US Midterm Elections: ट्रंप की हेल्थ पॉलिसी से नाराजगी या कुछ और… क्‍यों अमेरिकी चुनावों में उतरे 125 डॉक्टर-नर्स?

US Midterm Elections: ट्रंप की हेल्थ पॉलिसी से नाराजगी या कुछ और… क्‍यों अमेरिकी चुनावों में उतरे 125 डॉक्टर-नर्स?


अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव में करीब 125 डॉक्टर, नर्स और पब्लिक हेल्थ से जुड़े प्रोफेशनल्‍स उम्मीदवार बनकर मैदान में उतरे हैं. CNN की र‍िपोर्ट बतताी है कि अमेरिकी चुनावी राजनीति में हेल्‍थ सेक्‍टर से जुड़े लोगों की इतनी बड़ी भागीदारी पहले कभी नहीं देखी गई. पहले अक्‍सर हेल्‍थ से जुड़े लोग कम ही चुनावी मैदान में उतरते थे. अमेर‍िकी चुनावों में कॉरपोरेट और कानूनी पेशे से जुड़े लोग ज्‍यादा देखे जाते रहे हैं. पर इस बार का म‍िडटर्म अलग है. इन उम्मीदवारों में प्रमुख नाम डॉ. एमी एक्टन, डॉ. अब्दुल एल-सईद और अमेरिका के पूर्व स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री (HHS) जेवियर बेसेरा के हैं.

इन उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की शुरुआत कोविड-19 महामारी के बाद हुई. महामारी के शुरुआती दौर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों की खूब सराहना हुई. लेकिन कई सालों तक उन्हें लगातार काम के दबाव और लोगों की मौतों जैसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों को उनके बयानों और संदेशों को लेकर फैले अविश्वास और राजनीतिक विवादों के कारण निशाना भी बनाया गया.

सीएनएन की ये र‍िपोर्ट बताती है कि कुछ उम्मीदवारों का कहना है कि महामारी के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में उनकी पढ़ाई और अनुभव का सरकार और राजनीति से उतना ही गहरा संबंध है, जितना उन्होंने पहले कभी नहीं सोचा था. मिशिगन के वेन काउंटी के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अब्दुल एल-सईद रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मेडिकल क्षेत्र में काम करते हुए हम एक बात सीखते हैं कि दर्द से जूझ रहे व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें, उसके साथ वक्त बिताएं और अपने मेडिकल नॉलेज के आधार पर उसे समझाएं कि उसके सामने कौन-कौन से विकल्प हैं. मुझे लगता है कि राजनीति में भी कुछ ऐसा ही काम करना पड़ता है.’

मिशिगन के वेन काउंटी के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अब्दुल एल-सईद रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं. (Image Reuters)

रटगर्स यूनिवर्सिटी में ईगलटन सेंटर ऑन द अमेरिकन गवर्नर के डायरेक्टर और इतिहासकार डॉ. क्रिस्टोफर शील्ड्स ने CNN को बताया, ‘मैंने इससे पहले इस तरह की स्थिति कभी नहीं देखी. विज्ञान और राजनीति के बीच का रिश्ता हमेशा से कुछ कमजोर रहा है.”

अभी क्‍या है अमेरिकी कांग्रेस में डॉक्टर और हेल्‍थ वर्कर की संख्‍या?
अमेरिकी राजनीति में अभी भी स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की संख्या काफी कम है. अमेरिकी सीनेट में फिलहाल चार डॉक्टर हैं और ये सभी रिपब्लिकन पार्टी से हैं. इनमें व्योमिंग से जॉन बैरासो, लुइसियाना से बिल कैसिडी, कंसास से रोजर मार्शल और केंटकी से रैंड पॉल शामिल हैं. वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 17 डॉक्टर, चार डेंटिस्ट, दो फार्मासिस्ट, एक नर्स प्रैक्टिशनर, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट और एक रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट हैं.

क्‍यों चुनावी मैदान में उतरे इतने हेल्‍थ वर्कर
ट्रंप प्रशासन के विज्ञान और पब्‍ल‍िक हेल्‍थ को लेकर अपनाए गए रुख पर उठ रहे सवाल भी इस बढ़ी संख्‍या की वजह है. ट्रंप के शासनकाल में कई संघीय स्वास्थ्य विभागों के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को नौकरी से हटाया गया है. वहीं रिसर्च के लिए मिलने वाली फंडिंग में कटौती करना, सरकारी आंकड़ों और पब्लिक हेल्थ से जुड़ी वेबसाइटों को हटाना और पानी में फ्लोराइड मिलाने जैसी व्यवस्थाओं में बदलाव भी चिंता के बड़े मुद्दे रहे हैं. इतना ही नहीं, ट्रंप ने बचपन में लगने वाले टीकों यानी वैक्‍सिनेशन से जुड़ी नीतियों में भी बदलाव क‍िए हैं, जो हेल्‍थ वर्करों की चिंता का सबब बने.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और अमेरिकी सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) में काम कर चुकीं डॉ. क्रिस्टिन हुक ने CNN से कहा, “हमारा देश महान होना चाहिए. उसे विज्ञान और नए आविष्कारों का समर्थन करना चाहिए. विज्ञान हमें सुरक्षित रखता है, हमारी रक्षा करता है और कई शानदार खोजों का रास्ता खोलता है. लेकिन इस प्रशासन ने इन सबको पूरी तरह बर्बाद कर दिया है.” हुक ने 2024 में टेक्सास के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस साल वह एक बार फिर इसी सीट से चुनाव मैदान में हैं.

कैलिफोर्निया के गवर्नर पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के खिलाफ मैदान में उतरे जेवियर बेसेरा ने भी चेतावनी दी कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को कमजोर करने से अमेरिका प्राकृतिक आपदाओं और महामारी जैसी स्थितियों का सामना करने में कमजोर पड़ सकता है. उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) ऐसी जगह नहीं है, जहां विज्ञान को नकारने वाले या उस पर संदेह करने वाले लोगों को होना चाहिए. आप अपने सबसे अच्छे वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को क्यों हटाएंगे?’

कोविड-19 महामारी ने कैसे बदला राजनीति और हेल्‍थ का र‍िश्‍ता
कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सीधे राजनीति के केंद्र में ला दिया था. उस दौरान लॉकडाउन, वैक्सीन और संक्रमण से बचाव के दूसरे उपायों को लेकर फैसले लगातार चर्चा और बहस का विषय बने रहे. कई स्वास्थ्य अधिकारियों को धमकियों और ऑनलाइन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा. कुछ अधिकारियों ने अपनी नौकरियां छोड़ दीं. इन घटनाओं के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई पेशेवरों को लगा कि केवल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काम करने के बजाय उन्हें नीतियां बनाने की प्रक्रिया में भी सीधे हिस्सा लेना चाहिए. यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्वास्थ्य पेशेवर चुनावी राजनीति में उतरकर स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.



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