नरक चतुर्दशी पर जलाएं यम दीपक, कुछ बातों का रखें ध्यान, छोटी सी भूल पड़ेगी भारी!

नरक चतुर्दशी पर जलाएं यम दीपक, कुछ बातों का रखें ध्यान, छोटी सी भूल पड़ेगी भारी!


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नरक चतुर्दशी पर जलाएं यम दीपक, कुछ बातों का रखें ध्यान, छोटी भूल पड़ेगी भारी!

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Narak Chaturdashi Date: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर यमराज की विधि-विधान से पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है. इसे नरक चतुर्दशी और छोटी दीवाली के नाम से जाना जाता है. यह पर्व दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा और उनके निमित्त दीपदान करने का विधान है. मान्यता है कि घर के बाहर यम दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है. आखिर नरक चतुर्दशी पर यम दीप जलाने की परंपरा क्यों शुरू हुई और इसका क्या महत्व है, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं.

वैदिक पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है. इस साल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 7 नवंबर सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगी. ऐसे में नरक चतुर्दशी 7 नवंबर दिन शनिवार को मनाई जाएगी. चतुर्दशी के समाप्त होते ही अमावस्या शुरू हो जाती है.

दीपक जलाने से मोक्ष की प्राति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से दीपदान करने पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज की कृपा प्राप्त होती है. दीपक जलाते समय व्यक्ति यमदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करता है. साथ ही नरक के कष्टों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति की प्रार्थना भी की जाती है. यह दीपक जीवन से नकारात्मकता और बुराइयों को दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है.

छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दीवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध कर लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इसी विजय की स्मृति में इस पर्व को नरक चतुर्दशी के नाम से भी मनाया जाता है. इस दिन घरों की विशेष साफ-सफाई कर फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजावट की जाती है. शाम को दीपक जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संदेश दिया जाता है.

भूल से भी न करें इस दिन ये काम
यमलोक के देवता कहलाने वाले यमराज की नरक चतुर्दशी के दिन पूजा की जाती है, इसलिए इस दिन किसी भी जीव की हत्या न करें. यम की दिशा दक्षिण मानी गई है, इसलिए इस दिन घर की दक्षिण दिशा को भूल से भी गंदा न रखें. शास्त्रों में तेल का दान विशेष महत्व रखता है लेकिन इस दिन तेल का दान नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. साथ ही इस दिन तामसिक भोजन नहीं खाना चाहिए.



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