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चीन 18 नवंबर को टनल-बोरिंग मशीनों के निर्यात पर पाबंदी लगाने की तैयारी कर रहा है. इसी बीच, भारत ने कड़ा संदेश दिया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि अगर चीन मशीनें नहीं देगा, तो भारत खुद इनका निर्माण करेगा. इसके अलावा, भारतीय स्टार्टअप्स ने चीन के ‘रेयर-अर्थ’ धातु का तोड़ निकालते हुए इसके बिना ही पावरफुल मोटरें बनाना शुरू कर दिया है.
पीयूष गोयल.
चीन को शायद लगा था कि टनल-बोरिंग मशीनों यानी पहाड़ों और जमीन के अंदर सुरंग बनाने वाली विशाल मशीनों की सप्लाई रोककर वह भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेट्रो प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लगा देगा. लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चीन को साफ मैसेज दिया कि अगर वो हमें मशीनें नहीं देंगे, तो हम खुद अपनी मशीनें बनाएंगे.
चीन की सबसे बड़ी ताकत रेयर-अर्थ मटीरियल यानी इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी और डिफेंस इक्वीपमेंट में इस्तेमाल होने वाली धातुएं हैं. पूरी दुनिया इसके लिए चीन पर निर्भर है. चीन ने जब इनकी सप्लाई रोकी, तो भारत ने तुरंत इसका तोड़ ढूंढ निकाला. पीयूष गोयल ने देसी स्टार्टअप्स के साथ बैठक कर चुनौती दी कि क्या हम बिना रेयर-अर्थ के मोटर नहीं बना सकते? आज भारतीय स्टार्टअप्स ऐसी मोटरें तैयार कर रहे हैं जो बिना इन चीनी धातुओं के भी उतनी ही गुणवत्ता और पावर दे रही हैं.
कोई समझौता नहीं, लेकिन कोई दुश्मनी भी नहीं
गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत तकनीकी दबाव में आकर अपने रणनीतिक हितों का सौदा नहीं करेगा. अन्य देश शायद घुटने टेक कर समझौते कर लें, लेकिन भारत की राह अलग है. इसके साथ ही उन्होंने कूटनीतिक संतुलन साधते हुए यह भी साफ किया कि भारत चीन से रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहता. अगर चीन की तरफ से कोई अड़ंगा नहीं आता है, तो संबंध अच्छे बने रहेंगे.
पाबंदियों से पैदा हो रहा नया मेक इन इंडिया
यह खबर महज़ एक बयान नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत अब किसी ब्लैकमेलिंग का शिकार नहीं होगा. चाहे सुरंग बनाने वाली भारी-भरकम मशीनें हों या इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मोटरें, विदेशी पाबंदियां अब भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार रोकने के बजाय देश के भीतर एक नया मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम खड़ा कर रही हैं. चीन की ‘ना’ भारत के स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए एक नया बाज़ार बन गई है.