दिवाली से पहले अखबार में छपी ऐसी रिपोर्ट, ठनक गया सुप्रीम कोर्ट का माथा – unrestricted firecrackers sale in Delhi Supreme Court express concern

दिवाली से पहले अखबार में छपी ऐसी रिपोर्ट, ठनक गया सुप्रीम कोर्ट का माथा – unrestricted firecrackers sale in Delhi Supreme Court express concern


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दिवाली से पहले अखबार में छपी ऐसी रिपोर्ट, ठनक गया सुप्रीम कोर्ट का माथा

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्‍तेमाल को लेकर 2 नवंबर 2026 को बड़ा आदेश दिया था. इसके बावजूद दिल्‍ली में खुलेआम पटाखों की बिक्री होने की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें आदेशों की अनदेखी की गई. सुप्रीम कोर्ट ने इसपर चिंता जताते हुए ASG को अहम निर्देश दिए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली में बेलगाम बिकते पटाखों पर चिंता जताई है. (फाइल फोटो)

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 3 नवंबर 2026 को दिल्ली के बाजारों में दीपावली से पहले लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद विभिन्न प्रकार के पटाखों की खुलेआम बिक्री होने संबंधी खबर पर चिंता जताई. अदालत ने इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कथित उल्लंघनों पर गौर करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित एक खबर का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत के सोमवार 2 नवंबर के आदेश के बावजूद बाजारों में पटाखे उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है.

जस्टिस सुंदरेश ने भाटी से कहा, ‘आज हिंदुस्तान टाइम्स में एक तस्वीर है. उनका कहना है कि कल (2 नवंबर) के आदेश के बावजूद अब पटाखों की दुकानों में सब कुछ उपलब्ध है. कृपया इस पर गौर करें.’ पीठ ने खबर में विभिन्न प्रकार के पटाखों की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजार में लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर कोड वाले और बिना क्यूआर कोड वाले सभी प्रकार के पटाखे कथित तौर पर बिक रहे हैं. जस्टिस सुंदरेश ने कहा, ‘उनका कहना है कि बाजार में हर दूसरे प्रकार का पटाखा उपलब्ध है. लाइसेंस प्राप्त, बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर कोड वाले या बिना क्यूआर कोड वाले, सब कुछ उपलब्ध है. कृपया इस पर ध्यान दें.’

क्‍या है सुप्रीम कोर्ट का 2 नवंबर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में 4 से 6 नवंबर तक प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री और 7 तथा 8 नवंबर को उनके इस्तेमाल की अनुमति दी थी. हालांकि, अदालत ने पटाखे जलाने के लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक की समयसीमा निर्धारित की थी. 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध बहाल करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से प्रमाणित पटाखों का ही निर्माण और बिक्री की जा सकती है.

ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार, पटाखों बिक्री को निर्धारित स्थानों तक सीमित रखने और ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने का भी निर्देश दिया गया था. पटाखों के प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद-विशिष्ट क्यूआर कोड अनिवार्य किया गया था, ताकि खरीदार उसकी प्रमाणिकता की जांच कर सकें. पटाखों की लड़ियां (लड़ी) बनाने और बेरियम युक्त पटाखों के निर्माण पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की तीन नवंबर को प्रकाशित खबर के अनुसार, दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी सहित कई बाजारों में पटाखों की खुलेआम बिक्री देखी गई. अखबार ने 22 अक्टूबर और दो नवंबर को इन बाजारों में किए गए निरीक्षण के आधार पर बताया कि दुकानदार हरित, प्रदूषण मुक्त और शून्य प्रदूषण वाले पटाखों के नाम से उत्पाद प्रदर्शित कर रहे थे. हालांकि, ग्राहकों के मांगने पर पारंपरिक पटाखे भी कथित तौर पर उपलब्ध कराए जा रहे थे.

क्‍या है रिपोर्ट

खबर के मुताबिक, कई पटाखों के डिब्बों पर क्यूआर कोड नहीं थे. कुछ डिब्बों पर मौजूद क्यूआर कोड प्रमाणन की पुष्टि करने के बजाय ऑनलाइन कैटलॉग पर ले जा रहे थे. कुछ दुकानदार कथित तौर पर पारंपरिक पटाखों को छिपाकर रखते थे और ग्राहकों के मांगने पर उन्हें बाहर निकालते थे. सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मद्देनजर पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा था कि पहले लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल रोकने में प्रभावी नहीं रहे हैं. अदालत ने चिंता जताई थी कि पारंपरिक पटाखे अक्सर हरित पटाखों के नाम पर बेचे जा रहे हैं और संबंधित अधिकारी उसके पहले के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं.



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