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Brown Rice Truth: अक्सर आप सुनेंगे कि व्हाइट राइस यानी सफेद चावल न खाएं. इसकी जगह ब्राउन राइज खाएं. ब्राउन राइस से शुगर नहीं बढ़ती. यह भी कहा जाता है कि ब्राउन राइस से कोई बीमारी नहीं होती. सोशल मीडिया पर ऐसी बातों की भरमार है. लेकिन क्या यह बात सच है कि ब्राउन राइस सब दुखों की दवा है. क्या है सच्चाई, आइए जानते हैं.
ब्राउन राइस में कितना दम.
Brown Rice vs White Rice: ब्राउन राइस और व्हाइट राइस को लेकर अक्सर बहस चलती रहती है. व्हाइट राइस को तो कोई भी अच्छा नहीं कहता लेकिन ब्राउन राइस के बारे में बहुत बातें की जाती है. कुछ लोग कहते हैं कि ब्राउन राइस खाने से शुगर नहीं बढ़ती जबकि कुछ लोग कहते हैं कि ब्राउन राइस खाने से बीमारी नहीं होती. इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्राउन राइस ज्यादा हेल्दी है. कई अध्ययनों में इसकी पुष्टि की गई है. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक अर्काइव्स ऑफ इंटरनल मेडिसीन के एक रिसर्च पेपर ब्राउन राइस पर अध्ययन के परिणाम आए थे. इस अध्ययन में 14 से 22 सालों तक करीब 2 लाख अमेरिकियों के हैबिट पर अध्ययन किया गया था. अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस का सेवन किया उनमें टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम 16 प्रतिशत तक कम हो गया. हालांकि सेहत के सारे पैमाने इसी ब्राउन राइस पर फिट बैठे, यह जरूरी नहीं. अब सवाल है कि क्या ब्राउन राइस बीमारियों को दूर भगाता है. आइए इसे समझते हैं.
ब्राउन राइस और व्हाइट राइस होता क्या है
पहले तो यह जानने की कोशिश करते हैं कि ब्राउन राइस और व्हाइट राइस होता क्या है. दोनों में अंतर क्या है और क्या हमलोग इसे समझते हैं. दरअसल, दोनों में पॉलिशिंग के कारण अंतर हो जाता है. खेत में धान तैयार होता है. धान चारों ओर से छिलके में बंद करके चावल को रखता है. धान के मिल में पहले धान को भाप लगाया जाता है. इस कारण छिल्का और चावल की सबसे उपरी परत जिसे ब्रान कहते हैं उनमें मौजूद पोषक तत्व थोड़ा अंदर चला जाता है. भांप लगने के बाद मशीन में धान के छिलके को हटा दिया जाता है. यानी धान से भूसा हटा दिया जाता है. अब जो चावल बचता है वही ब्राउन राइस है. इसमें अंदर का चावल अपनी प्राकृतिक ब्रांन परत और जर्म के साथ बचा रहता है. इसी भूरे रंग की परत के कारण इसे ब्राउन राइस कहते हैं. इसमें फाइबर, विटामिन बी और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं. दूसरी ओर अब इस ब्राउन चावल को जब पॉलिश किया जाता है तो इसकी उपरी परत निकल जाती है और चावल का रंग और अधिक सफेद हो जाता है. इस प्रक्रिया में चावल की उपरी परत और जर्म निकल जाता है. इससे चावल के अंदर का स्टार्च वाला हिस्सा बच जाता है. इसे ही व्हाइट राइस कहते हैं.
दोनों में मौजूद पोषक तत्व
किसका कितना ग्लाइसेमिक इंडेक्स
किसी फूड से ब्लड शुगर कितना बढ़ेगा इसके लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है. इसे 0 से 100 के बीच रैंक में रखा जाता गै. जितना कम जीआई होगा उससे उतना कम शुगर बढ़ने का चांस रहेगा. व्हाइट राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 73 ± 4है. यानी यह काफी उच्च है. इससे शुगर का लेवल जल्दी बढ़ सकता है. वहीं ब्राउन राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 68 ± 4 है. यानी ब्राउन राइस का शुगर इंडेक्स व्हाइट राइस से कम है. इसलिए डायबिटीज मरीजों को व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस खाने की सलाह दी जाती है.
क्या ब्राउन राइस से बीमारी नहीं होता
यह पूरी तरह गलत है. किसी बीमारी के नहीं होने का संबंध उस व्यक्ति के ऑवरऑल खान-पान, लाइफस्टाइल, पर्यावरण और जेनेटिक कारकों पर निर्भर है. इसलिए यह कहना है कि ब्राउन राइस से कोई बीमारी नहीं होती गलत है. 2022 के एक अध्ययन में यह भी पाया गया था कि ब्राउन राइस से शुगर न बढ़ें, इसकी कोई गारंटी नहीं है.