अमेरिका की सियासत में इस समय जो भूचाल आया है, उसने दुनिया भर के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है. 2026 के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की शर्मनाक हार के बाद चारों तरफ खलबली मची हुई है. संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हो चुका है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के हाथ से बाजी निकल चुकी है. लेकिन इस बीच जो सबसे बड़ा और हैरान करने वाला वाकया सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया. पोलिटिको की जानी-मानी रिपोर्टर दाशा बर्न्स लाइव टीवी पर थीं. उन्होंने बिना ज्यादा सोचे-समझे सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नंबर मिला दिया. और सबसे बड़ा ट्विस्ट ये था कि ट्रंप ने सचमुच फोन उठा लिया!
जब लाइव टीवी पर बज उठा अमेरिका के राष्ट्रपति का फोन
घटना 3 नवंबर रात की है. पोलिटिको का चुनावी विश्लेषण लाइव चल रहा था और स्टूडियो में माहौल काफी इंटेंस था. रिपब्लिकन पार्टी की इस करारी हार पर चर्चा हो रही थी कि अचानक रिपोर्टर दाशा बर्न्स ने अपना फोन निकाला और ट्रंप को डायल कर दिया.
शायद ही किसी को उम्मीद रही होगी कि देश का राष्ट्रपति किसी मीडिया हाउस के लाइव शो पर फोन उठाएगा. लेकिन ट्रंप ने फोन उठाया और लाइन पर आ गए. दाशा बर्न्स ने बिना वक्त गंवाए सीधे सवाल दागा, ‘मिस्टर प्रेसिडेंट, आप इस समय मेरे और मेरे सहयोगियों के साथ लाइव ऑन एयर हैं. मैं बस ये जानना चाहती हूं कि आपका संदेश क्या है? आपको क्या लगता है कि आज रात आपकी पार्टी के साथ असल में क्या हुआ?’
ट्रंप की सफाई: ‘मैं बैलेट पर नहीं था, वरना सब जीत जाते!’
ट्रंप अपने ठेठ अंदाज में बिना किसी झिझक के तुरंत बोले. उन्होंने हार का ठीकरा अपने ऊपर लेने से साफ इनकार कर दिया. ट्रंप ने कहा ‘मैं उस बैलेट पर खुद नहीं था और हम अपने लोगों को बाहर नहीं निकाल पाए. लेकिन बात ये है कि मैं मैदान में नहीं था. और अगर मैं खुद बैलेट पर होता, तो हम चुनाव जीत जाते. हम इस बार सब कुछ बहुत आसानी से जीत जाते’.
ट्रंप के इस जवाब पर रिपोर्टर दाशा बर्न्स ने तुरंत उन्हें याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान तो खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने ही अपने मतदाताओं से कहा था कि वो वोट ऐसे डालें जैसे कि ट्रंप खुद मैदान में हैं.
इस पर ट्रंप ने अपनी बात को थोड़ा संभालते हुए कहा, ‘हां, मैंने कहा था कि सोचो मैं मैदान में हूं. लेकिन मतदाताओं ने ऐसा नहीं माना और ज्यादातर मामलों में उन्हें उम्मीदवार पसंद नहीं आए. बस, ये वैसी ही कुछ चीज़ों में से एक है’. ट्रंप ने ये भी कहा कि इस हार के लिए वो किसी व्यक्तिगत व्यक्ति पर इल्जाम नहीं लगा रहे हैं.
आगे का क्या प्लान है? ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ काम करने की बात कही
जब ट्रंप से पूछा गया कि इस करारी हार के बाद अब उनका अगला कदम क्या होगा और वो आगे क्या करेंगे, तो राष्ट्रपति ने वही बात दोहराई जो उन्होंने दूसरे न्यूज नेटवर्क्स से बातचीत में कही थी.
ट्रंप ने कहा, ‘खैर, हम देश की भलाई के लिए ये सुनिश्चित करने वास्ते डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने जा रहे हैं. ये बहुत जरूरी है. उन्होंने पहले ही फोन कर दिया है और वो मिलकर काम करना चाहते हैं. देखिए, मेरे पास हर चीज को वीटो करने का अधिकार है, लेकिन मैं अगले दो साल तक सिर्फ बैठकर हर बिल को वीटो नहीं करना चाहता. वो लोग भी चाहते हैं कि देश में कुछ काम हो’.
ट्रंप के इन तेवरों से साफ पता चलता है कि चुनाव हारने के बाद उनके तेवर अब थोड़े बदले हुए हैं. कांग्रेस में बहुमत चले जाने के बाद अब उनके पास विपक्ष के साथ तालमेल बिठाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचा है.
रिपब्लिकन पार्टी के लिए ट्रंप का संदेश: ‘सबको साथ मिलकर चलना होगा’
अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए संदेश देते हुए ट्रंप ने कहा कि अब वक्त आपसी कलह का नहीं, बल्कि एकजुट होने का है. उन्होंने कहा ‘उन्हें बस इतना करना है कि वो सब साथ आएं और एकजुट हो जाएं. आपको बस अच्छी नीतियां बनाते रहना है’.
ईरान की जंग पर ट्रंप की दो टूक: ‘मेरा फैसला बिल्कुल सही था!’
सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब बातचीत ईरान के साथ चल रहे युद्ध और उसकी वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर पहुंची. देश में लोग कह रहे हैं कि तेल की कीमतें और महंगाई इसलिए बढ़ रही है क्योंकि ईरान के साथ जंग छिड़ी हुई है. लेकिन इस पर ट्रंप ने अपनी जिद और अपने फैसले का पूरा बचाव किया. उन्होंने बड़े कड़े शब्दों में कहा ‘बहुत से लोग कह रहे हैं कि तेल की कीमतें ईरान की वजह से हैं. लेकिन मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि हमारे देश और यहां तक कि पूरी दुनिया के लंबे समय के भले के लिए ईरान पर मेरा लिया गया फैसला बिल्कुल सही था, और आज भी वो उतना ही सही है’.
ट्रंप के बदले तेवर और अमेरिका की नई राजनीतिक हकीकत
पोलिटिको के इस लाइव शो पर ट्रंप का फोन उठाना और खुलकर अपनी बात रखना ये साबित करता है कि वो भले ही चुनाव हार गए हों, लेकिन सियासत के मैदान में अपनी पकड़ और दबदबा छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं.
एक तरफ जहां उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस हार के लिए सीधे तौर पर ईरान के युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं खुद डोनाल्ड ट्रंप अभी भी अपनी विदेश नीति और ईरान पर लिए गए फैसले को सही ठहरा रहे हैं. मिडटर्म चुनावों के इन नतीजों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को डेमोक्रेट्स के आगे झुकने और साथ मिलकर काम करने के लिए मजबूर जरूर कर दिया है, लेकिन ट्रंप का तेवर अब भी आक्रामक ही बना हुआ है. आने वाले दो सालों में अमेरिकी संसद और व्हाइट हाउस के बीच की ये रस्साकशी दुनिया की राजनीति का सबसे बड़ा ड्रामा बनने वाली है.