नई दिल्ली. दिवाली 2026 पर रिलीज होने वाली ‘रामायण’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक शानदार सिनेमाई जश्न है. नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म अब तक बनी सभी रामायण फिल्मों में सबसे असरदार और असली है. विजुअल शानदार होने के अलावा, इसकी कहानी कहने की इमोशनल गहराई और ईमानदारी दर्शकों को हैरान कर देती है. रणबीर कपूर का राम का शांत किरदार, यश का रावण के रूप में जबरदस्त अंदाज और साई पल्लवी का शांत लेकिन पक्के इरादे वाला सीता का रोल… यह फिल्म हर तरह से एक मील का पत्थर साबित होती है. एआर रहमान और हैंस जिमर के ग्लोबल म्यूजिक कोलेबोरेशन के साथ ‘रामायण’ थिएटर में एक जादुई अनुभव देती है.
कहानी
फिल्म ‘रामायण’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी असली और इमोशनल कहानी है. नितेश तिवारी ने दर्शकों को सिर्फ एक जानी-पहचानी पौराणिक कहानी नहीं दिखाई है, बल्कि इस महाकाव्य की आत्मा को छूने की कोशिश की है. फिल्म की शुरुआत देवताओं और राक्षसों के बीच ब्रह्मांडीय स्तर पर हमेशा चलने वाले संघर्ष से होती है, जिसे रावण (यश) के बचपन, उसकी कड़ी तपस्या और उसके अजेय बनने के सफर में बहुत अच्छे से पिरोया गया है. फिर कहानी अयोध्या में शिफ्ट हो जाती है, जहां राजा दशरथ (अरुण गोविल) के चार बेटों (राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न) के जन्म और शिक्षा को बहुत ध्यान से दिखाया गया है. पार्ट वन मुख्य रूप से राम के इंसानी और दैवीय पहलुओं के बीच बैलेंस, विश्वामित्र के साथ आश्रम की उनकी यात्रा, ताड़का का वध, अहिल्या को बचाना और मिथिला में सीता के स्वयंवर की घटनाओं पर फोकस करता है. यह कहानी धर्म, त्याग, फर्ज और भक्ति जैसे यूनिवर्सल मूल्यों को आज की पीढ़ी के लिए बहुत ही आसान और इमोशनल तरीके से दिखाती है.
एक्टिंग
रणबीर कपूर (भगवान राम): रणबीर कपूर की परफॉर्मेंस इस फिल्म की खासियत है. उन्होंने भगवान राम की गरिमा, संयम, शांति, दया और क्षत्रिय वीरता को बहुत गंभीरता और सेल्फ-कंट्रोल के साथ दिखाया है. उनकी आंखों में एक अनोखी चमक और नरमी झलकती है. लड़ाई के सीन के दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी में जो पक्का यकीन है, वह इस रोल के लिए उनकी की गई काफी तैयारी को दिखाता है.
यश (रावण): रॉकिंग स्टार यश ने रावण के किरदार में एक जबरदस्त और जबरदस्त एनर्जी भरी है. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार है कि वह हर फ्रेम में छा जाते हैं. अपनी गहरी आवाज और तीखे एक्सप्रेशन से यश ने रावण के घमंड, समझदारी और अजेयता को जिंदा कर दिया है. वह सिर्फ एक विलेन के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े और मजबूत इंसान के तौर पर उभरते हैं.
साई पल्लवी (माता सीता): साई पल्लवी सीता के किरदार में बहुत ज्यादा इज्जत, सादगी और इमोशनल गहराई लाती हैं. उनके एक्सप्रेशन इतने नेचुरल हैं कि वे दर्शकों के दिलों को छू जाते हैं. सीता की अंदर की ताकत, दयालुता और अपने उसूलों के प्रति कमिटमेंट को साई पल्लवी ने बिना किसी लाउड ड्रामा के खूबसूरती से दिखाया है.
सपोर्टिंग कास्ट: रवि दुबे ने लक्ष्मण के रोल में भाईचारे के प्यार और पक्की वफादारी का शानदार परफॉर्मेंस दिया है. राजा दशरथ के रोल में अरुण गोविल की मौजूदगी पुरानी यादें ताजा करती है और कहानी में इमोशनल ताकत जोड़ती है. बाकी सारे सपोर्टिंग एक्टर भी अपने छोटे लेकिन जरूरी रोल के साथ पूरा न्याय करते हैं.
