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CA Articleship Training: सीए की पढ़ाई सबसे कठिन मानी जाती है. इसमें 3 स्तर की परीक्षाएं होती हैं- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल. सीए बनने के लिए 2 साल की आर्टिकलशिप भी अनिवार्य होती है. जानिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के दौरान क्या सिखाते हैं और यह सीए फाइनल एग्जाम को क्रैक करने में सबसे बड़ा टूल कैसे बनती है.
CA Articleship Training Duration: सीए आर्टिकलशिप में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है
नई दिल्ली (CA Articleship Training). चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सफर बेहद कठिन माना जाता है. इसमें किताबों की थ्योरी और फॉर्मूलों से आगे बढ़कर आर्टिकलशिप का भी पड़ाव होता है. इस फेज में सीए उम्मीदवार सिर्फ किताबों पर फोकस करके लिखित परीक्षा नहीं देता, बल्कि असली दुनिया के दांव-पेंच सीखने वाला प्रोफेशनल बनना शुरू करता है. सीए इंटरमीडिएट में पास होते ही सीए आर्टिकलशिप की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शुरू होती है.
सीए आर्टिकलशिप कब होती है?
सीए कोर्स के दौरान प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी आर्टिकलशिप सीए इंटरमीडिएट की दोनों या किसी एक ग्रुप की परीक्षा पास कर लेने के बाद शुरू होती है. इसके लिए आईसीएआई की ITT और ‘ओरिएंटेशन’ प्रोग्राम पूरा करना जरूरी है. सीए आर्टिकलशिप के दौरान किसी रजिस्टर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म या इंडस्ट्री में काम करने वाले अनुभवी सीए के अंडर में बतौर आर्टिकल असिस्टेंट काम करना होता है. इसमें सुबह से शाम तक ऑफिस की फाइल्स, टैक्स रिटर्न और बैलेंस शीट के बीच समय बिताना पड़ता है.
किताबों से निकलकर असल दुनिया के पन्नों तक का सफर
क्लास में टैक्स के नियमों या ऑडिटिंग की थ्योरी पर फोकस किया जाता है. लेकिन आर्टिकलशिप के दौरान किसी क्लाइंट की बुक्स ऑफ अकाउंट्स खंगालने पर थ्योरी और प्रैक्टिकल के बीच अंतर समझ आता है. इन 2 सालों में वे जीएसटी फाइलिंग, इनकम टैक्स असेसमेंट, कंपनी लॉ कंप्लायंस, बैंक ऑडिट, स्टॉक ऑडिट और बैलेंस शीट फाइनलाइजिंग जैसे मुश्किल काम सीखते हैं. उन्हें कंपनियों के खातों में छिपी गड़बड़ियां पकड़ना आता है. साथ ही कानूनी दायरे में रहकर टैक्स की देनदारी को कम करना भी सीखते हैं.
सीए बनने के लिए आर्टिकलशिप क्यों जरूरी है?
कई लोग आर्टिकलशिप को सिर्फ काम मानते हैं. लेकिन असल में आर्टिकलशिप सीए फाइनल की परीक्षा पास करने की सबसे बड़ी कुंजी है. सीए फाइनल के कई पेपर्स (डायरेक्ट टैक्स, इनडायरेक्ट टैक्स, एडवांस ऑडिटिंग और फाइनेंशियल मैनेजमेंट) के कॉन्सेप्ट प्रैक्टिकल अनुभव से ही समझ में आते हैं. 2 साल की आर्टिकलशिप से फाइनल एग्जाम के केस स्टडी बेस्ड सवाल हल करना आसान हो जाता है. फिर इसके लिए रट्टा मारने की जरूरत नहीं पड़ती.
कॉरपोरेट दुनिया के दांव-पेंच और क्लाइंट हैंडलिंग का हुनर
आर्टिकलशिप सिर्फ हिसाब-किताब सिखाने का काम नहीं करती, बल्कि लीडरशिप, कम्युनिकेशन स्किल्स और प्रेशराइज्ड माहौल में काम करने की क्षमता भी डेवलप करती है. जब अलग-अलग बिजनेस सेक्टर के क्लाइंट्स से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, उन्हें सलाह देते हैं तो कॉन्फिडेंस गजब का हो जाता है. इसीलिए आर्टिकलशिप को सीए कोर्स की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है. यह नौसिखिए को काबिल और शार्प चार्टर्ड अकाउंटेंट बना देती है.