Half Anna Coin History: ‘आधे आने’ की कहानी, स‍िक्‍कों पर कैसे आए अशोक स्तंभ और बैल, कैसे हो गया गायब

Half Anna Coin History: ‘आधे आने’ की कहानी, स‍िक्‍कों पर कैसे आए अशोक स्तंभ और बैल, कैसे हो गया गायब


जरा अपनी जेब में रखे किसी पुराने सिक्के को देखिए। क्या आपने कभी सोचा है कि आजादी के बाद भारत के सिक्कों पर पहली बार कौन-सी तस्वीर छपी थी? साल था 1950. देश गणतंत्र बन चुका था. अंग्रेजों का शासन खत्म हो गया था. अब बारी थी भारतीय मुद्रा को नई पहचान देने की. इसी दौर में आया ‘आधा आना’ का यह सिक्का, जिस पर राजा की तस्वीर की जगह अशोक स्तंभ के सिंह शीर्ष ने ले ली.

15 अगस्त 1950 को आया आजाद भारत का नया सिक्का

रिजर्व बैंक म्‍यूज‍ियम के डॉक्‍यूमेंट के अनुसार, 15 अगस्त 1950 को भारत की पहली गणतांत्रिक सिक्का सीरीज जारी की गई. इसे आना सीरीज कहा गया. इस सीरीज में आधा आना, एक आना, दो आना और दूसरे मूल्यवर्ग के सिक्के शामिल थे. पुराने ब्रिटिश राजा की तस्वीर हटाकर अशोक स्तंभ को जगह दी गई.

सिक्के पर बैल क्यों बनाया गया?

इस सिक्के को पलटिए तो एक बैल दिखाई देता है. यह कोई साधारण डिजाइन नहीं था. भारतीय मुद्रा पर भारतीय प्रतीकों को जगह देने की कोशिश की जा रही थी. सिक्के पर अंग्रेजी में ‘HALF ANNA’ और हिंदी में ‘आधा आना’ लिखा था. नीचे 1950 का साल था.

सिक्का तांबा-निकेल (Cupronickel) धातु से बनाया गया था. इसका आकार चौकोर था, लेकिन कोने गोल थे. इसका वजन करीब 2.9 ग्राम और आकार लगभग 19.5 मिलीमीटर था.

आधा आना कितना होता था?

उस दौर में एक रुपये में 16 आने होते थे. यानी आधा आना एक रुपये का 32वां हिस्सा था. एक रुपये में 16 आने होता था तो एक आने में 4 पाइस होता था. आधे आने में 2 पाइस होता था. यानी आज के दशमलव हिसाब से आधा आना 3.125 पैसे के बराबर था.

फिर कब इतिहास बन गया यह सिक्का?

1950 में शुरू हुई इस सिक्का सीरीज का आधा आना 1950 से 1955 तक जारी हुआ. इसके बाद भारत ने मुद्रा के दशमलव सिस्टम की तरफ कदम बढ़ाया. 1 अप्रैल 1957 से रुपये को 16 आने के बजाय 100 पैसे में बांटा जाने लगा. इस बदलाव ने पुराने आना-पाई सिस्टम को धीरे-धीरे खत्म कर दिया. आधा आना भी बाजार से गायब हो गया.

आधा आना सिर्फ सिक्का नहीं, आजादी की पहचान था

1950 का यह आधा आना उस दौर का गवाह है, जब भारत अपनी मुद्रा से ब्रिटिश राज की पहचान हटाकर भारतीय गणराज्य की पहचान स्थापित कर रहा था. एक तरफ अशोक स्तंभ, दूसरी तरफ बैल और बीच में हिंदी में लिखा ‘आधा आना’. आज यह सिक्का बाजार में खरीदारी के काम नहीं आता, लेकिन भारत की मुद्रा के इतिहास में इसकी जगह खास है.



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