अंशुल ने बताया कैसे बढ़ाई स्पीड, ऑकलैंड में 141किमी/घंटे वाली गेंद की कहानी
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how anshul kamboj increased his speed: 10 ओवर सिर्फ 22 रन देकर 2 विकेट लेने वाले अंशुल कंबोज ने अपने करियर और खेल के प्रति दृष्टिकोण को साझा किया. उन्होंने बताया कि एक खराब मैच उनके करियर को परिभाषित नहीं करता और वे हमेशा अपने काम पर फोकस करते हैं. खराब प्रदर्शन से उन्हें मोटिवेशन मिलता है कि आगे और बेहतर करना है. इंडियन क्रिकेट में एक्सपर्ट्स और फैंस जल्दी राय बना लेते हैं, लेकिन वे इन बातों पर ध्यान नहीं देते और सिर्फ अपने क्रिकेट को सुधारने पर फोकस करते हैं.
मैच विनिंग स्पेल फेंकने के बाद अंशुल कंबोज का पहला बयान
नई दिल्ली. पिच पर पेस भी था, असमतल उछाल था बस जरूरत थी तो पेस बॉलर्स उस लेंथ को लगातार हिट करे जहां से बल्लेबाज ना तो आगे आ सके और ना ही पीछे जा सकेऔर इस काम को बाखूबी अंजाम दिया अपना पहला मैच खल रहे अंशुल कंबोज ने. ये वहीं गेंदबाज हैं जिनको उनकी रफ्तार और धार के लिए इंग्लैंड में टेस्ट डेब्यू किया तो उनको ट्रोल किया. आज हालात बदले और अंशुल कंबोज ने पहले ही मैच में जीत लिया मैच ऑफ द मैच का अवार्ड.
10 ओवर सिर्फ 22 रन देकर 2 विकेट लेने वाले अंशुल कंबोज ने अपने करियर और खेल के प्रति दृष्टिकोण को साझा किया. उन्होंने बताया कि एक खराब मैच उनके करियर को परिभाषित नहीं करता और वे हमेशा अपने काम पर फोकस करते हैं. खराब प्रदर्शन से उन्हें मोटिवेशन मिलता है कि आगे और बेहतर करना है. इंडियन क्रिकेट में एक्सपर्ट्स और फैंस जल्दी राय बना लेते हैं, लेकिन वे इन बातों पर ध्यान नहीं देते और सिर्फ अपने क्रिकेट को सुधारने पर फोकस करते हैं.
मैकग्रा जैसी लेंथ पर दिया ध्यान
मैच के बारे में अंशुल कंबोज ने बताया कि पिच सीमिंग थी, इसलिए सही लेंग्थ पर गेंद डालना जरूरी था. ग्राउंड के डाइमेंशन से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जब तक विकेट पर परचेस है. बारिश के कारण स्कोर बदलता रहा, लेकिन टीम की स्ट्रेटेजी थी कि खेल जारी रखें और रन बनते रहेंगे. उन्होंने अपनी तैयारी के बारे में बताया कि मैच से पहले अच्छी ट्रेनिंग और प्रैक्टिस से कॉन्फिडेंस बढ़ता है, जिससे मैच में कोई सरप्राइज नहीं होता. ऑलराउंडर के रोल के बारे में उन्होंने कहा कि जब हाथ में बॉल हो तो सिर्फ बोलिंग पर ध्यान दें, और जब बैट हो तो सिर्फ बैटिंग पर. गौतम गंभीर और माही भाई से बातचीत से उन्हें काफी सीखने को मिला. उनका फोकस सिर्फ अपने खेल को सुधारने और हर मैच में बेहतर प्रदर्शन करने पर है.
125 से 141 किमी/घंटा तक का सफर
अंशुल कंबोज ने अपनी बोलिंग को इम्प्रूव करने की जरूरत पर जोर दिया और बताया कि बोलिंग ग्रुप में चर्चा होती है कि कैसे प्रेशर बनाए रखा जाए और सही एरियाज में गेंदबाजी की जाए. इंग्लैंड में डब कंबोज टेस्ट खेले तो रफ्तार 125 किमी/घंटा थी पर उन्होंने उसपर काम किया और स्पीड को ऑकलैंड में 141 किमी/घंटा तक पहुंचाने में कामयाब रहे. अंशुल ने कहा कि अगर एक छोर से अच्छा बॉलिंग हो रही है तो दूसरे छोर से विकेट मिलने की संभावना बढ़ जाती है. आसान रन नहीं देना चाहिए ताकि बल्लेबाज गलत शॉट खेलें. खिलाड़ी ने अपने डेब्यू मैच और उसके बाद के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए बताया कि क्रिकेट में रिजल्ट से ज्यादा प्रोसेस पर ध्यान देना चाहिए. अगर आप अपनी योजना को सही तरीके से लागू कर रहे हैं तो रन लगने पर भी चिंता नहीं करनी चाहिए. टीम मैनेजमेंट का फीडबैक भी यही था कि अच्छे एरियाज में बोलिंग जारी रखो और रिजल्ट की चिंता मत करो. वनडे क्रिकेट में शुरुआत के ओवरों में बॉल मूवमेंट ज्यादा होती है, इसलिए पार्टनरशिप में बोलिंग करना और मूवमेंट का फायदा उठाना जरूरी है. टी20 में बॉल जल्दी पुराना हो जाता है, लेकिन वनडे में दोनों तरफ से नया बॉल होता है जिससे शुरुआत में ज्यादा मूवमेंट मिलती है. खिलाड़ी ने कहा कि चाहे विकेट फ्लैट हो या सीमिंग, हमेशा अच्छे एरियाज में बोलिंग करना ही जरूरी है.