनाना चाहते है देखिए ये रिपार्ट
2022 में शुरू किया गेंदे की खेती का सफर
डिगमा निवासी अशोक मिस्त्री ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने साल 2022 में गेंदे के फूलों की खेती शुरू की थी, शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी चुनौती अच्छे पौधों की उपलब्धता को लेकर थी, उन्हें जानकारी नहीं थी कि अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे कहां मिलेंगे इसके बाद उन्होंने जानकारी जुटाई और पौधे मंगाकर खेती की शुरुआत की, धीरे-धीरे खेती के तौर-तरीके समझे और आज करीब एक एकड़ में गेंदे के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं
एक एकड़ में लगाए 30 से 35 हजार पौधे, दो वैरायटी के फूल,,
अशोक मिस्त्री के खेत में गेंदे की दो किस्में देखने को मिलती हैं, इनमें नारंगी और पीले रंग के गेंदे शामिल हैं किसान के मुताबिक एक एकड़ जमीन में लगभग 30 से 35 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं, फिलहाल उनके खेत में फूलों की तोड़ाई का समय चल रहा है, फूल तोड़ने के बाद उन्हें बाजार में भेजा जाता है, जहां इनसे तैयार मालाओं की अच्छी मांग रहती है…
खाद से लेकर दवा और निराई-गुड़ाई तक करना पड़ता है काम
गेंदे की खेती में केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि समय-समय पर उनकी देखभाल भी जरूरी होती है. अशोक बताते हैं कि इसमें कंपोस्ट खाद, जरूरत के अनुसार कीटनाशक और फफूंदनाशक का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसके अलावा खेत में निराई-गुड़ाई और पौधों में मिट्टी चढ़ाने का काम भी करना होता है. उन्होंने कलम से तैयार पौधे लगाए हैं और सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं..
दिवाली में बढ़ जाती है गेंदे के फूलों की मांग
किसान के मुताबिक गेंदे के फूलों की मांग पूरे साल बनी रहती है, लेकिन दिवाली जैसे बड़े त्योहारों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. घरों, मंदिरों और दुकानों को सजाने के लिए लोग गेंदे के फूलों और मालाओं का इस्तेमाल करते हैं. सामान्य दिनों की तुलना में त्योहारों के समय फूलों के दाम भी बेहतर मिलते हैं. यही वजह है कि अशोक को दिवाली के दौरान अच्छी बिक्री और कमाई की उम्मीद रहती है…
चाइनीज माला से ज्यादा पसंद किए जा रहे देशी गेंदे के फूल
बाजार में चाइनीज और आर्टिफिशियल फूलों की मालाएं भी उपलब्ध हैं, लेकिन अशोक का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आज भी अधिकतर लोग असली गेंदे के फूलों से बनी मालाएं पसंद करते हैं. कुछ दुकानदार सजावट के लिए आर्टिफिशियल फूलों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पूजा-पाठ और पारंपरिक सजावट में असली गेंदे के फूलों की अपनी अलग पहचान है. इसी वजह से हाथों से तैयार की गई फूलों की मालाओं की मांग बनी हुई है
30 से 35 हजार रुपये की लागत, 50 से 60 हजार की कमाई का अनुमान
अशोक मिस्त्री के अनुसार एक एकड़ में गेंदे की खेती करने पर करीब 30 से 35 हजार रुपये तक की लागत आती है, वहीं बाजार में फूलों की कीमत और मौसम अनुकूल रहने पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक के फूल और मालाएं तैयार होने का अनुमान है, हालांकि वास्तविक कमाई बाजार के भाव और उत्पादन पर निर्भर करती है. उनका कहना है कि त्योहारों के समय अच्छी कीमत मिलने से किसानों को फायदा हो सकता है..
विहान समूह से जुड़कर खेती के लिए लेते हैं आर्थिक सहयोग
अशोक मिस्त्री विहान समूह से भी जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग लेते हैं और बाद में उसे वापस जमा करते हैं. खेती में आने वाली जरूरतों को पूरा करने में समूह से मिलने वाली यह सुविधा उनके लिए मददगार साबित होती है..
बच्चों को कृषि अधिकारी बनाना चाहते हैं अशोक
अशोक मिस्त्री खुद सातवीं-आठवीं तक पढ़ाई कर पाए, लेकिन अब उनकी इच्छा है कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर कृषि विभाग में अधिकारी बनें.उनका एक बच्चा फिलहाल एग्रीकल्चर की पढ़ाई में फर्स्ट ईयर में है. अशोक चाहते हैं कि उनके बच्चे कृषि विभाग में जाकर किसानों को उन्नत खेती, अच्छे बीज, खेत की जुताई और मिट्टी परीक्षण जैसी जरूरी जानकारियां दें, ताकि गांव के किसानों को खेती में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके..
हर साल एक ही खेत में नहीं करनी चाहिए गेंदे की खेती
अशोक मिस्त्री का कहना है कि गेंदे की खेती अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है, लेकिन किसानों को फसल चक्र का भी ध्यान रखना चाहिए एक ही जमीन पर हर साल लगातार गेंदे की खेती करने के बजाय अलग-अलग फसलें लगानी चाहिए अशोक खुद गेंदे के अलावा मक्का और साग-सब्जियों की खेती भी करते हैं इससे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ खेती में विविधता भी बनी रहती है…