Nitin Nabin Kolkata Rally: कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट से धर्मतला तक नितिन नबीन को क्यों निकालनी पड़ रही पदयात्रा? समझिए 5 बड़े सियासी मायने


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नितिन नवीन को कोलकाता में क्यों निकालनी पड़ रही पदयात्रा? 5 बड़े सियासी मायने

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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 2 नवंबर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू होने जा रहा है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट से धर्मतला तक इस पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के भी शामिल होने की बात कही गई है. अभियान के तहत राज्य के पांच संगठनात्मक क्षेत्रों में कार्यक्रम होंगे. जानें इस पदयात्रा के क्या हैं 5 बड़े सियासी मायने?

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नितिन नवीन को कोलकाता में क्यों निकालनी पड़ रही पदयात्रा? 5 बड़े सियासी मायनेZoom

नितिन नवीन की कोलकाता पदयात्रा के पीछे क्या है BJP का प्लान? SIR से चुनाव तक समझिए 5 बड़े सियासी मायने

Nitin Nabin Kolkata Rally: देश में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के बढ़ते सियासी हमलों के बीच बीच भी अब सड़कों पर उतरकर तगड़ा पलटवार करने जा रही है. इसकी अगुवानी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन खुद करने वाले हैं. वह सोमवार को कोलकाता में एक विशाल पदयात्रा का नेतृत्व करने वाले हैं. ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित यह मार्च कोलकाता के प्रसिद्ध कॉलेज स्ट्रीट से शुरू होकर धर्मतला पर खत्म होने वाला है. एक तरफ विपक्षी दलों की तरफ से दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की गई और केंद्र सरकार पर लगातार  ‘वोट चोरी’ के आरोपों लगाए जा रहे हैं. ऐसे में बीजेपी की तरफ से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत कोलकाता में पदयात्रा के क्या हैं 5 बड़े सियासी मायने हैं?

  1. विपक्ष के ‘वोट चोरी’ नैरेटिव का जवाब: दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली के जरिए विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया है. केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए गए. अब बीजेपी कोलकाता से अपने अभियान के जरिए इस नैरेटिव का जवाब देने की कोशिश करने वाली है. पार्टी का संदेश है कि विपक्ष के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों के बीच वह भी जनता के बीच जाकर अपना पक्ष रखेगी. इस तरह दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई अब सड़कों पर दिखाई दे रही है.
  2. SIR के मुद्दे पर अपनी बात जनता तक पहुंचाना: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है. विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है और मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जता रहा है. दूसरी तरफ बीजेपी विपक्ष के विरोध को गलत जानकारी फैलाने की कोशिश बताती है. ऐसे में पदयात्रा के जरिए पार्टी SIR पर अपना पक्ष लोगों तक पहुंचाना चाहती है. यह अभियान इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बहस में बीजेपी की जवाबी रणनीति का हिस्सा है.
  3. बंगाल में संगठन को सक्रिय करने की कोशिश: बीजेपी इस अभियान को केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रखना चाहती. पार्टी की योजना राज्य के पांच संगठनात्मक क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की है. इसके अगले चरण में 11 से 30 नवंबर के बीच करीब 800 स्थानों पर कार्यक्रम करने की तैयारी है. इससे साफ है कि पार्टी इस अभियान के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और अलग-अलग इलाकों में संगठन की मौजूदगी बढ़ाना चाहती है.
  4. कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनावों पर नजर: इस पदयात्रा का एक अहम राजनीतिक पहलू कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनाव भी हैं. बीजेपी इन चुनावों की तैयारियों में जुटी है. नितिन नवीन के दौरे को इसी संगठनात्मक तैयारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है. पदयात्रा के जरिए पार्टी शहरी इलाकों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में यह कार्यक्रम आगामी स्थानीय चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.
  5. राष्ट्रीय नेतृत्व और बंगाल इकाई के बीच तालमेल: नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मौजूदगी भी इस कार्यक्रम का अहम पहलू है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का खुद सड़क पर उतरना प्रदेश इकाई के लिए संगठनात्मक संदेश है. इससे केंद्रीय नेतृत्व और बंगाल के नेताओं के बीच तालमेल दिखाने की कोशिश भी होगी. पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साझा अभियान के तहत जोड़ना चाहती है.



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