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Bijnor News: कई बार ऐसी खबरें सामने आती हैं, जिन्हें सुनकर हैरानी होती है. अब बिजनौर से एक ऐसा ही मामला आया है. उल्लुओं के बच्चों को जिंदा रखने के लिए चिकन-मटन और चूहे खिलाए जा रहे थे. बावजूद इसके उल्लू के बच्चे आपस में लड़ पड़े और दो बच्चों की मौत हो गई.
दो उल्लू मरे. (एआई तस्वीर)
बिजनौर : यूपी के बिजनौर वन विभाग को जब 6 उल्लू के बच्चे मिले तो वो आवभगत में जुट गए. जिंदा रखने के लिए चिकन मटन से लेकर चूहे तक खिलाए गए. मगर कहते हैं कि जिसकी जितनी जिंदगी… दरअसल, उल्लू के बच्चे आपस में ही लड़ गए. लड़ाई में दो की मौत हो गई, जबकि दो को हल्की-फुल्की चोट आई है. हालांकि दो बच्चे पूरी तरह ठीक हैं.
कृष्ण बिहार कालोनी निवासी जगदीश के घर से वन विभाग की टीम 6 उल्लू के बच्चे रेस्क्यू कर अपने साथ लेकर आई थी. ब्रान प्रजाति के उल्लू के 6 बच्चों की रेंजर बिजनौर कार्यालय में पूरी तरह से देखभाल की जा रही थी. इन्हें जिंदा रखने के लिए टीम ने चिकन-मटन खिलाया. इतना ही नहीं देहरादून से 52 चूहे तक मंगाए गए.
रेंजर महेश गौतम ने बताया कि सोमवार रात उल्लू के बच्चे खाने को लेकर आपस में लड़ पड़े, जिसमें दो की मौत हो गई. जो बच्चे मरे वह साइज में छोटे थे और दो बच्चों के हल्की चोट है, बाकी के उल्लू के दो बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं. इन बच्चों की उम्र करीब ढाई महीने है. छह बच्चों में चार बच्चे नर और दो मादा हैं. उन्होंने बताया कि यह सभी उल्लू के बच्चे प्रतिदिन करीब एक किलो चिकन-मटन खा रहे हैं. रात में यह सक्रिय होते हैं और रात में ही खाते हैं.
उन्होंने कहा कि उल्लू मांसाहारी होते हैं और रात में शिकार कर खाना खाते हैं. बार्न आउल बेहद खास होता है. हार्ट के आकार के सफेद चेहरे से इनकी पहचान होती है. इनकी आंखें काली और गहरी होती हैं. वहीं, पंखों की बनावट ऐसी होती है कि यह रात के सन्नाटे में जब उड़ता है तो बिल्कुल भी आवाज नहीं होती. ये मांसाहारी होते हैं. बार्न उल्लू बस्तियों के आसपास, खंडहरों, कुओं और पुराने किलों में रहना पसंद करते हैं. ये अक्सर चूहे खाते हैं.