डायरेक्शन
नितेश तिवारी ने साबित कर दिया है कि वे न सिर्फ इंसानी भावनाओं (जैसे ‘दंगल’) की कहानियां बनाने में माहिर हैं, बल्कि इतने बड़े कैनवस और 4000 करोड़ रुपये के भारी बजट को भी आसानी से संभाल सकते हैं. उनका डायरेक्शन बहुत बैलेंस्ड है. वे बड़े विजुअल्स के चक्कर में कहानी के इमोशनल कोर को खोने नहीं देते. जिस बारीकी से उन्होंने पौराणिक संदर्भों और किरदारों के इंसानी पहलुओं को गढ़ा है, वह तारीफ के काबिल है. उन्होंने भारतीय इतिहास के सबसे पवित्र ग्रंथ को सिनेमाई रूप देते हुए सांस्कृतिक नियमों का पूरा सम्मान किया है.
सिनेमैटोग्राफी और विजुअल इफेक्ट्स
- यह फिल्म तकनीकी रूप से भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. DNEG के किए गए विजुअल इफेक्ट्स (VFX) कमाल के और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हैं.
- वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्शन डिजाइन: अयोध्या की शानदार शान, जनकपुर की आर्किटेक्चरल शान, लंका की सुनहरी शान और ऋषियों-मुनियों के शांत आश्रम इतने असली हैं कि देखने वालों को उस समय में डूबा हुआ महसूस होता है.
- कैमरा वर्क: जिस शानदार सिनेमैटिक तरीके से बड़े-बड़े लैंडस्केप, दिव्य हथियारों की चमक और लड़ाई के सीन शूट किए गए हैं, वह खास तौर पर IMAX और 3D में बहुत शानदार लगते हैं. हर फ्रेम एक जीते-जागते कैनवस जैसा लगता है.
म्यूजिक
- पहली बार, इंडियन म्यूजिक मास्टर एआर रहमान और हॉलीवुड के ऑस्कर-विनिंग कंपोजर हैंस जिमर एक साथ आए हैं. उनके कोलेबोरेशन ने ‘रामायण’ को एक यूनिक और बेमिसाल साउंडस्केप दिया है.
- गाने: एआर रहमान के भक्ति और दयालु गाने एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक एहसास जगाते हैं.
- बैकग्राउंड स्कोर: हैंस जिमर का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की शानदारता को बढ़ाता है. रावण की एंट्री के दौरान जबरदस्त ऑर्केस्ट्रा स्कोर और राम-सीता के पलों के दौरान नाजुक म्यूजिक दिल को छू जाता है. यह स्कोर सीन के इमोशनल वजन को काफी बढ़ाता है.
कमियां
कोई भी एपिक बिना चुनौतियों के नहीं बनता और ‘रामायण’ में भी कुछ छोटी-मोटी कमियां हैं. फिल्म का ड्यूरेशन काफी लंबा है. पहला हाफ, जिसमें रावण के बैकग्राउंड और राम के बचपन को बहुत डिटेल में दिखाया गया है, कई बार रफ्तार धीमी कर देता है. हालांकि DNEG का काम शानदार है, लेकिन कुछ बैकग्राउंड एनवायरनमेंटल सीन में थोड़ा CGI फील आता है, जिसे बेहतर किया जा सकता था.
अंतिम फैसला
‘रामायण: पार्ट 1’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि बॉलीवुड के इतिहास का एक सुनहरा चैप्टर है. 4000 करोड़ के बजट के साथ नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी ने एक वर्ल्ड-क्लास विजुअल मास्टरपीस बनाया है जिस पर हर इंडियन को गर्व होगा. रणबीर कपूर की ग्रेस, यश की ब्रिलियंस, साई पल्लवी का डेडिकेशन और रहमान-जिमर का मैजिकल म्यूजिक इस फिल्म को जरूर देखने लायक बनाते हैं. यह फिल्म पूरी तरह से सभी की उम्मीदों पर खरी उतरती है. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 4.5 स्टार.