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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इक्विटी टैक्सेशन पर बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि भारत की टैक्स व्यवस्था को लेकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और घरेलू शेयर बाजार इन्वेस्टर्स की चिंताएं बढ़ रही हैं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. (File Photo : Reuters)
नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इक्विटी टैक्सेशन पर बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि भारत की टैक्स व्यवस्था को लेकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और घरेलू शेयर बाजार इन्वेस्टर्स की चिंताएं बढ़ रही हैं. इस पर सरकार को मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर वह विचार करेंगी. साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान में वही टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जो 2023 में रिकॉर्ड विदेशी निवेश के प्रभावी था; हालांकि, अब हालात बदल चुके हैं. विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है.
आगामी बजट में विदेशी निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल टैक्स व्यवस्था या उन्हें विशेष रियायतें देने की संभावना से जुड़े सवाल पर सीतारमण ने इक्विटी टैक्सेशन में बदलाव को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि निवेशकों के सामने परिस्थितियां बदल गई हैं और उनकी चिंताएं अब पहले से अधिक मुखर हो गई हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान अर्थव्यवस्था की विकास दर को 7 फीसदी या उससे अधिक बनाए रखने पर केंद्रित है.
12.5 फीसदी है एलटीसीजी टैक्स
विदेशी और घरेलू निवेशकों द्वारा शेयर बेचने पर 12.5 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैकस लगता है. इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता. यह टैक्स लिस्टेड शेयरों की बिक्री से एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर वसूला जाता है.