बांग्लादेश बॉर्डर पर कैसे चलता है स्मगलिंग का खेल, जहां पीटे गए BSF जवान

बांग्लादेश बॉर्डर पर कैसे चलता है स्मगलिंग का खेल, जहां पीटे गए BSF जवान


बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ जवानों को बुरी तरह पीटा गया. हमला उन स्मगलरों ने किया जो बॉर्डर पार तस्करी की कोशिश में थे. मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. त्रिपुरा सीएम माणिक साहा ने इन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. दरअसल भारत और बांग्लादेश के बीच तकरीबन 4096 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल बॉर्डर पर तस्करी आम है. पश्चिम बंगाल, असम, मेघायल, मिजोरम और त्रिपुरा में कई ऐसे प्वाइंट हैं जो बड़े पैमाने पर स्मगलिंग के मामले सामने आए हैं. BSF से हाईटेक तरीके से इन पर निगरानी तो रखती हैं, मगर घने जंगल, पहाड़, नदियां और घनी आबादी वाले गांवों का फायदा उठाकर स्मगलिंग का ये धंधा चलता रहता है.

त्रिपुरा में सोमवार रात सिपाहीजला जिले में बीएसएफ के एक असिस्टेंट कमांडेंट और चार जवानों पर 8 लोगों ने एक साथ हमला किया. यह अटैक बॉक्सनगर के आशाबाड़ी इलाके में हुई जहां बांग्लादेश बॉर्डर है. बीएसएफ ने यहां एक स्मगलिंग ऑपरेशन को रोका था. यह टीम मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वहां पहुंची थी. घायल जवानों में कुछ के फ्रैक्चर भी हुआ है. इससे पहले भी बॉर्डर पर मवेशियों, नशीले पदार्थों, नकली नोटों और सोने की तस्करी की बात सामने आई है. ऐसे में सवाल ये है कि हाईटेक निगरानी के बावजूद बॉर्डर पर स्मगलिंग का ये सिंडिकेट कैसे काम करता है.

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस साल पेश किए गए बजट में सरकार ने जानकारी दी थी कि बॉर्डर पर 3240 किमी तक बाड़ लगाने का काम पूरा हो गया है. इसी में बताया गया था कि तकरीबन 856 किमी इलाके के हिस्से में बाड़ नहीं है. इसमें एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां भौगोलिक चुनौतियों की वजह से बाड़बंदी नहीं की जा सकती. इनमें नदियां, घने जंगल और पहाड़ी इलाके हैं. इसके अलावा सीमा से सटे कुछ गांव हैं जिनकी खेत और बस्तियां बिल्कुल बॉर्डर से सटी हैं. यही इलाके तस्करों के लिए जीवनदान की तरह हैं. जहां बाड़बंदी हो सकती है, उसके लिए बीएसएफ को बंगाल सरकार की ओर से जमीन दी जा चुकी है.

बॉर्डर पर तस्करी का कारोबार किसी एक सामान तक सीमित नहीं है. यहां मवेशियों की अवैध आवाजाही लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है. इसके अलावा सोने की तस्करी, नशीले पदार्थ जैसे गांजा, कफ सिरप समेत नकेली भारतीय करेंसी भी बांग्लादेश के रास्ते ही आती जाती रही है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि चीनी चावल गेहूं व अन्य सामान की भी बॉर्डर पर खूब तस्करी होती है.

बांग्लादेश बॉर्डर पर तस्करी का ये पूरे खेल की वजह से तगड़ा मुनाफा है. इंडियन एक्सप्रेस की एक 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश में तस्करी होने वाले मवेशियों के 40 से लेकर 80 हजार रुपये तक दाम मिलते हैं. रॉयटर्स ने दिसंबर 2024 में ही एक रिपोर्ट में ये दावा किया था कि भारत में निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद बांग्लादेश में कई खाद्य वस्तुओं की तस्करी की गई. ऐसा इसलिए क्योंकि बांग्लादेश में चावल-गेहूं व अन्य चीजों की कीमतें भारतीय बाजार से कहीं ज्यादा हो गईं थीं. नशीले कफ सिरप के मामले का खुलासा तो हाल ही में हुआ था जब बनारस में नकली कफ सिरप कांड सामने आया था.

DRI ने 2023 में ऑपरेशन ईस्टर्न गेटवे चलाया था. इसमें बांग्लादेश, त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में फैले सोने की तस्करी के सिंडिकेट के आठ सदस्यों को पकड़ा गया था. इनसे 24.4 किलो सोना जब्त किया गया था. इसमें सामने आया था कि यह सिंडिकेट पांच स्तरों पर काम करता है. इसका पहला पार्ट मास्टरमाइंड या मुख्य तस्कर होता है जो पूरे नेटवर्क पर कंट्रोल रखता है. इसका दूसरे चरण में एजेंट होते हैं जो बॉर्डर पर दोनों ओर तस्करों से संपर्क बैठाते हैं. इसके बाद ट्रांसपोर्टर और कैरियर का काम शुरू हुआ है.

इनका काम सिर्फ माल को पहुंचाना होता है. इन्हें पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं होती. इसका चौथा स्तर होते हैं खरीदार, जिसका काम तस्कर माल को खपाना होता है. सबसे आखिरी और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है फाइनेंशियल नेटवर्क, जिसके जरिए सारा लेनदेन किया जाता है.

2021 में सीबीआई ने मवेशियों की तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच की थी. इसमें एक कमांडेट का नाम भी सामने आया था. CBI के कथित हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बीएसएफ अधिकारी 2000 और कस्टम अधिकारी 500 रुपये प्रति मवेशी लेते थे. इस मामले में एक कमांडेंट को गिरफ्तार भी किया गया था. कमांडेंट के परिवारीजनों के खाते में करोड़ों की रकम मवेशी तस्करी के मुख्य आरोपी द्वारा भेजे जाने का आरोप लगा था.



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