New Expressway : लखनऊ से बहराइच सिर्फ 1 घंटे में, बनने जा रहा 100 किलोमीटर का नया एक्सप्रेसवे

New Expressway : लखनऊ से बहराइच सिर्फ 1 घंटे में, बनने जा रहा 100 किलोमीटर का नया एक्सप्रेसवे


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Lucknow-Bahraich Expressway : लखनऊ से बहराइच तक आने-जाने में अभी 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन जल्द ही यह समय सिर्फ 1 घंटे का रह जाएगा. लखनऊ से बहराइच के बीच में 100 किलोमीटर का नया एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है. प्राधिकरण ने इसका प्लान भी बता दिया है और भूमि अधिग्रहण का काम अभी चल रहा है. अनुमान है कि अगले साल जनवरी से इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.

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पीएम मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट ने बाराबंकी से बहराइच तक एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 बनाने को मंजूरी दी थी. शुरुआत में इस एक्सप्रेसवे को 4 लेन का बनाया जाएगा, जिसे बाद में 6 लेन किया जा सकता है. ई-वे की कुल लंबाई करीब 101 किलोमीटर हो सकती है, जिसे बनाने पर 6,969.04 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. एक बार निर्माण पूरा हो गया तो लखनऊ से बहराइच तक आने-जाने सिर्फ 1 से डेढ़ घंटे का समय लगेगा.

बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे एक तरह से लखनऊ-रुपईडीह कॉरिडोर का हिस्सा है. अभी इस रास्ते की सड़कें संकरी हैं और तीखे मोड़ की वजह से जाम की समस्या बनी रहती है. साथ ही हादसे की आशंका भी बनी रहती है. लेकिन, नए ई-वे को भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर बनाया जाएगा और इस पर कोई क्रॉसिंग या अन्य रुकावट नहीं रहेगी जिससे आने-जाने का समय काफी कम हो जाएगा.

लखनऊ प्राधिरकण ने इस प्रोजेक्ट को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाने की बात कही है. इसका मतलब है कि ई-वे के निर्माण लागत का ज्यादातर बोझ निजी भागीदार ही उठाएंगे और सरकार की ओर से समय-समय पर एन्युटी जारी की जाएगी. इस एक्सप्रेसवे पर 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास भी बनाया जाएगा और लोकल ट्रैफिक के लिए सर्विस लेन का भी निर्माण किया जाएगा. यह एक्सप्रेसवे सिर्फ लखनऊ, बाराबंकी या बहराइच को ही कनेक्टिविटी नहीं देगा, बल्कि और भी कई इलाकों को जोड़ेगा.

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बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराइच को कनेक्टिविटी मिलेगी. इसके अलावा गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती जैसे जिलों में भी आसपास जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी होगी. यह एक्सप्रेसवे यूपी के तराई और पूर्वांचल वाले इलाकों तक सीधी और आसान पहुंच दिलाएगा. इसका मतलब है कि इस ई-वे के जरिये लखनऊ से तराई और पूर्वांचल के क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा.

यह एक्सप्रेसवे सिर्फ बहराइच को लखनऊ से ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि नेपाल बॉर्डर तक कारोबार को भी बढ़ाएगा. इससे क्रॉस बॉर्डर व्यापार, पर्यटन और ट्रांजिट में भी तेजी आएगी. इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग 27, 330एन, 730, स्टेट हाईवे 13 और 30बी जैसे इलाकों को भी कनेक्टिविटी मिलेगी. इस प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद यात्रा तो सुरक्षित होगी ही, ईंधन और समय की भी काफी बचत होगी. इस ई-वे से लखनऊ, बाराबंकी और बहराइच जैसे जिलों के बीच आवाजाही और कनेक्टिविटी काफी अच्छी हो जाएगी.

बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे से सिर्फ कनेक्टिविटी ही बेहतर नहीं होगी, बल्कि 36 लाख लोगों को रोजाना प्रत्यक्ष रोजगार और 43 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा. इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद आसपास की जमीनों के भाव भी बढ़ेंगे और किसानों को फायदा होगा. यह ई-वे तराई इलाकों से फलों और सब्जियों को शहरों की मंडी तक पहुंचाने और लखनऊ जैसे महानगर तक सस्ती कीमत पर सब्जी-फल पहुंचाने में मदद करेगा.

ई-वे बनाने के लिए जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है. इसकी कुल लागत में से करीब 1,574 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर किए जाएंगे. एनएचएआई का कहना है कि इसके रास्ते में वन विभाग की 70 हेक्टेअर जमीन भी है, जिस पर लगे पेड़ों को काटा जाना है. हालांकि, नियमों के तहत इसका 10 गुना पेड़ भी लगाया जाएगा. वन विभाग को 70 हेक्टेअर जमीन के लिए करीब 900 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा.



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