अलविदा नंद लालः सोनिया गांधी की सुरक्षा में तैनात कमांडो से विधायक तक…बगावत के बिगुल से बचाने के लिए सीएम सुक्खू ने चली थी बड़ी चाल


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हिमाचल प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक नंद लाल के निधन के बाद अब यहां उपचुनाव होगा. नंद लाल वित्तायोग के अध्यक्ष थे और 72 वर्ष के थे.

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अलविदा नंद लालः कमांडो से विधायक तक...बगावत के शोर में सीएम का ऑफर Zoom

हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले की रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक नंद लाल के निधन के बाद अब सीट खाली हो गई है.

शिमला. हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के रामपुर से कांग्रेस विधायक और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का बीमारी के चलते 72 साल की उम्र में निधन हो गया. वह शिमला के आईजीएमसपी अस्पताल में भर्ती होने के बाद शहर के ही अटल सुपर स्पेशलिटीज़ आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना अस्पताल रेफर किए गए थे. 2 नवंबर को चमियाना में भर्ती होने के बाद उन्होंने तीन नंवबर की सुबह साढ़े पांच बजे अंतिम सांस ली.

जानकारी के अनुसार, नंद लाल शिमला के रामपुर विधानसभा (रिजर्व) से चार वार के विधायक थे. 2007 में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और जीता था. उसके बाद 2012, 2017 और 2022 में उन्होंने लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीते. वीरभद्र सिंह सरकार में विधायक नंद लाल को वर्ष 2013 में मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया था.

नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी में हुआ था.  आईटीबीपी में में रहते हुए उन्हें सोनिया गांधी की सुरक्षा में बतौर एसपीजी कमांडो के रूप मे लम्बे समय तक काम करने का अवसर भी मिला. इसी वजह से 2007 में उनका टिकट सीधा दिल्ली हाईकमान से फाइनल हुआ था.

नंद लाल ने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से 1976 में राजनीतिक विज्ञान में एमए की पढ़ाई की थी.  इसके बाद उन्होंने आईटीबीपी की नौकरी ज्वाइन की थी. 1980 से 2007 में उन्होंने आईटीबीपी में नौकरी की और फिर वीआरएस ले ली और एडीजी के पद से रिटायर हुए थे. नंद लाल ने करीब 22 साल तक आईटीबीपी में तैनात रहे और साल 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. नंद लाल की सेवाओं को पूर्व पीएम राजीव गांधी और चंद्रशेखर ने भी खूब सराहा था और दोनों नेताओं की ओर से उन्हें  प्रशंसा पत्र दिया गया था.

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नंद लाल के निधन को कांग्रेस पार्टी और रामपुर की जनता के लिए अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने कहा कि नंद लाल बेहद नेक, ईमानदार और सादगी पसंद व्यक्ति थे. उनका जाना पार्टी के लिए बहुत बड़ा नुकसान है. रामपुर की जनता ने अपना एक ऐसा जनप्रतिनिधि खो दिया है, जो हमेशा लोगों की समस्याओं को सुनता था और उनके समाधान के लिए प्रयास करता था.

सरकार बचाने के लिए ऑफर

2024 में जब प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायकों ने बगावत कर दी थी तो नंद लाल को भी टूटन से बचाने के लिए सीएम सुक्खू ने बड़ा दांव चला था और नंद लाल को वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया था. क्योंकि नंद लाल वीरभद्र गुट से थे और सभी बगावत करने वाले विधायक भी वीरभद्र गुट के ही थे तो सीएम सुक्खू को आशंका थी कि नंद लाल को भी तोड़कर सरकार के खिलाफ खड़ा किया जा सकता है.



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