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Career Cushioning Trend: कॉर्पोरेट अनिश्चितता और छंटनी के दौर में ‘करियर कुशनिंग’ ट्रेंड बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. जानिए क्यों आज की जनरेशन मौजूदा नौकरी के साथ चुपचाप बैकअप प्लान तैयार करने में जुटी है और इसके क्या मायने हैं.
Career Cushioning Trend: युवाओं में बैकअप जॉब ऑप्शन का ट्रेंड बढ़ रहा है
नई दिल्ली (Career Cushioning Trend). कॉर्पोरेट जगत की हवा बदल चुकी है. कभी कंपनियों के प्रति वफादारी को सबसे बड़ा गुण माना जाता था. एंप्लॉई एक ही ऑफिस में कई साल बिता देते थे. लेकिन आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z और मिलेनियल्स इस लीक से हटकर सोच रहे हैं. युवा समझ गए हैं कि अब कॉर्पोरेट सेक्टर में स्टेबिलिटी नहीं है. छंटनी के बढ़ते दौर और आर्थिक अनिश्चितता के बीच युवाओं ने करियर की सिक्योरिटी का जिम्मा खुद अपने हाथों में ले लिया है. इसे करियर कुशनिंग कहते हैं.
करियर कुशनिंग क्या है और इसका क्रेज क्यों बढ़ रहा है?
करियर कुशनिंग का मतलब है कि नौकरी में रहते हुए दूसरा ऑप्शन तैयार रखना. IT कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी और जॉब मार्केट के उतार-चढ़ाव ने युवाओं के मन में जॉब सिक्योरिटी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. युवा साइकोलॉजिकली मजबूत रहने के लिए इस स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. बैकअप में स्किल, फ्रीलांस क्लाइंट या इंटरव्यू के ऑफर्स होने पर मौजूदा नौकरी का मेंटल स्ट्रेस काफी हद तक कम हो जाता है. छंटनी के दौर में इनकम सोर्स बनाए रखने के लिए वे ‘प्लान बी’ के साथ तैयार रहते हैं.
साइलेंट क्विटिंग से एक कदम आगे की तैयारी
पहले ‘साइलेंट क्विटिंग’ का दौर चर्चा में था. इसमें एंप्लॉई सैलरी के हिसाब से काम करते थे. लेकिन करियर कुशनिंग उससे कहीं ज्यादा एक्टिव और फ्यूचर-ओरिएंटेड अप्रोच है. इसमें युवा केवल काम से मुंह नहीं मोड़ते, बल्कि अपनी वैल्यू बढ़ाने के लिए लगातार नए हुनर सीखते हैं. वे पर्सनल ब्रांडिंग पर काम करते हैं. अगर आज उनकी नौकरी चली भी जाए तो उन्हें नई जॉब ढूंढने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. लेऑफ के दौर में निश्चिंत रहने के लिए इस फाइनेंशियल और मेंटल सेफ्टी नेट को अपनाना जरूरी है.