एजुकेशन लोन ल‍िया, 8 साल तक दे नहीं पाई, फ‍िर 3 साल का बेटा लेकर पहुंची आख‍िर क‍िस्‍त चुकाने

एजुकेशन लोन ल‍िया, 8 साल तक दे नहीं पाई, फ‍िर 3 साल का बेटा लेकर पहुंची आख‍िर क‍िस्‍त चुकाने


बेंगलुरु की अर्पिता राव जब बैंक पहुंचीं, तो उनके साथ उनका तीन साल का बेटा भी था. अर्पिता को उस दिन कोई नया लोन नहीं लेना था. वह आठ साल से चला आ रहा कर्ज चुकाने पहुंची थीं. लेकिन अकेले नहीं, अपने बेटे के साथ. अर्पिता चाहती थीं कि उनका बेटा भी इस पल का हिस्सा बने. वह उसे दिखाना चाहती थीं कि जिंदगी में पैसा कमाना, अपनी मेहनत से आगे बढ़ना और इंड‍िपेंडेंट होना कितना जरूरी है.

37 साल की अर्पिता ने MBA की पढ़ाई के लिए 26 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया था. लेकिन समय के साथ ब्याज जुड़ता गया और यह रकम करीब 43 लाख रुपये हो गई. इसे चुकाने में उन्हें आठ साल लग गए. उनकी लाइफ में कई बार परेशान‍ियां आईं, ज‍िसकी वजह से वह कर्ज नहीं चुका पाई थीं.

18 साल की उम्र से खुद संभाली अपनी जिंदगी

अर्पिता की जिंदगी की शुरुआत उन लोगों जैसी नहीं थी, जिन्हें पढ़ाई और करियर के लिए परिवार से आर्थिक मदद मिलती है. उन्होंने अपने LinkedIn पोस्ट में बताया कि 18 साल की उम्र में उनके पिता ने आर्थिक मदद बंद कर दी थी. कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उनकी बहन ने उनका साथ दिया. आज भी वह उनकी मदद के लिए खड़ी रहती हैं.

22 साल की उम्र में अर्पिता ने कमाना शुरू कर दिया था. MBA के लिए लोन लेने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी नौकरी मिलेगी और कर्ज धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. लेकिन जिंदगी इतनी आसान नहीं रही. उनके MBA के कुछ साथियों ने दो से चार साल में ही अपना एजुकेशन लोन चुका दिया. उनके पास परिवार का सहारा था और आर्थिक मुश्किलों से निपटने के लिए बचत भी. अर्पिता के लिए यह सफर अलग था. उन्हें अपनी कमाई से खुद को संभालना था और लोन भी चुकाना था.

मां बनने के बाद एक साल तक नहीं हुई कमाई

अर्पिता के कर्ज चुकाने के सफर में कई मुश्किलें आईं. करियर में बदलाव के दौरान उन्हें कम सैलरी पर काम करना पड़ा. उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ. सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब वह मां बनीं. अर्पिता के मुताबिक, बच्चे के जन्म के आसपास वह करीब एक साल तक प्रभावी रूप से बिना आय के रहीं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस स्टार्टअप में वह काम करती थीं, वहां उन्हें छह महीने का मातृत्व लाभ नहीं मिला.

अर्पिता ने Moneycontrol को बताया, मैंने कमाना बंद कर दिया था. मुझे लगता है कि यह सबसे बड़ा झटका था. एक तरफ छोटे बच्चे की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ लाखों रुपये का कर्ज. लेकिन अर्पिता ने अपने करियर को आगे बढ़ाना जारी रखा. उन्होंने Sattva, Intellecap और Sagana जैसी कंपनियों में काम किया. शिक्षा, जेंडर, क्लाइमेट और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को फिर से संभाला.

बेटे को क्यों लेकर गईं बैंक?

आठ साल बाद जब अर्पिता ने अपना लोन बंद कराया, तो वह चाहती थीं कि उनका बेटा भी वहां मौजूद रहे. उन्होंने कहा, मैं चाहती थी कि वह देखे कि पैसा कैसे कमाया जाता है, नेटवर्थ कैसे बनती है और जिंदगी में वैल्यू कैसे तैयार की जाती है. अर्पिता चाहती हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर इकोनॉम‍िकली इंड‍िपेंडेंट हो और मेहनत की अहमियत समझे. वह उसे यह बताना चाहती हैं कि जिंदगी में अपने दम पर आगे बढ़ना कितना जरूरी है.

हालांकि, बैंक की इस यात्रा में उनके बेटे के लिए सबसे खास पल कुछ और था. अर्पिता ने हंसते हुए बताया कि बेटे को बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की असली बंदूक छूना सबसे ज्यादा पसंद आया.

आज अर्पिता कर्जमुक्त हैं. वह अपनी कोचिंग और एडवाइजरी प्रैक्टिस को आगे बढ़ा रही हैं. आठ साल पहले लिया गया लोन अब खत्म हो चुका है. उनके लिए यह सिर्फ एक आर्थिक जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं, बल्कि जिंदगी के एक लंबे दौर का अंत है.



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