Pakistan Fa’az Missile : भारत के ‘अस्त्र’ को चुनौती देगा पाकिस्तान का ‘फुस्स बम’, क्या है ‘फाज’ मिसाइल की इकलौती पावर?

Pakistan Fa’az Missile : भारत के ‘अस्त्र’ को चुनौती देगा पाकिस्तान का ‘फुस्स बम’, क्या है ‘फाज’ मिसाइल की इकलौती पावर?


दक्षिण एशिया के आसमान में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है. पाकिस्तान ने अपनी स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल ‘फाज़’ (Fa’az Missile) का सफल परीक्षण किया है. दावा है कि इसे बनाने में चीन की मदद नहीं ली गई है. पाकिस्तान इसे अपनी डिफेंस इंडस्ट्री के इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर बता रहा है. लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या पाकिस्तान की ये नई मिसाइल वाकई भारतीय वायुसेना के दबदबे को चुनौती दे सकती है, या फिर ये महज अपनी घरेलू जनता को खुश करने और हवा में तीर चलाने जैसा दांव है?

क्या है ‘फाज़’ मिसाइल और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

ये हवा से हवा में मार करने वाली एक लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसे पाकिस्तान की वायुसेना (PAF) के लड़ाकू विमानों से दागा जाएगा. पाकिस्तान का दावा है कि इस मिसाइल को उन्होंने अपनी ही जमीन पर, यानी पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया है. इस परीक्षण का सबसे बड़ा टारगेट दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन या अन्य हवाई खतरों को बहुत दूर से ही हवा में उड़ा देना है. पाकिस्तान का ये भी मानना है कि इस मिसाइल के बेड़े में शामिल होने से उसकी वायुसेना की दूर तक हमला करने की क्षमता में काफी सुधार होगा.

‘टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम’: वो इकलौती खूबी जिसका ढोल पीट रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयानों में जिस एक शब्द पर सबसे ज्यादा और बार-बार जोर दिया जा रहा है, वो है इसका ‘एडवांस टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम’.

जब कोई मिसाइल, फाइटर जेट जैसे टारगेट की तरफ बढ़ती है, तो उसका आखिरी का सफर यानी ‘टर्मिनल फेज’ सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आगे उड़ रहा दुश्मन का फाइटर जेट कोई एक जगह रुका हुआ टारगेट नहीं होता; वो बहुत तेज रफ्तार से अपनी दिशा बदल सकता है, चकमा दे सकता है या मिसाइल को भटकाने के लिए फ्लेयर्स और जैमर्स का इस्तेमाल कर सकता है.

ये टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम असल में मिसाइल की वो ‘आंख और दिमाग’ होती है जो आखिरी वक्त में भी दुश्मन के पल-पल बदलते पैंतरों पर नजर रखती है. ये स्टीयरिंग बदलकर मिसाइल को सीधे लक्ष्य से टकराने या उसके पास जाकर फटने में मदद करती है. पाकिस्तान का दावा है कि ‘फाज़’ मिसाइल में यही तकनीक दी गई है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

आत्मनिर्भरता का ढोल या मजबूरी का नाम ‘स्वदेशी’?

पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट इस बात की खूब वाहवाही लूट रहे हैं कि ‘फाज़’ एक ‘इंडीजीनस’ यानी पूरी तरह स्वदेशी मिसाइल है. इसके पीछे पाकिस्तान का मकसद बिल्कुल साफ दिखाई देता है:

  • विदेशी निर्भरता घटाना: पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिकी, चीनी और फ्रांसीसी हथियारों पर बुरी तरह निर्भर रहा है. विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करके खुद का डिफेंस बेस तैयार करना इस्लामाबाद का पुराना लक्ष्य रहा है.
  • आर्थिक तंगी और पाबंदियां: पाकिस्तान की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है. विदेशी देशों से बेहद महंगी और आधुनिक मिसाइलें खरीदना उसके लिए दिन-ब-दिन नामुमकिन होता जा रहा है. ऐसे में खुद की मिसाइल विकसित करना उसकी मजबूरी भी बन चुका है.

हालांकि, डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘स्वदेशी’ कहे जाने के बावजूद इस मिसाइल के पीछे चीन का गुप्त हाथ होने की पूरी संभावना है. पाकिस्तान के ज्यादातर मिसाइल प्रोग्राम चीनी मदद, तकनीकी ट्रांसफर और रिवर्स-इंजीनियरिंग के दम पर ही आगे बढ़ते हैं.

दावों में कितना दम? गायब हैं इसके असली आंकड़े!

पाकिस्तान ने ‘फाज़’ मिसाइल के परीक्षण का ढोल तो बहुत जोर-शोर से पीट दिया है, लेकिन उसने इसके असली और ठोस डेटा को पूरी तरह छुपा कर रखा है. पाकिस्तान की तरफ से इन बेहद अहम सवालों के कोई भी आधिकारिक जवाब नहीं दिए गए हैं.

  1. इसकी असली रेंज कितनी है? क्या ये 80 किलोमीटर तक मार करती है, 100 किलोमीटर तक या फिर 150 किलोमीटर तक?
  2. इसकी स्पीड कितनी है? क्या ये ध्वनि की गति से भी तेज उड़ सकती है?
  3. इसकी सटीकत और पेलोड क्षमता का पैमाना क्या है?

बिना किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय डेट के, किसी भी हथियार को अचानक से ‘गेम चेंजर’ मान लेना बहुत बड़ी जल्दबाजी होगी. युद्ध के मैदान में सिर्फ कागजी बयानबाजी काम नहीं आती, बल्कि मिसाइल का वास्तविक ट्रैक रिकॉर्ड मायने रखता है.

भारत के आगे ‘फुस्स बम’ है Faaz

भारत के पास पहले से ही दुनिया के सबसे घातक और युद्ध में परखे हुए हथियार मौजूद हैं. हमारी स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल सीरीज इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. भारत की ‘अस्त्र मार्क-1’ और ‘अस्त्र मार्क-2’ मिसाइलें 110 से 160 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक अचूक निशाना लगाकर दुश्मन के जेट्स को पलक झपकते ही तबाह करने में सक्षम हैं.

इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के पास सुखोई-30एमकेआई और अत्याधुनिक राफेल जैसे लड़ाकू विमान मौजूद हैं, जो ‘मीटियोर’ जैसी दुनिया की सबसे खतरनाक एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस हैं. इन पश्चिमी मिसाइलों की मारक क्षमता और आधुनिक टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की ये नई मिसाइल कहीं भी नहीं टिकती.

सिर्फ कागजी शेर या जमीनी खतरा?

पाकिस्तान का ये ‘फाज़’ एयर-टू-एयर मिसाइल टेस्ट निश्चित रूप से उसकी वायुसेना के लिए अपनी घरेलू साख बचाने और जनता के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की एक कोशिश मात्र है. स्वदेशी हथियार बनाना किसी भी देश के लिए अच्छी बात हो सकती है, लेकिन जब तक इस मिसाइल के तकनीकी मानक और वास्तविक मारक क्षमता पूरी दुनिया के सामने साबित नहीं होते, तब तक इसे केवल एक ‘प्रोपेगैंडा टूल’ या शुरुआती चरण का कच्चा परीक्षण ही माना जाएगा.



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