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महाराष्ट्र के लातूर की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विपुल सुखाराम बनकर को 10 साल की सजा सुनाई है. आरोपी ने सजा से बचने के लिए पीड़िता से शादी कर ली थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.
कोर्ट ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है. फाइल फोटो
महाराष्ट्र के लातूर जिले की एक अदालत ने रेप के एक मामले में 35 वर्षीय व्यक्ति को 10 साल की सजा सुनाई है. आरोपी ने एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था. फिर सजा से बचने के लिए मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता से शादी कर ली. दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे. उनकी एक बेटी भी हुई. लेकिन अदालत ने मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है.
जज एस ए सैयद ने विपुल सुखाराम बनकर को एक नाबालिग लड़की को अगवा करने एवं उसके साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाया. अदालत ने उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. अभियोजन पक्ष के अनुसार बनकर ने शादी का झांसा देकर 26 सितंबर 2015 को लड़की को बहलाया-फुसलाया, उसका अपहरण किया और उसका यौन उत्पीड़न किया. लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर, लातूर ग्रामीण पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की संबंधित धाराओं के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया.
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता समेत 14 गवाह पेश किए. बनकर ने बाद में लड़की से शादी कर ली और अदालत से अनुरोध किया कि वह फिर से उसका बयान दर्ज करे. लेकिन अदालत ने उसका अनुरोध खारिज कर दिया. उसने सजा से बचने के लिए दलील दी कि उसने लड़की से शादी कर ली है और उनका एक बच्चा भी है. लेकिन सरकारी वकील एसएम मुंडाडा और विशेष सरकारी वकील मंगेश महिंद्रकर ने अदालत को बताया कि वैवाहिक विवादों के कारण अब वे दोनों साथ नहीं रह रहे हैं. अभियोजन पक्ष की दलीलों को ठोस मानते हुए, अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और सजा सुनायी.