Tejesh Vaish IIT Kanpur to Dubai Story: मिठाई वाले के बेटे को मिला 2.5 करोड़ का पैकेज, आईआईटी कानपुर से पढ़कर पहुंचा दुबई

Tejesh Vaish IIT Kanpur to Dubai Story: मिठाई वाले के बेटे को मिला 2.5 करोड़ का पैकेज, आईआईटी कानपुर से पढ़कर पहुंचा दुबई


नई दिल्ली (Tejesh Vaish IIT Story). हौसले बुलंद हों तो तंगहाली और अभावों का चक्रव्यूह तोड़कर आसमान छूना नामुमकिन नहीं है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले 26 वर्षीय तेजेश वैश्य की कहानी बेहद इंस्पायरिंग है. लखनऊ कैंट के सदर बाजार में उनके पिता अशोक कुमार वैश्य की बेहद छोटी-सी मिठाई की दुकान है. उससे सालाना 5 लाख रुपये के आस-पास कमाई होती है. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी. लेकिन पिता ने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई आंच नहीं आने दी.

साधारण बैकग्राउंड से निकलकर तेजेश वैश्य ने अपनी काबिलियत और कठिन मेहनत के दम पर खास मुकाम हासिल किया है. IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद तेजेश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में लंबी छलांग लगाई है. उन्हें दुबई के एक प्रतिष्ठित अमेरिकी AI स्टार्टअप में बतौर AI इंजीनियर 2.5 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी मिली है. पिता की दुकान पर कस्टमर्स हैंडल करने वाले तेजेश अब दुबई के कॉर्पोरेट गलियारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को आकार दे रहे हैं.

साधारण परिवार से तय किया IIT कानपुर तक का कठिन सफर

तेजेश वैश्य का परिवार मूल रूप से यूपी के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखता है. ये लोग आजीविका की तलाश में लखनऊ शिफ्ट हो गए थे. उनके परिवार में आज तक किसी ने कॉलेज का मुंह नहीं देखा था. ऐसे में तेजेश हायर एजुकेशन लेने और टेक्नोलॉजी की दुनिया में परचम लहराने वाले अपने खानदान के पहले शख्स हैं. तेजेश ने जेईई परीक्षा में 99.9 परसेंटाइल और UPSEE में AIR 9 हासिल की थी. उन्होंने IIT कानपुर से 9.14 CPI के शानदार स्कोर के साथ कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली.

स्कॉलरशिप से आसान हुई राह

स्कूल और फिर बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान तेजेश ने कई प्रतिष्ठित फेलोशिप और स्कॉलरशिप हासिल कीं. इनमें ‘अल्फा ग्रेप मेरिट स्कॉलरशिप’, ‘C3iHub यूजी फेलोशिप’ और ‘पीडी मूर्ति स्कॉलरशिप’ शामिल हैं. कॉलेज के शुरुआती दिनों से ही उन्होंने कई इंटर्नशिप करके अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश शुरू कर दी थी. इससे उनकी पढ़ाई परिवार पर कभी बोझ नहीं पड़ी. ग्रेजुएशन पूरा होने से पहले ही वह करीब 2 लाख रुपये कमा चुके थे.

बेंगलुरु में रखी करियर की नींव

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद तेजेश वैश्य ने अपने करियर की शुरुआत देश की सिलिकॉन वैली यानी बेंगलुरु से की थी. अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ काम किया. अपने अब तक के करियर में उन्होंने टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (Texas Instruments), सिक्यूरोनिक्स (Securonix), स्क्वेयरपॉइंट कैपिटल (Squarepoint Capital) और अबेकस.एआई (Abacus.AI) जैसी दिग्गज कंपनियों में काम किया है.

दुबई में मिली करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी

तेजेश वैश्य दुबई में अमेरिका की एक AI फर्म में हाइब्रिड रोल संभाल रहे हैं. यहां उनका काम एडवांस्ड AI एजेंट्स, मशीन लर्निंग सिस्टम्स और लार्ज-स्केल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है. दुबई में 2.5 करोड़ रुपये की सैलरी सुनकर भले ही बहुत रोचक लगे. लेकिन वहां की लाइफस्टाइल और खर्चे भी ज्यादा हैं. तेजेश बताते हैं कि दुबई में रहने और ऑफिस का किराया अमेरिका के मुकाबले भी काफी ज्यादा है. वह हर महीने करीब 3 लाख रुपये बचाते हैं और उतना ही अमाउंट म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए इन्वेस्ट करते हैं.

लखनऊ में बनवा रहे हैं अपना आशियाना

तेजेश वैश्य की इस सफलता का सबसे खूबसूरत पहलू है कि वह अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लखनऊ में अपने परिवार के लिए नया और पक्का घर बनवाने में लगा रहे हैं. तेजेश गर्व से कहते हैं कि वह आज महीने में उतना कमा लेते हैं, जितना उनके पिता कमाने में कई साल लगा देते थे. तेजेश के अनुसार, दुबई की सबसे अच्छी बात वहां का बैलेंस्ड वर्क-कल्चर है. वहां एंप्लॉई तय घंटों तक काम करते हैं और वीकेंड्स पर ऑफिस का कोई स्ट्रेस नहीं होता.

तेजेश वैश्य की सक्सेस स्टोरी से 3 सबक

  • डिग्री से ज्यादा जरूरी है स्किल: तेजेश की सफलता साबित करती है कि अगर आपके पास सही टेक स्किल्स और कुछ नया सीखने का जज्बा है तो आपका फैमिली बैकग्राउंड कभी भी सफलता के आड़े नहीं आ सकता.
  • इन्वेस्टमेंट की सही कला: इतनी कम उम्र में भारी पैकेज मिलने के बावजूद तेजेश वैश्य का SIP और निवेश पर ध्यान देना सिखाता है कि करियर की शुरुआत से ही सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट की आदत कितनी जरूरी है.
  • कठिन मेहनत का विकल्प नहीं: कॉलेज के दिनों में देर रात तक जागना और पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप करना बताता है कि सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि लगातार कोशिश करने से मिलती है.



Source link