चीन लंबे समय से अपनी सैन्य ताकत का विस्तार अपनी सीमा से बाहर भी कर रहा है. इसके लिए वह दूसरे देशों में सैन्य ठिकाने और लॉजिस्टिक सुविधाएं डेवलप कर रहा है. इसी कड़ी में ड्रैगन ने दक्षिण-पूर्व एशिया के देश लाओस में एक नया एयरबेस तैयार किया है. यह एयरबेस राजधानी वियनतियाने के पास बान केउन में बनाया गया है. चीन ने इसे लाओस के साथ एक ज्वाइंट ट्रेनिंग केंद्र बताया है. लेकिन इसकी लोकेशन और निर्माण की रफ्तार ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है.
सबसे खास बात यह है कि चीन ने पहली बार इस सुविधा को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है. इससे पहले चीन ने जिबूती में सैन्य लॉजिस्टिक बेस और कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई थी. अब लाओस में एयरबेस के जरिए वह दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने एयर पावर का विस्तार कर रहा है.
द डिप्लोमेट वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक लाओस के बान केउन एयरपोर्ट पर चीन ने करीब 2,000 मीटर लंबा रनवे तैयार किया है. इसके साथ टैक्सीवे और विमानों की पार्किंग के लिए बड़ी जगह है. यहां एक साथ करीब 22 जेट को खड़ा करने की जगह है. सैटेलाइट तस्वीरों में निर्माण कार्य तेजी से होता दिखाई दिया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 30 सितंबर की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में यहां आठ K-8 विमान दिखाई दिए थे. ये चीन और पाकिस्तान के सहयोग से विकसित होंगडू JL-8 श्रेणी के ट्रेनिंग और हल्के लड़ाकू विमान हैं. इनके अलावा दो दर्जन से ज्यादा सैन्य वाहन भी नजर आए. लाओस की वायुसेना पहले से इन विमानों का इस्तेमाल करती है.
चीन का कहना है कि इस केंद्र का इस्तेमाल लाओस की वायुसेना के पायलटों को ट्रेनिंग देने और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए होगा. बीजिंग ने यह भी कहा है कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करना है. लेकिन जानकारों का सवाल है कि क्या यह सुविधा भविष्य में चीन की वायुसेना के लिए भी एक महत्वपूर्ण ठिकाना बन सकती है?
लाओस दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित एक लैंडलॉक देश है. इसकी सीमा चीन, वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड और म्यांमार से लगती है. इसकी सीमा समंदर से नहीं लगती. यानी भौगोलिक रूप से यह ऐसा देश है, जहां सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर चीन पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने की बेहतर स्थिति में आ सकता है.
इसमें सबसे ज्यादा चिंता वियतनाम को लेकर है. चीन और वियतनाम के बीच आर्थिक रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमाओं और द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद है. लाओस में चीन की सैन्य मौजूदगी बढ़ने से वियतनाम के पश्चिमी हिस्से के पास भी चीन का रणनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है.
अब तक चीन की विदेशों में सैन्य मौजूदगी का बड़ा हिस्सा समुद्री सुविधाओं से जुड़ा रहा है. लाओस का एयरबेस इस तस्वीर को बदल सकता है. यहां से चीन को दक्षिण-पूर्व एशिया के हवाई मार्गों और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक अतिरिक्त ठिकाना मिल सकता है.
लाओस में नया एयरबेस चीन की विदेशों में सैन्य पहुंच बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. चीन ने 2017 में अफ्रीकी देश जिबूती में अपना पहला आधिकारिक विदेशी सैन्य अड्डा स्थापित किया था. यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के पास स्थित है. इस इलाके से दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग गुजरते हैं. चीन इसे समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी अभियान और लॉजिस्टिक सहायता से जोड़कर देखता है.
इसके बाद कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर चीन की भूमिका बढ़ी. चीन की मदद से इस नौसैनिक अड्डे का विस्तार किया गया. 2025 में यहां ज्वाइंट ट्रेनिंग सेंटर का उद्घाटन हुआ. इसके बाद चीन और कंबोडिया की नौसेनाओं ने यहां संयुक्त सैन्य गतिविधियां भी कीं.
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
login