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How to get bhamashah yojana benefits : आलू किसानों को भाव कम होने पर परेशान होने की जरूरत नहीं है. सरकार की ओर से ऐसे किसानों को अनुदान दिया जाएगा. आलू की कीमतों में गिरावट से किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रदेश सरकार भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना लेकर आई है. शीतगृह में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क में भी आर्थिक सहायता मिलेगी. सहारनपुर के उद्यान निरीक्षक भूपेंद्र कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर रोपित क्षेत्र और प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल उत्पादन के आधार पर अनुदान मिलेगा.
सहारनपुर. आलू की खेती करने वाले किसानों को अब दाम कम होने पर परेशान होने की जरूरत नहीं है. सरकार की ओर से आलू की कीमत कम होने पर किसानों को अनुदान दिया जाएगा. आलू की कीमतों में गिरावट से किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने भामाशाह भाव स्थिरता कोष और निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण प्रभार पर अनुदान की व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत बाजार में आलू के दाम अत्यधिक गिरने पर पात्र किसानों को अनुदान दिया जाएगा. शीतगृह में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क में भी आर्थिक सहायता मिलेगी. भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत आलू का बाजार भाव गिरने पर किसान को न्यूनतम उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत और न्यूनतम उत्पादन लागत और बिक्री दर के अंतर की राशि, जो कम होगी, अनुदान के रूप में दी जाएगी.
कैसे मिलेगा लाभ
एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर रोपित क्षेत्र और प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल उत्पादन के आधार पर अनुदान मिलेगा. योजना का लाभ लेने के लिए फॉर्मर आईडी धारक होना और एग्रीटेक पोर्टल पर पंजीकृत आलू उत्पादक होना अनिवार्य है. रोपित क्षेत्रफल का निर्धारण खसरा खतौनी के आधार पर किया जाएगा.
सहारनपुर के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक भूपेंद्र कुमार ने लोकल 18 से बताया कि सरकार की ओर से आलू के किसानों के लिए लाई गई भामाशाह भाव स्थिरता कोष अनुदान की योजना है. इसमें कोई भी किसान जो अपने आलू को उत्पादित करके कम दाम पर बेचने की सोच रहा है, वह इसका लाभ उठा सकते हैं. जिसके लिए उनको अपना आधार कार्ड, बैंक की पासबुक लगाकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. योजना का लाभ लेने के लिए किसान ने मंडी में जो अपना आलू बेचा है, उसकी रसीद लानी होगी. तभी आपको इस अनुदान का लाभ मिलेगा.
35 हजार अधिकतम
योजना के तहत 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाता है. एक किसान को अधिकतम 35 हजार रुपये का अनुदान देय है. अगर आप 500 रुपये क्विंटल आलू बेचते हैं तो उस पर 175 रुपये का अनुदान मिलेगा. भूपेंद्र कुमार बताते हैं कि इस साल बाजार में आलू का रेट कुछ कम है. उसको देखते हुए सरकार ने यह बहुत ही लाभकारी स्कीम निकाली है. इससे किसान के घाटे को कम करने का प्रयास किया जा रहा है.