Large Families Trend US: मस्‍क के 14 तो जुकरबर्ग के तीन बच्‍चे… गरीब नहीं, अब अमेर‍िकी अमीर कर रहे हैं ‘शान’ के ल‍िए ज्‍यादा बच्‍चे पैदा

Large Families Trend US: मस्‍क के 14 तो जुकरबर्ग के तीन बच्‍चे… गरीब नहीं, अब अमेर‍िकी अमीर कर रहे हैं ‘शान’ के ल‍िए ज्‍यादा बच्‍चे पैदा


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इकॉनोमिस्‍ट माइक कॉन्जल का कहना है कि अमीर परिवारों के लिए तीसरा बच्चा स्टेटस सिंबल यानी रुतबे की निशानी बन गया है. उनके मुताबिक, महंगाई और बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च आम परिवारों को कम बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर कर रहा है, लेकिन इसका असर सबसे अमीर 1% परिवारों पर उतना नहीं पड़ता.

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अब अमेर‍िकी अमीर कर रहे हैं ज्‍यादा बच्‍चे पैदा (फोटो रायटर्स)

दशकों तक दुनियाभर में ये ट्रेंड देखने को मिलता था कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले लोग ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करते थे. जबकि इसके उलट अमीर लोग कम बच्‍चे पैदा करते थे. लेकिन अब दुनिया में ये अंदाज उल्‍टा होता नजर आ रहा है. अमेरिका के अमीर परिवारों में अब ज्यादा बच्चे पैदा करना ‘स्‍टेटस सिंबल’ बनता जा रहा है और लोग ज्‍यादा बच्‍चे पैदा कर रहे हैं. वॉश‍िंगटन पोस्‍ट की में एक्सियोस की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका के सबसे अमीर 1% परिवारों में से करीब आधे परिवारों के 3 या उससे ज्यादा बच्चे हैं. वहीं, कम कमाई समूह में तीन बच्चे वाले परिवार करीब 40 से 43% हैं. दुनिया के सबसे अमीर आदम‍ियों में से एक एलन मस्‍क खुद 14 बच्‍चों के प‍िता हैं. वहीं अमेजन कंपनी के माल‍िक जेफ बेजोस के 4 बच्‍चे हैं. मेटा के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग भी तीन बच्‍चों के प‍िता हैं.

अमेरिका में एक परिवार एक बच्चे की परवरिश पर 18 साल तक करोड़ों रुपए खर्च करता है. मिडिल क्लास फैमिली के लिए इतनी रकम चुका पाना महंगाई के इस दौर में लगभग नामुमकिन है. इस ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सबसे अमीर परिवारों में ज्यादा बच्चे का चलन 1990 के दशक से चला आ रहा है. लेकिन कम कमाई वाले परिवारों में यह चलन घट रहा है. यानी बच्चों को पालने का खर्च बढ़ने के बावजूद अमीर परिवार पहले की तरह बड़े परिवार रख रहे हैं.

वॉश‍िंगटन पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार पिछले कई दशकों में अमेरिका में बच्चों की संख्या लगभग हर आय वर्ग में घटी है, लेकिन सबसे अधिक कमाई वाले परिवार इस गिरावट का अपवाद बन गए हैं. यानी तीसरा बच्चा अब केवल ‘पारिवारिक पसंद’ नहीं, बल्कि एक तरह से आर्थिक क्षमता का संकेत बन गया है. इकॉनोमिस्‍ट माइक कॉन्जल का कहना है कि अमीर परिवारों के लिए तीसरा बच्चा स्टेटस सिंबल यानी रुतबे की निशानी बन गया है. उनके मुताबिक, महंगाई और बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च आम परिवारों को कम बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर कर रहा है, लेकिन इसका असर सबसे अमीर 1% परिवारों पर उतना नहीं पड़ता.

बच्‍चे पालना है बेहद खर्चीला काम
अमेरिकी कंपनी लेंडिंगट्री की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में एक बच्चे को जन्म से 18 साल की उम्र तक पालने में औसतन ₹3 करोड़ खर्च होते हैं. इस हिसाब से हर साल करीब 15 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं. इसमें बच्चे के खाने, घर, आने-जाने, हेल्‍थ इंश्‍योरंस और देखभाल जैसे खर्च शामिल हैं. हालांकि, यह एक एवरेज है. हर परिवार का खर्च उसकी कमाई, रहने की जगह और बच्चों की जरूरतों के हिसाब से अलग हो सकता है. बच्‍चों का शुरुआती 5 साल में सबसे ज्यादा खर्चा होता है. पहले पांच साल में बच्चे को पालने पर हर साल औसतन करीब 26 लाख रुपए खर्च होते हैं. इसकी बड़ी वजह बच्चे की देखभाल के लिए डे-केयर या दूसरी सेवाओं पर होने वाला खर्च है.

अमेरिका में कुल मिलाकर जन्म दर घट रही है, लेकिन यह गिरावट सबके लिए एक जैसी नहीं है. Brookings के अनुसार, 18–49 वर्ष के 44% ऐसे लोग, जो अभी माता-प‍िता नहीं है, वो कहते हैं कि उनके भविष्य में बच्चा होना ‘बहुत संभावित नहीं’ या ‘बिल्कुल संभावित नहीं’ है.



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