Last Updated:
Ramganjmandi-Biaora-Bhopal Rail Line Project: राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में 25 साल का लंबा इंतजार मंगलवार को खत्म हुआ. रामगंजमंडी-ब्यावरा-भोपाल रेल परियोजना के तहत सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ के बीच 13 किमी लंबे ट्रैक पर 120 किमी/घंटे की रफ्तार से सीआरएस स्पेशल ट्रेन का सफल ट्रायल किया गया. इस नए रेलमार्ग से यात्रियों का समय 3 घंटे तक बचेगा.
नरसिंहगढ़ में सीआरएस स्पेशल ट्रेन का ट्रायल.
Rajgarh News: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में मंगलवार को एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला. क्षेत्र के लोग 25 साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे. अब तक स्थानीय लोग केवल पास से गुजरती हुई ट्रेनों को ही देखते थे. मंगलवार को नई बिछाई गई रेललाइन पर जब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सीआरएस स्पेशल ट्रेन नरसिंहगढ़ स्टेशन पहुंची तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई. पहली ट्रेन को देखने के लिए स्टेशन पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. लोगों ने तस्वीरें और वीडियो बनाए.
सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ तक बारीकी से हुई जांच
यह ट्रायल रामगंजमंडी-ब्यावरा-भोपाल रेललाइन परियोजना का हिस्सा है. इस परियोजना के तहत सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ के बीच 13 किलोमीटर लंबा रेलखंड तैयार किया गया है. मध्य सर्किल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुर प्रकाश सिंह ने इस पूरे ट्रैक का गहन निरीक्षण किया. निरीक्षण का काम सोनकच्छ और नरसिंहगढ़ स्टेशन के यार्ड की जांच के साथ शुरू हुआ. इसके बाद अधिकारियों ने मोटर ट्रॉली पर सवार होकर पूरे ट्रैक का जायजा लिया. इस दौरान रेलवे ट्रैक, पुल-पुलिया, समपार फाटक, सिग्नल और टेलीकॉम व्यवस्था जैसे सभी तकनीकी मानकों को बारीकी से परखा गया.
120 की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल
सभी सुरक्षा और तकनीकी पैमानों की जांच के बाद सीआरएस स्पेशल ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया गया. ट्रेन को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ाया गया. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह स्पीड ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा. निरीक्षण के दौरान इस नए रेलखंड पर भविष्य में यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के संचालन की संभावनाओं को भी परखा गया. इस ऐतिहासिक मौके को यादगार बनाने के लिए नरसिंहगढ़ स्टेशन पर हवन-पूजन कराया गया और पौधरोपण भी किया गया.
276 किलोमीटर लंबी परियोजना
रामगंजमंडी-भोपाल रेललाइन परियोजना की कुल लंबाई 276 किलोमीटर है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं. परियोजना को दो अलग-अलग मंडलों में बांटा गया है. भोपाल मंडल के तहत निशातपुरा डी केबिन से ब्यावरा तक 111 किलोमीटर का रेलमार्ग आता है. वहीं, ब्यावरा से राजस्थान के रामगंजमंडी की ओर 165 किलोमीटर का हिस्सा कोटा मंडल के अंतर्गत शामिल है. सोनकच्छ-नरसिंहगढ़ रेलखंड के निरीक्षण के बाद भोपाल मंडल में अब तक 89 किलोमीटर रेललाइन का निर्माण पूरा हो चुका है. अब नरसिंहगढ़ से कुरावर के बीच बचे हुए 22 किलोमीटर रेलखंड का काम चल रहा है. रेलवे ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है.
समय और ईंधन दोनों की होगी भारी बचत
यह रेल परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों को आपस में जोड़ेगी. इसके पूरा होने से मध्यप्रदेश के भोपाल, सीहोर और राजगढ़ जिले सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे. वहीं राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिले भी इससे लाभान्वित होंगे. नया रेलमार्ग पुराने ब्यावरा-झालावाड़ मार्ग की तुलना में लगभग 42 किलोमीटर छोटा होगा. इससे यात्रियों के सफर का समय लगभग 3 घंटे घट जाएगा. ट्रेनों के संचालन में लगने वाले ईंधन की खपत में भी कमी आएगी.
निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ के बीच हुए इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. इनमें भोपाल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी, मुख्य परियोजना प्रबंधक पंकज स्वैन, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) एमएस हाशमी और उप मुख्य अभियंता (निर्माण) मोहम्मद वसीम प्रमुख रूप से शामिल रहे. साथ ही रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे ट्रायल के दौरान साथ रहे.