Public Opinion : ‘BEd-Bsc के बाद कर रहे 9 हजार की नौकरी…समय पर नहीं मिलता मानदेय’, मिर्जापुर के पंचायत सहायकों का छलका दर्द

Public Opinion : ‘BEd-Bsc के बाद कर रहे 9 हजार की नौकरी…समय पर नहीं मिलता मानदेय’, मिर्जापुर के पंचायत सहायकों का छलका दर्द


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Public Opinion Panchayat Sahayak Mirzapur : मिर्जापुर के पंचायत सहायक सड़कों पर हैं. उनका कहना है कि 8 से 10 घंटे तक काम कराया जाता है. कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलती. लोकल 18 से पंचायत सहायक विनोद कुमार बताते हैं कि हम लोगों को काम के हिसाब से बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है. चाहे क्रॉप कटिंग हो, कृषि विभाग से जुड़ा काम हो या स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा काम, हमसे सारे काम कराए जाते हैं. मानदेय बढ़ाकर छह हजार से नौ हजार किया गया है, लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हैं. पंचायत सहायकों का आरोप है कि मानदेय भी समय पर नहीं दिया जाता है.

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मिर्जापुर. कहते हैं कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की कड़ी पंचायत सहायक से होकर गुजरती है. हर पंचायत में मेरिट के आधार पर पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई है. इसमें बीएड से लेकर बीए और बीएससी करने वाले छात्र पंचायत सहायक बने. नौ हजार के मानदेय में काम करने वाले पंचायत सहायकों का अब गुजारा नहीं हो पा रहा है. पंचायत सहायकों का कहना है कि 8 से 10 घंटे तक काम कराया जाता है. उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधाओं का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है. मानदेय बढ़ाकर छह हजार से नौ हजार करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अभी भी मानदेय समय से नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने मानदेय बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग. मातृत्व अवकाश के साथ ही दूसरी सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जाए ताकि हमारी समस्या खत्म हो सके.

हर काम कराया जाता है

लोकल 18 से पंचायत सहायक विनोद कुमार बताते हैं कि हम लोगों को काम के हिसाब से बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है. पंचायत के साथ ही हम लोग लगभग हर विभाग का काम करते हैं. चाहे क्रॉप कटिंग हो, कृषि विभाग से जुड़ा काम हो या स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा काम. सभी काम कराए जाते हैं. मानदेय बढ़ाकर छह हजार से नौ हजार किया गया है, लेकिन हम लोग संतुष्ट नहीं हैं. मानदेय भी समय पर नहीं दिया जाता है. किसी योजना का लाभ भी हम लोगों को नहीं मिलता है. सरकार से मांग है कि हम लोगों का मानदेय 30 हजार किया जाए.

मेरिट पर हुई भर्ती

प्रतिभा कहती हैं कि हम लोगों ने बीएड और एमएससी की पढ़ाई करने के बाद पंचायत सहायक बने हुए हैं. मेरिट के आधार पर भर्ती हुई थी, जिसके बाद हम लोग काम करने के लिए आए. हम लोगों से पहले पंचायत का काम कराया जा रहा था, उसके बाद काम को बढ़ा दिया गया. कई विभागों का काम हम लोग करते हैं, बावजूद भी हम लोगों को उतना मानदेय नहीं मिलता है. छह हजार से मानदेय बढ़ाकर नौ हजार किया गया है. वह भी ग्राम निधि से दिया जाता है. हम लोगों की मांग है कि हम लोगों का मानदेय बढ़ाया जाए. मातृत्व अवकाश दिया जाए. सरकारी सुविधाओं लाभ दिया जाए.



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